पटना : सांस्कृतिक संस्था लोक पंच द्वारा संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के सौजन्य से सांस्कृतिक संस्था लोक पंच द्वारा दिनांक 28 से 30 मई 2026 को प्रतिदिन संध्या 7 बजे से तीन दिवसीय दशरथ मांझी नाट्य महोत्सव का आयोजन गांव सेरूकहां, मसरख, जिला सारण में हो रहा है। आज दिनांक 30 मई 2026 को कार्यक्रम के समापन पर पहली प्रस्तुति लोक पंच द्वारा 'नाट्य शिक्षक की बहाली' का मंचन किया गया। यह नाटक रंगकर्मियों के जीवन पर आधारित था।
कथासार
नाटक में रंगकर्मियों के व्यक्तिगत जीवन के संघर्ष को अलग अलग कहानियों से दिखाया गया है, जिसमें एक रंगकर्मी के जीवन के उस पहलू को उकेरा गया है जहाँ वो पढ़ाई के बाद भी अपने परिवार और समाज में उपेक्षित है, उन्हें स्कूल, कॉलेज में एक अदद नाट्य शिक्षक की नौकरी भी नहीं मिल सकती क्योंकि हमारे यहां नाटक के शिक्षकों की बहाली का कोई प्रावधान नहीं है, इस मुखर सवाल पर आकार नाटक दर्शकों के लिए रंगकर्मियों के जीवन संघर्ष से जुड़ा निम्न सवाल भी छोड़ जाता है।
नाटक खत्म होने के बाद स्मृति चिन्ह देकर व ताली बजाकर दर्शक उन्हें सम्मानित करते हैं, यही रंगकर्मी जब अपने घर पहुंचते हैं तो घर में इन से बेहूदा किस्म के प्रश्न पूछे जाते हैं। ये सब क्या कर रहे हो? नौटंकी करते हो ? नाटक करने से क्या होगा, इस तरह के अनगिनत ताने सुनने पड़ते हैं फिर भी रंगकर्मी यह सब सहने के बावजूद रंगकर्म करते रहते हैं। नाटक के माध्यम से रंगकर्मी सरकार से मांग करते हैं की स्कूल और कालेजों में नाट्य शिक्षक की बहाली हो। सरकार रंगकर्मियों को नौकरी दे, उन्हें रोजगार दे तभी वे भी खुलकर समाज का साथ दे सकते हैं।
मंच पर
अभिषेक राज, दीपा दीक्षित, अजीत कुमार, उर्मिला, सहर्ष शुभम, अरबिंद कुमार, रजनीश पांडे, सोनल कुमारी, नीरज, राम प्रवेश, मनोज शुक्ला एवं मनीष महिवाल।
मंच परे
प्रकाश : उपेंद्र कुमार
ध्वनि संचार : हर्ष कुमार
मेकअप : सोनल कुमारी
वस्त्र विन्यास : रितिका
नाल : मनोज शुक्ला
ढोलक : अजीत कुमार
खंजरी : अरविंद कुमार
प्रस्तुति नियंत्रक : राम प्रवेश
लेखक- निर्देशक : मनीष महिवाल।
दूसरी प्रस्तुति रंग रूप वैशाली द्वारा लोक नृत्य का रहा।
पनिया के जहाज से पलटनिया ले ले आईह
रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे, बहे पुरवइया अचरिया उडे हो रामा
ऐसे नृत्यों ने दर्शकों को खूब झुमाया। तीसरी प्रस्तुति दीपा दीक्षित द्वारा लोक गीतों का रहा।
अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो, प्यार यदि जग में रहती ना पवित्र, हे मुरलीधर छलिया मोहन।
महोत्सव के समापन के दौरान स्थानीय संयोजक श्री मुसाफिर राय, श्री मोसाहेब राय, श्री सुनील राय एवं श्री शिवपूजन राय आदि ग्रामीणों ने कलाकारों का आभार व्यक्त किया और यह निवेदन किया कि अगले साल भी हमारे गांव में दशरथ मांझी नाट्य महोत्सव का आयोजन करें।
अन्त में संस्था के सचिव मनीष महिवाल ने संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार, एवं स्थानीय संयोजकों का आभार व्यक्त किया और कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा की।




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