दशरथ मांझी महोत्सव में शामिल हुए बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, ‘माउंटेन मैन’ को दी श्रद्धांजलि



  • दशरथ मांझी महोत्सव में शामिल हुए बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, ‘माउंटेन मैन’ को दी श्रद्धांजलि
  • गहलौर में आयोजित महोत्सव में बोले डॉ. प्रेम कुमार—दशरथ मांझी जी का जीवन संकल्प, संघर्ष और जनसेवा की प्रेरणादायी गाथा

गयाजी: गयाजी के गहलौर में आयोजित दशरथ मांझी महोत्सव में बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने ‘माउंटेन मैन’ बाबा दशरथ मांझी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन अदम्य साहस, दृढ़ इच्छाशक्ति, संघर्ष और जनसेवा का अनुपम उदाहरण है।






डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि दशरथ मांझी जी ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने संकल्प और अथक परिश्रम से पहाड़ को काटकर रास्ता बनाया। उन्होंने सिद्ध कर दिया कि यदि व्यक्ति का संकल्प मजबूत हो और लक्ष्य जनकल्याण का हो, तो बड़ी से बड़ी बाधा को भी पार किया जा सकता है। दशरथ मांझी जी की कहानी केवल पहाड़ काटने की कहानी नहीं, बल्कि संकल्प, संघर्ष, श्रम और सामाजिक परिवर्तन की प्रेरणादायी गाथा है।

उन्होंने कहा कि दशरथ मांझी जी के पास न आधुनिक मशीनें थीं और न ही पर्याप्त आर्थिक संसाधन, लेकिन उनके पास मजबूत इच्छाशक्ति और समाज के लिए कुछ करने का जुनून था। वर्षों तक लगातार मेहनत कर उन्होंने ऐसा रास्ता बनाया, जिसने गहलौर एवं आसपास के ग्रामीणों के आवागमन को आसान बनाया।




बिहार विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि दशरथ मांझी जी ने यह संदेश दिया कि समाज में परिवर्तन लाने के लिए बड़े पद या बड़े संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि बड़ा हृदय, मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर परिश्रम आवश्यक है। उनका जीवन कर्मयोग की जीवंत मिसाल है।

उन्होंने कहा कि आज जब हम विकास की बात करते हैं तो सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाने की बात करते हैं। दशरथ मांझी जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि विकास का वास्तविक उद्देश्य आम आदमी के जीवन को सरल और सुगम बनाना है।




डॉ. प्रेम कुमार ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आज के युवा दशरथ मांझी जी के जीवन से प्रेरणा लें। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है। लक्ष्य निर्धारित कर अनुशासन, मेहनत और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ने से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। युवाओं को अपनी प्रतिभा और कौशल का उपयोग व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ समाज और बिहार के विकास में भी करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि दशरथ मांझी जी का जीवन गरीब, वंचित और ग्रामीण समाज के लिए विशेष प्रेरणा है। उन्होंने साबित किया कि गरीबी किसी व्यक्ति की क्षमता को निर्धारित नहीं करती। साधन सीमित हो सकते हैं, लेकिन संकल्प और प्रतिभा की कोई सीमा नहीं होती।

डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि बिहार के प्रत्येक गांव तक बेहतर सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, स्वच्छ पेयजल और रोजगार के अवसर पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। विकास का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे, यही हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि दशरथ मांझी जी केवल गया और बिहार के गौरव नहीं, बल्कि पूरे देश के प्रेरणास्रोत हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि इतिहास केवल बड़े पदों पर बैठे लोगों से नहीं बनता, बल्कि साधारण लोग भी अपने असाधारण कर्मों से समाज में स्थायी परिवर्तन ला सकते हैं।

बिहार विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि आज हमें दशरथ मांझी जी के जीवन से तीन महत्वपूर्ण मंत्र ग्रहण करने की आवश्यकता है—संकल्प मजबूत रखें, परिश्रम को अपना साथी बनाएं और अपने जीवन को समाज की सेवा से जोड़ें।

उन्होंने कहा, “दशरथ मांझी जी ने पहाड़ में रास्ता बनाया था। आज हमारी जिम्मेदारी है कि हम उनके संघर्ष और संकल्प से प्रेरणा लेकर विकसित, समृद्ध, आत्मनिर्भर और गौरवशाली बिहार के निर्माण का रास्ता और अधिक मजबूत करें।”

अंत में डॉ. प्रेम कुमार ने बाबा दशरथ मांझी जी को नमन करते हुए कहा कि उनकी प्रेरणा आने वाली पीढ़ियों को निरंतर मिलती रहेगी और उनका जीवन बिहार के युवाओं तथा समाज के प्रत्येक वर्ग को कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।


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