नर्सिंग ट्यूटरों के लिए 5 दिवसीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन, 37 प्रतिभागियों को मिले प्रमाण-पत्र



  • नर्सिंग ट्यूटरों के लिए 5 दिवसीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन, 37 प्रतिभागियों को मिले प्रमाण-पत्र
  • नवीन शिक्षण पद्धतियों से नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता को मिलेगी नई मजबूती : स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत

पटना: नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता एवं शिक्षण दक्षता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से SIHFW, पटना में आयोजित “Advanced Techniques of Newer Educational Methods” विषय पर पांच दिवसीय आवासीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण के द्वितीय बैच का शुक्रवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 24 से 28 अगस्त 2026 तक आयोजित किया गया, जिसमें कुल 37 नर्सिंग ट्यूटरों ने भाग लिया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को विद्यार्थी-केंद्रित, सहभागी एवं नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। हैंड्स-ऑन लर्निंग, स्टेशन कार्ड, कैरोसेल, कार्ड सॉर्टिंग, डिबेट एवं केस-आधारित गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों में टीम वर्क, क्रिटिकल थिंकिंग, समस्या-समाधान तथा प्रभावी संचार जैसी क्षमताओं को विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।

माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत ने कहा कि नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में प्रशिक्षित और दक्ष नर्सिंग ट्यूटरों की बड़ी भूमिका है। नवीन एवं विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों से शिक्षकों की क्षमता में वृद्धि होगी और विद्यार्थियों को बेहतर सीखने का अनुभव मिलेगा। नर्सिंग शिक्षा को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नर्सिंग ट्यूटरों को नई तकनीकों से जोड़ने के साथ उन्हें अधिक आत्मविश्वासी और नवाचार-उन्मुख बनाने में सहायक होंगे।

समापन समारोह के अवसर पर प्रशिक्षण में सफलतापूर्वक भाग लेने वाले सभी 37 प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। प्रमाण-पत्रों का वितरण प्रशिक्षण प्रभारी वृंदा लाल, निदेशक डॉ. पूनम रमन एवं राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. बी.के. मिश्रा द्वारा किया गया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि नर्सिंग शिक्षा में नवीन एवं प्रभावी शिक्षण विधियों का समावेश विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव को बेहतर बनाने के साथ-साथ शिक्षकों की शिक्षण क्षमता को भी सुदृढ़ करता है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नर्सिंग ट्यूटरों को बदलती शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक दक्ष, आत्मविश्वासी एवं नवाचार-उन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रशिक्षण के उपरांत इन नवीन शिक्षण विधियों के संस्थानों में प्रभावी उपयोग, उनके प्रभाव की समीक्षा एवं फॉलो-अप की दिशा में भी कार्य किया जाएगा, ताकि प्रशिक्षण का वास्तविक लाभ कक्षा-कक्ष एवं क्लिनिकल शिक्षण में दिखाई दे।

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