पोटली में चाँद का लोकार्पण : समकालीन संवेदना की सशक्त अभिव्यक्ति।



पटना। दिनांक 31 मार्च को पटना स्थित बापू टावर में कवि असलम हसन की कविता पुस्तक “पोटली में चाँद” का भव्य लोकार्पण सम्पन्न हुआ। यह आयोजन साहित्यिक गरिमा, संवाद और विचार-विमर्श से भरपूर रहा। समन्वय द्वारा आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ कवियों आलोक धन्वा, अरुण कमल और डॉ विनय कुमार के वक्तव्यों से हुई।




आलोक धन्वा ने कहा कि असलम हसन की कविताएँ अपने समय की बेचैनी और मानवीय संवेदना को अत्यंत सहजता से व्यक्त करती हैं।

अरुण कमल ने कहा कि उनकी कविता में भाषा की सादगी और अनुभव की गहराई का अद्भुत संतुलन है।
डॉ विनय कुमार ने इसे समकालीन कविता में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप बताया, जहाँ आम आदमी की पीड़ा और आशा सजीव रूप में सामने आती है।




इसके बाद अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। कृष्ण समिद्ध ने कहा कि असलम हसन की कविता की भाषा पारदर्शी है और उसमें विचारों की अनावश्यक जटिलता नहीं है।

कवि अंचित ने कहा कि उनकी कविताओं में समकालीन कविता की लगभग सभी विशेषताएँ मौजूद हैं।
प्रत्युष चंद्र मिश्रा ने कहा कि ये कविताएँ आम आदमी की भाषा में आम आदमी की बात करती हैं।






अनीश अंकुर ने कहा कि आज की हमारी मनोदशा का सटीक प्रतिबिंब इन कविताओं में दिखाई देता है।
सफदर इमाम कादरी ने कहा कि असलम हसन ऐसे कवि हैं जो अपने समय को नहीं भूलते—उनकी कविता में आज का समय बोलता है।

संजय कुमार कुंदन ने कहा कि एक अच्छा इंसान ही अच्छी कविता लिख सकता है, और असलम हसन की संवेदनशीलता उनकी कविता में स्पष्ट झलकती है। कार्यक्रम का संचालन सुशील कुमार ने किया।

इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख साहित्यकारों एवं अतिथियों में कुमार मुकुल, शहंशाह आलम, सुनील कुमार, सफ़दर इमाम, मनीष महिवाल, क़ादरी,अनिल विभाकर, राजेश कलम तथा चंद्रबिंद सहित अनेक साहित्यप्रेमी शामिल रहे।

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