पटना, 05 जुलाई : साथिया फाउंडेशन की ओर से आयोजित महिला सशक्तिकरण समारोह-2026 के तहत तीन माह का सिलाई प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाली 40 महिलाओं को रविवार को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
समारोह में प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने, स्वरोजगार अपनाने तथा अपने कौशल के माध्यम से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में बिहार सरकार के पूर्व मंत्री एवं फुलवारीशरीफ के विधायक श्याम रजक, बिहार पुलिस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार सिंह, न्यूजीलैंड में आयोजित जूनियर कॉमनवेल्थ पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में छह स्वर्ण पदक जीतने वाली कीर्ति राज सिंह, दानापुर नगर परिषद के वार्ड संख्या-9 के वार्ड पार्षद प्रेम किशोर, प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. बिंदा सिंह, डेंटल सर्जन डॉ. शबनम अखौरी, समाजसेवी आनंद त्रिवेदी तथा दंत चिकित्सक डॉ. स्मृति पांडेय सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके बाद फाउंडेशन की ओर से सभी आगंतुक अतिथियों का अंगवस्त्र, स्मृति-चिह्न एवं पुष्पगुच्छ भेंटकर सम्मान किया गया। समारोह में प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए तथा फाउंडेशन के प्रति आभार व्यक्त किया।
फाउंडेशन की अध्यक्ष एवं पटना हाईकोर्ट की अधिवक्ता वंदना सिन्हा ने बताया कि तीन माह के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को सिलाई के साथ-साथ माप लेने की विधि, आधुनिक डिजाइन, परिधान निर्माण, मशीन संचालन तथा उससे जुड़े व्यावसायिक कौशल का प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को केवल हुनर सिखाना नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाकर रोजगार और स्वरोजगार के लिए तैयार करना है।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण का अगला बैच अगस्त 2026 से शुरू होगा, जिसमें अधिक से अधिक महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
वंदना सिन्हा ने कहा कि साथिया फाउंडेशन समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्ग की महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। कौशल विकास के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराने की दिशा में संस्था निरंतर प्रयासरत है।
समारोह में अतिथियों ने प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं को प्रमाणपत्र प्रदान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम समय की आवश्यकता हैं और इनके माध्यम से महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बनेंगी, बल्कि समाज और परिवार के आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगी।


0 टिप्पणियाँ
if you have any doubts, please let me know.