औनेपौने दाम पर बिक रहा किसानों का धान

 मधुबनी - लदनियां से हरिश्चन्द्र यादव की रिपोर्ट

प्खंड के किसानों ने सूखे की आशंका में अगात किस्म के धान की खेती की थी। सामान्य से अधिक बारिश होने के कारण धान की अच्छी उपज हुई। पैक्सों में धान बेचने की व्यवस्था नहीं रहने के कारण किसान अपने द्वारा उत्पादित धान को स्थानीय व्यापारियों के हाथों औनेपौने दाम पर बेचने को विवश हैं। 

1000 से 1100 प्रति क्विंटल की दर से धान का बेचा जाना किसानों की विवशता माना जा रहा है। किसान राजदेव यादव ने बताया कि मंहगे खाद व बीज आधारित इस प्रकार की खेती से किसानों की रूचि घट रही है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की समृद्धि के लिए रोड मैप तैयार करती है, जिसका लाभ किसानों को नहीं मिलता है। 

पैक्सों के द्वारा धान या गेहूं तब खरीदा जाता है, जब किसान मजदूर होकर लोकल व्यापारियों के हाथों इसे बेच चुके होते है। यही कारण है कि पैक्सों द्वारा मिलने वाला सरकारी मानक मूल्य का लाभ किसानों की जगह व्यापारियों को मिलता है। बीसीओ रूपेश कुमार ने बताते कि धान का मानक मूल्य 1868 है। पैक्सों के द्वारा धान की खरीद 1 नवम्बर से 31 मार्च तक की जाती है।

 

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