दलित महिला जनप्रतिनिधियों के लिए राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस का किया गया आयोजन।


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न्यूज़ डेस्क। आज दिनांक 9 जुलाई 2023 को ऑल इंडिया दलित महिला अधिकार मंच- NCDHR द्वारा ए. एन. सिन्हा संस्थान पटना, बिहार में एक दिवसीय राज्य स्तरीय दलित महिला पंचायती राज जन प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण के लिए एक कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर ऑल इंडिया दलित महिला अधिकार मंच की जनरल सेक्रेटरी अबिरामी ज्योतिस्वरन तथा अधिवक्ता तथा सामाजिक कार्यकर्ता लालमोहन रॉय, (बिहार) उपस्थित हुए। 

इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य था बिहार राज्य में दलित महिला जन प्रतिनिधियों का क्षमतावर्धन करना तथा उनके साथ होने वाले भेदभाव व पंचायत के विकास में आने वाली चुनौतियों और समस्याओं पर चर्चा करना तथा उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचाना शामिल रहा। इस कॉन्फ्रेंस में बिहार राज्य के 8 अलग- अलग जिलों से 38 दलित महिला प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान दलित महिला प्रतिनिधियों ने अपने- अपने पंचायत के विकास कार्य में आने वाली चुनौतियों और समस्याओं के बारे में बताया तथा अपने पंचायत में और बेहतर कार्य करने के प्रस्ताव को भी रखा। 




जनरल सेक्रेटरी अबिरामी ज्योतिस्वरन ने कॉन्फ्रेंस के मुख्य उद्देश्यों को बताते हुए ऑल इंडिया दलित महिला अधिकार के कार्यों के बारे में भी बताया। अधिवक्ता लाल मोहन राय ने दलित महिला प्रतिनिधियों के समस्याओं को सुनते हुए ग्राम पंचायत विकास योजना के बारे में विस्तृत रूप से बताया तथा ग्राम पंचायत विकास में आने वाली समस्याओं पर भी चर्चा किया।

अपनी आवाज को उठाते हुए दलित महिला जन प्रतिनिधियों ने बताया कि किस प्रकार समाज में उन्हें भेदभाव, शोषण, समस्याओं तथा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

बिहार के अलग- अलग जिलों से आए सभी दलित महिला प्रतिनिधियों ने बारी-बारी से अपनी समस्याओं और चुनौतियों को बताया। उनका कहना था की उन्हें समय पर बजट नहीं मिलता है, जिसकी वजह से विकास कार्य में उन्हें बाधा पहुँचती है। उनके सचिव और उच्च अधिकारियों से उनके कार्य में उचित सहयोग नहीं मिल पाता है। समुदाय के दबंग जातियों द्वारा कमिशन लेने के लिए तरह- तरह की उन्हें धमकीया दी जाति है और दबाव बनाया जाता है। उच्च अधिकारी बहुत से योजनाओं को लागू करने में दलित महिला मुखिया को सहयोग नहीं करते हैं तथा अपना हस्ताक्षर नहीं करते हैं, जिसकी वजह से उनके कार्य को करने में बाधा आती है। दलित महिला प्रतिनिधियों को समय पर उनका वेतन भी नहीं मिलता है। ग्राम पंचायत विकास योजना में जब भी किसी योजना को अनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने के लिए उनसे पैसे भी वसूल किया जाता है। 

कार्यकरणी की बैठक में सभी वार्ड सदस्य भाग नहीं ले पाते हैं, जिसकी वजह से योजनों को लागू करने में समस्या आती है। जब भी किसी दलित महिला प्रतिनिधि के दबंग समुदाय द्वारा मारपीट व शोषण किया जाता है तो थाना पुलिस भी उनकी समस्याओं को नहीं सुनती है, तथा बार बार फोन- कॉल करने के पश्चात भी घटना स्थल पर नहीं पहुँचती है। दलित महिला जन प्रतिनिधियों ने अपनी आवाज को उठाते हुए कहा कि जिस प्रकार से अन्य विधायकों को पेंशन की व्यवस्था होती है, उसी प्रकार पंचायत प्रतिनिधियों के लिए भी पेंशन की व्यवस्था होनी चाहिए।

इस कॉन्फ्रेंस में ऑल इंडिया दलित महिला अधिकार मंच से नैशनल टीम-दिल्ली से सुश्री पूनम, सुश्री सीमा, बिहार राज्य से AIDMAM की राज्य समन्वयक सुषमा कुमारी, विधिक सचिव राजेश्वर पासवान, गौरी कुमारी, जिला समन्वयक स्वेता कुमारी ने भाग लिया।




 

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