आज दिनांक-07.12.2020 को पुलिस केन्द्र,पूर्णियाॅं में मासिक अपराध समीक्षा गोष्ठी का आयोजन कोरोना संकट के मद्देनजर Social Distancing का पालन करते हुए किया गया। अपराध गोष्ठी में जिले के सहायक पुलिस अधीक्षक(परिक्ष्मान)/सभी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी/विशेष लोक अभियोजक, अनु0जाति/जनजाति/ जिला अभियोजन पदाधिकारी/ पुलिस अंचल निरीक्षक, विशेष शाखा के पदाधिकारी/उत्पाद विभाग के पुलिस निरीक्षक सभी थानाध्यक्ष के साथ-साथ प्रभारी चाईल्ड लाईन पूर्णियाँ भाग लिये। अपराध समीक्षा बैठक में अनुपालन हेतु निम्नांकित निर्देश गया हैः-
Covid-19 के संक्रमण को रोकने हेतु सार्वजनिक स्थल पर Mask पहना अनिवार्य है, इसलिए सभी पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों को Mask का इस्तेमाल करते हुए Social Distancing का भी पालन करने एवं अनुपालन कराने हेतु निर्देशित किया गया।
विगत माह में Liquor tracking Dog के सहयोग से कई थानों में शराब बरामद किया गया है। उसी प्रकार प्रत्येक माह उत्पाद विभाग के साथ मिलकर संयुक्त छापामारी करने तथा इसके लिए Liquor tracking Dog का सहयोग लेने का भी निर्देश दिया गया।
सभी थानाध्यक्ष/ओ0पी0 प्रभारी को थाना पर आने वाले आगन्तुकों के संबंध में एक पंजी संधारित करने का निर्देश दिया गया जिसमें उनका नाम पता तथा थाना पर आने का उद्देश्य अंकित करने जिससे स्पष्ट हो कि अनावश्यक एवं विचैलिया प्रवृति के व्यक्ति तो थाना पर नही आ रहे ।
पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार सभी थाना क्षेत्र के अपराध वाले बिन्दु पर पैदल गस्ती करने के निर्देश के आलोक में सभी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को वैसे अपराधिक घटना वाले बिन्दु को चिन्हित करने तथा सूची बनाने हेतु अपने-अपने क्षेत्र के थानाध्यक्ष से विचार-विमर्ष करने तथा थानावार सूची उपलब्ध करने का निर्देश दिया ।
सभी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी एवं अंचल पुलिस निरीक्षक को निर्देश दिया गया कि नवम्बर-2020 के पूर्व के पर्यवेक्षण हेतु लंबित सभी कांडो का पर्यवेक्षण अविलम्ब एक सप्ताह के अंदर करते हुए पर्यवेक्षण टिप्पणी समर्पित करने का निर्देश दिया गया ।
अपराध गोष्ठी में प्रभार देने हेतु लंबित कांडों का समीक्षा किया गया। जिसमें कई कांड स्थानांतरित अनुसंधानक द्वारा कांडों का प्रभार नहीं सौपा गया है। वैसे सभी स्थानांतरित अनुसंधानकों को अविलम्ब कांड का प्रभार सौपने का निर्देश दिया गया।
मद्यनिषेध से संबंधित कांडों का अनुसंधान शीघ्र करने तथा शराब बरामदगी वाले वैसे कांड जिसमें शराब परिवहन करते हुए वाहन जप्त किया गया है, उन कांडों में जप्त वाहन को राजसात एवं जप्त अवैध शराब का विनष्टीकरण करने हेतु निहित प्रक्रियाओं को पूर्ण करते हुए निर्धारित अवधि में प्रस्ताव समर्पित करने हेतु निर्देश दिया गया।
अवैध शराब के निर्माण,परिचालन चुलाई बिक्री तस्करी,भण्डारण एवं कारोबार नहीं होने संबंधित सभी थानाध्यक्ष/ओ0पी0 अध्यक्ष से प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया है अतएव सभी थानाध्यक्ष/ओ0पी0 अध्यक्षों को लगातार शराब की बरामदगी/ तस्करों/ अपराधकर्मियों की गिरफ्तारी हेतु सघन वाहन चेकिंग एवं छापामारी करने का सख्त निर्देश दिया गया है।
शहरी क्षेत्र में वाहन चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने एवं घटना में शामिल गिरोह को चिन्हित कर गिरफ्तारी करने हेतु अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, सदर, पूर्णियाॅं को अपने नेतृत्व में टीम का गठन किया गया है तथा वाहन चोर के संगठित गिरोह का पता लगाने हेतु सभी थानाध्यक्ष/अंचल पुलिस निरीक्षक/अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को नियमित रूप से संध्या गश्ती/रात्रि गश्ती करने का दिया दिया गया।
माननीय न्यायालय से धारा-156(3) द.प्र.स. के तह्त विभिन्न थाना में कांड दर्ज कराने हेतु भेजे गये सभी लंबित परिवाद पत्र पर अविलम्ब प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया गया ।
लंबित कांड का मिलान पुनः अपराध शाखा एवं हिन्दी शाखा के अपराध अनुक्रमणी से कराने का निर्देष सभी अंचल पुलिस निरीक्षक/पु0नि0-सह-थानाध्यक्ष को दिया गया। सभी अंचल पुलिस निरीक्षक /पु0नि0-सह-थानाध्यक्ष को इस आषय का प्रमाण पत्र देने का निर्देष दिया गया कि अब उनके अंचल/थाना में कोई भी कांड दैनिक प्रतिवेदन से नहीं हटा हुआ है।
एस.सी./एस.टी. अत्याचार निवारण के साथ-साथ बलात्कार से संबंधित कांडों का अनुसंधान पूर्ण कर 60 दिनों के अंदर निष्पादन करने तथा पीड़ित को मुआवजा राशि दिलाने हेतु, मुआवजा प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया गया। बैठक में उपस्थित विशेष लोक अभियोजक एस.सी./एस.टी. से अनुरोध किया गया कि एस.सी./एस.टी. के कांडों के अनुसंधान केे क्रम में माननीय न्यायालय से वारंट/इस्तेहार/कुर्की जप्ती निर्गत करने में अनुसंधानक को आवष्यक सहयोग देंगें।
लंबित विभागीय कायवाही/828(सी.) के तहत् विभागीय जाॅच का निष्पादन निघार्रित अवधि में करने का निर्देश सभी संचालन पदाधिकारी को दिया गया है।
सभी थानाध्यक्ष /ओ0पी0 अध्यक्ष को थाना आत्मनिर्भरता राशि खर्च कर उसका विपत्र समर्पित करने का निर्देश दिया गया ताकि राशि समाप्त होने के पश्चात् उन्हें पूर्ण राशि आवंटित किया जा सके।

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