तीन दिवसीय लोक नाट्य महोत्सव अपना महोत्सव – 2025-26 का द्वितीय दिवस




पटना। आज दिनांक 24 फरवरी 2026 को रंगसृष्टि, पटना अपने वार्षिक नाट्य महोत्सव के अंतर्गत ‘‘अपना महोत्सव – 2025-26’’ का आयोजन कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के सहयोग से किया जा रहा है। इस आयोजन का मुख्य अतिथि पद्मश्री शांति राय एवं अविनाश कुमार झा
उप सचिव, बिहार मानवाधिकार आयोग, पटना उपस्थित थे ।





इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य बिहार की लोक संस्कृति को लोगों के जीवन में बनाए व बचाए रखना है। यह नाट्य महोत्सव कई लोक विद्याओं का रंग-संगम है जो तीन दिवसीय लोक नाट्य महोत्सव के रूप में आज जनता के बीच में है।

‘‘अपना महोत्सव – 2025-26’’ के द्वितीय दिवस को दो कार्यक्रमों को प्रेमचंद रंगशाला के वाह्य परिसर में रखा गया । प्रथम ‘‘जट जटिन’’ लोक नृत्य की प्रस्तुति साधना कला केंद्र, मुजफ्फरपुर एवं “सोहर बधैया” लोक नृत्य की प्रस्तुति साधना कला केंद्र, मुजफ्फरपुर के द्वारा किया गया। द्वितीय ‘‘सूफी एवं होली गायन’’ की प्रस्तुति ‘समर प्रताप एवं दल, समस्तीपुर के कलाकारों ने दिया । द्वितीय दिवस मंचीय प्रस्तूति में नाट्य संस्था ‘‘कृष्णा क्लब, भागलपुर की प्रस्तूति ‘‘बिहुला विषहरी’’ का मंचन अजय अटल के निर्देशन में किया गया।




रंगसृष्टि ने अपने नाट्य महोत्व में यह हमेंशा प्रयास किया है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच कर उन्हें रंग गतिविधियों से जोडे। सुदूर गांव में जो संस्थाऐं कार्य कर रहीं है उन्हें मुख्य धारा से जोडा जा सके ताकि हम ग्रामीण रंगमंच को तथा ग्रामीण कलाकार नागरीय रंगमंच को समझ सके और अपना विकास कर सके। साथ ही साथ जनता को उत्कृष्ट अभिनय एवं नाटक से परिचित करा सकें । अच्छे विचारों से जनता में सद्भाव एवं एकता का संचार किया जा सके। 

कथा- सार –

अंग प्रदेश की जनपद चम्पा नगरी जो वर्त्तमान में बिहार राज्य के भागलपुर जिला में स्थित है यह सच्चि घटना पर आधारित है। शैव संस्कृति के मध्य खण्ड में चम्पा नगरी में एक बहुत विख्यात सौदागर हुआ करता था जो चांदो सौदागर के नाम से विख्यात था, उनका व्यवसायिक क्षेत्र भारत से लंका तक था। जो नाव के द्वारा व्यवसाय किया करता था। चांदो सौदागर परम शिव भक्त के साथ माने जाने वाले तमाम देवी देवताओं का पुजा पाठ बड़ा ही लगन भाव से किया करता था। जिस कारण देवी देवताओं की असीम अनुकम्पा उनके साथ रहा करता था। उस समय उनके पुजा का अनुकरण प्रत्येक क्षेत्र मे लोग किया करते थे । 





घटना चक्र की बात है। शिव जी की जटा से उत्पन्न मानस पुत्री मनसा (बिषहरी ) अपना स्थान वहाँ नही देखकर भगवान शिव से अपनी पूजा की बात कहती है। भगवान शिव उन्हें बताते हैं कि अगर चांदो सौदागर उसे मृत्यु लोक में पुजा दे दे तो सारा मृत्यु लोक में उसका पुजा संभव है। मनसा विषहरी चांदो के पास आती है। चांदो सौदागर मनसा देवी को पुजा नही देने की बात कहते हैं। और अपमानित करते है । मनसा क्रोधित होकर देवताओं के दरवार में जाती है। और अपने विजय के लिए देवताओं से आशीष लेकर देवताओं के नर एवं नारी के रूप में साथ देने के लिए मृत्युलोक में जन्म लेने का आग्रह करती है। ऐसा ही होता है । मनसा देवी चांदो को पुनः पूजा देने को कहती है, चांदो सौदागर तैयार नही होता है, परिणाम स्वरूप उनके वंश को समाप्त करने की धमकी देती है और ऐसा ही करती है। एक बार चांदो के छः पुत्रों को धन - जन नाव सहित, नदी में डूबों देती है और बाला को सुहाग रात के दिन सर्पदंश कराती है। किन्तु उनकी पत्नी बिहुला एक पतिवर्त्ता नारी की परिचय देती है और पति के शव के साथ लेकर मंजुषा में बैठ जाती है। मंजुषा नदी में बह जाती है, और सारे कठिनाईयों को पार करती हुई देवताओं के दरवार में नृत्य करने उपस्थित होती है और देवताओं को विवश कर अपने पति को जीवन दान दिलाती है। वापस चांदों के पास आती है और याचना कर मनसा को पुजा दिलाती है और वापस देवलोक चली जाती है। चुकि यहाँ की मुख्य भाषा अंग्रिका है इस हेतु आज भी बिहुला - विषहरी की कहानी भादो मास बहुत ही श्रद्धा से गाया जाता है और पुजा मनाया जाता है । किन्तु इस लोक गाथा की ओर लोगों का अभिरूचि समाप्त होती जा रही है। अगर इसे नही बचाया गया तो एक दिन विलुप्त हो जाएगी। इसी का प्रयास इस प्रस्तुति में किया गया है। इस प्रस्तुति को दर्शकों ने खुब सराहा।





इस नाटक में भाग लेने वाले कलाकार
पात्र परिचय :-

लेखक - सीतांशु अरुण 
शिव - अजय अटल 
चांदो -निवास चंद्र मोदी
बाला - रुचि कुमारी
नौकर - विजय झा
भगत- हैप्पी राजेश 
फूलधारिया - प्रवीण प्रकाश मनसा - संजना कुमारी 
बिहुला - माधवी चौधरी 
मनियार - सोनाक्षी राज
सोनिका - राधिका कुमारी पदमा - खुशबू कुमारी
मैना - बिट्टू कुमारी  
धतोला - साक्षी कुमारी
जयI + नेटुला - साक्षी कुमारी
गायक - देवंत शाह
निर्देशक - अजय अटल 

मिडिया प्रभारी
लोक पंच

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