क्रिसमस दिवस के अवसर पर मनाया गया आरा में तुलसी पूजन दिवस गीता जयंती


आरा से शिवम ओझा का रिपोर्ट...

जहां आज पूरे भारत भर में जगह जगह पर बड़े धूमधाम से क्रिसमस दिवस का शोरगुल था वही अखिल भारतीय श्री योग वेदांत सेवा समिति के द्वारा भारत के कई जगहों पर तुलसी पूजन दिवस मनाने की परंपरा चली आ रही है। 


श्री योग वेदांत सेवा समिति बाल संस्कार विभाग की ओर से स्थानीय नाला मोड़ बांध स्थित सत्संग हॉल में तुलसी पूजन दिवस समिति के द्वारा आयोजन किया गया जिसमें तुलसी के पौधे के फायदे एवं तुलसी पूजन से संबंधित कई जानकारियां समिति के सदस्य योगीराज ने दिया सर्वप्रथम तुलसी जी के पौधे को ऊंचे स्थान पर रख बच्चों द्वारा उन्हें पूजा किया गया थाली सजा कर उन्हे दीप दिखाए गए तत्पश्चात तुलसी की परिक्रमा एवं तुलसी की महिमा का भी बच्चों ने समिति के सदस्य योगी जी के माध्यम से जाना। वही बच्चों को संबोधित करते हुए योगी जी ने कहा कि शास्त्रों में तुलसी में समस्त देवताओं का निवास बतलाया है
तुलस्यां सकला देवा वसन्ति सततं यतः ।
अतस्तामर्चयेल्लोके सर्वान् देवान् समर्चयन् ।।


'तुलसी में सदैव समस्त देवता निवास करते हैं । अतः जो लोग उसकी पूजा करते हैं उनको अनायास ही सभी देवों की पूजा का फल मिल जाता है। 'तुलसी को जल से सींचने से यमदूत तकलीफ नहीं करते, व्यक्ति मरने के बाद भगवान के धाम में जाता है । और दवाइयाँ तो जीवाणुओं का नाश करती हैं लेकिन तुलसी की हवा हानिकारक जीवाणु पैदा ही नहीं होने देती।"वैज्ञानिक प्रयोगों से यह बात स्पष्ट हो गयी है कि इस पौधे का हर भाग (जड़, तना, पत्तियाँ व मंजरी) औषधीय गुणों से परिपूर्ण है।जहाँ तुलसी है उसके २०० मीटर चारों तरफ तुलसी की वायु का प्रभाव फैलता है।

अतः आप भी अपने घर-आँगन में तुलसी के पौधे लगाकर अपने घर को प्रदूषणमुक्त बनाइये और तुलसी पूजन, परिक्रमा व सेवन कर स्वास्थ्य व आहादआनंद का खजाना पाइये।तुलसीजी के प्रति सम्मान, श्रद्धा भारतवासियों के हृदय में रहे हैं परंतु पाश्चात्य भोगवादी सभ्यता से प्रभावित होने से समाज वैदिक संस्कृति से दूर हो गया और अशांति, कलह, आत्महत्या, दुर्व्यसनों व कुरीतियों का शिकार हो गया। समाज को पतन के गर्त में जाने से बचाने के लिए पूज्य बापूजी ने तुलसी की महत्ता समझायी और वैदिक संस्कृति के पुनर्जागरण की आवश्यकता जानकर *२५ दिसम्बर को 'तुलसी पूजन दिवस'* घोषित करके एक सर्वमंगलकारी अभियान की शुरुआत की । 

वही दिव्यांशु मिश्रा अनीता पांडेय ने बताया कि आज की युवा पीढ़ी एवं बच्चों के बीच हमारी अपनी संस्कृति को ना जानना भारत के लिए आने वाले समय में बहुत ही दुर्भाग्य की बात होगी आज हम सभी अपनी सोच को तो बदले परंतु संस्कृति को ना बदले। भारत त्योहारों का देश है भारत में हर रोज एक त्यौहार हर रोज एक पर्व होता है इसकी अपनी संस्कृति अपनी परंपरा है सर्वधर्म सम्मान करते हुए हमारी प्रयास है कि हम अपनी संस्कृति को अपने संस्कार को अपने आदर्शों को ना भूलें तुलसी आशीष को रोना काल में लोगों के लिए संजीवनी बूटी से कम नहीं थी आज भी लोग करुणा करके 1 साल पूर्ण होने के बावजूद तुलसी का सेवन करते हैं तुलसी एक औषधि नहीं बल्कि एक अमृततुल्य संजीवनी बूटी ही है कार्यक्रम में समिति के पदाधिकारी कृष्णा सिंह चन्द्र किशोर मिश्रा आयुष अनीता पांडेय गीता ओझा राजीव सिंह राजेश जी अन्य उपस्थित थे।

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