ज्ञान मिश्रा कि रिपोर्ट
नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी के 125 वी जन्म जयंती के शुभ अवसर पर अररिया ओम नगर स्थित आवास पर एक कार्यक्रम का आयोजन कर उन्हें श्रद्धा पुष्प अर्पित किया गया ।
भारत की स्वतंत्रता के संबंध में सुभाष चंद्र जी का विचार भारत को पूर्ण स्वतंत्रता के साथ-साथ अति शीघ्र दिलाने का था वहीं इसके विपरीत कांग्रेस कमेटी के अधिकांश सदस्य यहां तक कि गांधी जी का विचार भारत को पहले डोमिनियन का दर्जा प्राप्त कर फिर कई चरणों में स्वतंत्रता के लिए प्रयास करने की थी।
यद्यपि सुभाष चंद्र बोस और गांधीजी के विचार पर स्पष्ट अलग-अलग थी फिर भी नेता जी गांधीजी के प्रति सम्मान और आदर का भाव रखते थे किंतु स्वतंत्रता के प्रति किस मार्ग पर मिलकर को इस बात पर 1939 तक दोनों बिल्कुल अलग-अलग राय रखते थे स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए सुभाष बाबू ने अपनी नीति को स्पष्ट करते हुए कह दिया कि यदि हमें स्वतंत्रता चाहिए तो हमें खून बहाना पड़ेगा जो गांधीजी के अहिंसा के सिद्धांत से मेल नहीं रखता था ।
इसके अलावा गांधीजी औद्योगिकरण के विरुद्ध थे जबकि सुभाष बाबू भारत को एक मजबूत और आत्म निर्माण राष्ट्र बनाने के लिए औद्योगिकरण को ही एक मात्र रास्ता मानते थे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता अंग्रेजों के विरुद्ध समस्त लड़ाई लड़ने के उद्देश्य से जापान के सहयोग से आजाद हिंद फौज का गठन किया । उनके द्वारा दिया गया नारा जय हिंद जय भारत





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