जब ये सही तरीके से लोकतांत्रिक तरीके से सबके हितों का ख्याल न रखकर कुछ मुट्ठी भर लोगों समूहों का ख्याल रखने लगे हर नियम कार्य उन मुट्ठी भर लोगों के फायदे को देखकर हीं करे तो क्या उन पक्षपाती नियमों का और नियम बनाने वालों का एकजुट होकर मुखरता के साथ विरोध करना कोई गुनाह तो नहीं है।
विरोध के कई तरीके हैं कई प्लेटफॉर्म है आज के दौर में और हम सबको किसी न किसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से विरोध के स्वर को मजबूती से उठने की जरूरत है ।
सबकुछ देखकर समझकर खामियों को बर्दाश्त कर मूकदर्शक बने रहना भी एक गुलामी है ।
आपके हमारे छात्र युवा किसान के जीवन को जो अंधा होकर प्रभावित करने में लगा है लोकतंत्र संविधान आपके हक अधिकार को खत्म करने का अभियान चला रखा है उसको आज बाहर निकलकर विरोध दर्ज कर अपना ताक़त का एहसास जरूर कराए।
डॉक्टर राजीव रंजन

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