न्यूज़ डेस्क। पिछले 8 दिनों से अपनी मांगों को लेकर जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से मरीजों को भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है । हड़ताल अनिश्चितकालीन होने के कारण कोई भी यह बताने की स्थिति में नहीं है कि आखिर हड़ताल कब खत्म होगी।
सबसे अधिक परेशानी इमरजेंसी वार्ड की है जहां गंभीर रूप से घायल अथवा इमरजेंसी मरीज पहुंच रहे हैं । ऐसे में यहां की जिम्मेदारी चंद सीनियर डॉक्टर और नर्सों के हाथों में है। मरीज़ के परिजनों के अनुसार सीनियर डॉक्टर भी समय पर नहीं पहुंच रहें हैं। पैसों से सक्षम मरीज तो प्राइवेट अस्पताल में चले जा रहे हैं, मगर गरीब मरीजों का हाल बहुत ही बुरा है ना कोई देखने वाला और ना ही कोई इनकी हालत को सुनने वाला है। 100 से भी अधिक ऑपरेशन अब तक टाले जा चुके हैं।
दरअसल पूरा मामला जूनियर डॉक्टरों का स्टाइपेंड से जुड़ा है जूनियर डॉक्टरों का कहना है जनवरी 2020 से ही उनका स्टाइपेंड बढ़ाया जाना था, पर वह अभी तक नहीं बड़ा है । जब तक उनकी मांग मंजूर नहीं होती तब तक वह काम पर नहीं जाने वाले । यही कारण है कि प्रदेश के सारे जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं ।जूनियर डॉक्टरों की इस हड़ताल के कारण अब मरीजों की स्थिति दयनीय हो रही है। प्रशासन की ओर से कोई रास्ता नहीं निकाला गया तो हालत और भी बदतर हो सकते हैं।


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