- संवर्द्धन कार्यक्रम के तहत आईसीडीएस व स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण
- कुपोषण के मामलों में कमी लाने के लिये समुदाय स्तर पर बेहतर प्रयास की है जरूरत
अररिया, 04 जनवरी सन आफ सीमांचल ज्ञान मिश्रा।
जिले में समुदाय आधारित प्रबंधन यानि संवर्द्धन कार्यक्रम के तहत विशेष प्रशिक्षण मंगलवार समाहरणालय स्थित डीआरडीए सभागार में संपन्न हुआ। गौरतलब है कि स्वास्थ्य व पोषण संबंधित महत्वपूर्ण सूचकांकों में अपेक्षित सुधार लाने के उद्देश्य से जिले में संवर्द्धन ‘कुपोषण के विरुद्ध व्यापक अभियान’ कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन को लेकर आयोजित प्रशिक्षण का उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ एमपी गुप्ता, डीपीओ आईसीडीएस सीमा रहमान, पिरामल स्वास्थ्य के डीपीएल संजय कुमार झा, पोषण अभियान के जिला समन्वयक कुणाल श्रीवास्तव, राजीव कुमार रंजन ने सामूहिक रूप से किया।
कार्यक्रम में मुख्य प्रशिक्षक के रूप में भाग लेते हुए डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वृंदा किराडो व केशव कुणाल ने सामुदायिक स्तर पर कुपोषित बच्चों के विशेष देखभाल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी। प्रशिक्षकों ने कहा कि कुपोषण से जुड़ी चुनौती से निपट कर शिशु मृत्यु दर के मामलों में काफी कमी लायी जा सकती है। इसके लिये छह माह से शिशुओं को नियमित स्तनपान के साथ ऊपरी आहार का सेवन कराना जरूरी है।
कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन से कम होंगे कुपोषण के मामले :
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ एमपी गुप्ता ने कहा कि अररिया नीति आयोग द्वारा चिह्नित आकांक्षी जिलों की सूची में शामिल है। जिले में अति कुपोषित बच्चों के समुदाय आधारित प्रबंधन कार्यक्रम यानि संवर्द्धन एक महत्वपूर्ण पहल है। जो स्वास्थ्य व पोषण से संबंधित महत्वपूर्ण सूचकांकों में सुधार के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसकी मदद से जिले को कुपोषण मुक्त बनाया जा सकता है। सिविल सर्जन ने कहा कि संवर्द्धन कार्यक्रम के जरिये कुपोषण के मामलों में कमी लाने के उद्देश्य से जिले में पूर्व से संचालित संस्थागत प्रयासों के अतिरिक्त समुदाय विशेष की भूमिका का विस्तार किया गया है। इसका प्रभावी क्रियान्वयन सकारात्मक परिणाम दे सकता है।
कुपोषण के मामलों में कमी लाने का होगा प्रयास :
आईसीडीएस डीपीओ सीमा रहमान ने कहा कि सामुदायिक प्रबंधन के तहत ऊर्जायुक्त भोजन, माइक्रोन्यूटेंट सप्लिमेंट, आवश्यकतानुसार जरूरी उपचार, उचित व्यवहार के लिये जरूरी परामर्श व फॉलोअप सहित आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा गृह आधारित देखभाल के माध्यम से कुपोषित बच्चों को सामान्य बच्चों की श्रेणी में लाने का प्रयास अपेक्षित है। उन्होंने जिले में कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन को लेकर संबंधित विभिन्न विभाग व सहयोगी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय को जरूरी बताया।
जन जागरूकता से मिल सकता है कुपोषण के मामलों से निजात :
डीपीएल संजय कुमार झा ने कहा कि पिरामल स्वास्थ्य व यूनिसेफ के सहयोग से क्रियान्वित इस कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन में डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा सहित अन्य सहयोगी संस्थाओं से जरूरी मदद ली जा रही है। जो आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की निगरानी का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर सकता है। उन्होंने कहा कि कुपोषण के संबंध में व्यापक जागरूकता का होना जरूरी है। जिला पोषण समन्वयक कुणाल कुमार ने कहा कि आमजनों को कुपोषण के कारण, इसकी पहचान व इसके दुष्परिणाम से अवगत कराकर इससे बचाव संबंधी उपायों के प्रति जागरूक करने की जरूरत है। ताकि जिले को कुपोषण मुक्त बनाया जा सके।


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