औरंगाबाद : बाबू केशव सिंह का नाम पुराने गया जिले(आज के गया, नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद और अरवल) में आदर के साथ लिया जाता है. वे समाज सुधारक थे और सोशलिस्ट पार्टी के कद्दावर नेता थे. 1952 में वे गया जिला के जिला परिषद उपाध्यक्ष के पद पर चुने गए थे। आजादी से पूर्व केशव बाबू स्वतंत्रा सेनानी थे तथा आजाद हिंद फौज में वह सक्रिय सदस्य थे नेताजी सुभाष चंद्र बोस को उन्होंने अनेकों बार सुन नदी पाक कराया था तथा चौरम आश्रम मैं उनकी बड़ी सभा करवाई थी।
देश आजाद होने के बाद उन्होंने जमींदारों के खिलाफ लगान वसूले जाने पर विरोध किया था तब से वह सामंती लोगों के आंखों में चुभने लगे थे उन्होंने ग्राम बरूण मैं शिक्षा सुधार हेतु अनेकों कार्य किया था उनकी प्राथमिकता लोगों को शिक्षित करना था तथा अपने अधिकारों के लड़ने के लिए जागरूक करना। गया जिला के उपाध्यक्ष रहते हेतु सामंती लोगों ने 1952 में उनकी तथा उनके परिवार के 3 लोगों की रात के अंधेरे में निर्मम हत्या कर दी परंतु उनके विचारों को वो रोक नहीं पाया और आज भी लोग उनके आदर्शों पर चलने के लिए प्रयासरत है, तथा आज भी उनके शिक्षा सुधार कार्य को देखते हुए यादव कॉलेज हेड क्लर्क जनार्दन सिंह यादव जी ने औरंगाबाद में उनकी तस्वीर स्थापित की गई है तथा अनेकों शिक्षा संस्थानों में उनके शिक्षा सुधार कार्यों को आदर्श स्वरूप देखा जाता है।

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