पटना : आज दिनांक 01.09.2026 को महिला एवं बाल विकास निगम के द्वारा बढ़ते डिजिटल अपराधों, ऑनलाइन धोखाधड़ी और सोशल मीडिया जनित जोखिमों से निबटने के लिए पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग अंतर्गत संचालित बिहार के विभिन्न 39 विद्यालयों के 76 शिक्षकों के लिए एक दिवसीय विशेष 'साइबर सुरक्षा एवं जागरूकता कार्यशाला' का सफल आयोजन किया गया। बिहार के साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई , बिहार , पटना के साइबर एक्सपर्ट डॉ. राजेश कुमार द्वारा इस तकनीकी सत्र को संबोधित किया गया। इस तकनीकी सत्र का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को साइबर हाइजीन, सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार और क्लासरूम स्तर पर छात्रों को डिजिटल खतरों से बचाने के व्यावहारिक तौर-तरीकों से लैस करना था।
कार्यशाला के दौरान प्रेजेंटेशन के माध्यम से हालिया दिनों में सक्रिय संगठित साइबर अपराधों की कार्यप्रणाली और उनसे बचाव की वैज्ञानिक रणनीतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।
डिजिटल अरेस्ट व पार्सल फ्रॉड से बचाव: पुलिस, सीबीआई या कस्टम्स के नाम पर फर्जी वीडियो कॉल्स और 'डिजिटल अरेस्ट' के मनोवैज्ञानिक दबाव (Social Engineering) से न डरने तथा तुरंत आधिकारिक चैनलों से पुष्टि करने की सलाह दी गई।
प्रशिक्षण में अज्ञात नंबरों, व्हाट्सएप मैसेज या रिवॉर्ड लिंक्स के जरिए भेजी जाने वाली फाइलों को डाउनलोड न करने और बिजली बिल/केवाईसी अपडेट के नाम पर आने वाले कॉल्स से सतर्क रहने का सलाह दिया गया।
ईमेल, सोशल मीडिया व बैंकिंग खातों के लिए मजबूत अल्फ़ान्यूमेरिक पासवर्ड बनाने और अनिवार्य रूप से टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) चालू रखने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। बच्चों में साइबर बुलिंग व स्क्रीन एडिक्शन: शिक्षकों को बच्चों में साइबर बुलिंग, डीपफेक और ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड के शुरुआती लक्षणों को पहचानने और एक मित्रवत संवाद मंच उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित किया गया। हेल्पलाइन 1930 व नेशनल पोर्टल: किसी भी साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करने अथवा www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया समझाई गई।
सधन्यवाद कार्यशाला का समापन किया गया ।

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