ज्ञान भवन में लगातार छठे दिन भी लगा रहा सरस मेला में घूमने आए लोगों का तांता।




● लगातार छठे दिन भी लगा रहा सरस मेला में घूमने आए लोगों का तांता।

● बॉयर–सेलर मीट संवाद से मिल रही जीविका उत्पादों को बाजार से जुड़ने का मौका।

● हुनर एवं ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से आयोजित बिहार सरस मेला ने सदियों पुरानी शिल्प एवं कलाकृतियों को नई पहचान दी है।


पटना : उल्लेखनीय है कि, बिहार सरस मेला ज्ञान भवन, पटना में ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार के तत्वावधान में जीविका द्वारा 29 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।






इस मेले में बिहार समेत 15 राज्यों की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिला उद्यमियों के 135 स्टॉलों पर शिल्प और कलाकृतियां अपने पुराने स्वरूप में ही नहीं बल्कि नए तेवर और आधुनिक डिजाइन के साथ लोगों को लुभा रही हैं। हमारे देश की सबसे पुरानी शिल्प और कलाएं जैसे सिक्की कला, मधुबनी पेंटिंग, तंजौर कला, बावन बुट्टी, मंजूषा, टिकुली, मूंगा आर्ट, क्रोशिया आर्ट, पटचित्र, जूट क्राफ्ट, सिल्क थ्रेड ज्वेलरी, एप्लिक और सोजनी कला को सरस मेला में नई जान मिली है। इन कलाओं के कद्रदान इनसे निर्मित परिधानों, कलाकृतियों, शिल्प और आभूषणों को बतौर स्मृति चिन्ह खरीद कर अपने और परिजनों के लिए घर ले जा रहे हैं।





युवाओं में भी इन पारंपरिक कलाओं के प्रति विशेष आकर्षण देखा जा रहा है। वे इन कलाकृतियों को न केवल सजावट के लिए, बल्कि उपहार देने हेतु उपयुक्त सामग्री के रूप में भी पसंद कर रहे हैं। इन कलाकृतियों के साथ ही देशी और जैविक व्यंजनों की भी बड़ी मांग है। मेले में ओल, सहजन, लहसुन, करौंदा, नींबू आदि का अचार, अदौरी, दनौरी, पापड़, केला चिप्स, तीसी पाउडर, मकई, मडुआ, बाजरा, चावल और ज्वार के आटे की बड़े पैमाने पर बिक्री हो रही है। इसके साथ ही कतरनी और सोनमती चूड़ा और चावल के साथ ही मसालेदार गुड़ की मांग भी काफी बढ़ गई है। लोग कह रहे हैं कि शहर के बाजार में इतने शुद्ध और स्वादिष्ट उत्पाद मिलना मुश्किल है।




शुक्रवार को बिहार सरस मेला के आयोजन के 6 दिन पूरे हो गए। आयोजन के पहले 5 दिनों में ही 1 करोड़ 26 लाख रुपये से अधिक के शिल्प, परिधान, आभूषण, व्यंजन, कृत्रिम फूल, जूते-चप्पल, चादर, दोहर, पेंटिंग्स आदि की बिक्री हुई है। छह दिनों में सवा लाख से अधिक लोगों ने मेले का भ्रमण किया और खरीददारी के साथ ही सुस्वादु एवं पौष्टिक व्यंजनों का लुत्फ उठाया है।





सरस मेला में जीविका दीदियों द्वारा संचालित दीदी की रसोई, शिल्प ग्राम, मधुग्राम, जानकी सिलाई केंद्र समेत कई स्टॉल आकर्षण के खास केंद्र बने हुए हैं। दीदी की रसोई का स्वाद लोगों को खूब भा रहा है, वहीं शिल्प ग्राम में लाइव शिल्प प्रदर्शन देखकर बच्चे और युवा काफी उत्साहित हैं।
शुक्रवार को ज्ञान भवन में आयोजित सरस मेला के सभागार में जीविका और अर्न्स्ट एंड यंग इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में क्रेता-विक्रेता (बॉयर-सेलर मीट) संवाद का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बम्बू लेडी ऑफ इंडिया के उपनाम से मशहूर असम की प्रसिद्ध उद्यमी नीरा मुनी शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहीं। नीरा मुनी शर्मा ने बिहार में बम्बू आर्ट की अपार संभावनाओं को तलाशा और बम्बू आर्ट से जुड़ी जीविका दीदियों से सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने बम्बू आर्ट के तहत बनने वाली कलाकृतियों की गुणवत्ता, कारीगरी, कसीदाकारी और बाजार की मांग को लेकर अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने दीदियों को बांस से आधुनिक और उपयोगी उत्पाद बनाने के टिप्स दिए ताकि उनके उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार मिल सके।

बिहार सरस मेला को ए. ए. ए. क्रिएटिव सल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड ने सजाया-संवारा है, जिसने पूरे मेला परिसर को ग्रामीण परिवेश और आधुनिक सुविधाओं के संगम के रूप में विकसित किया है।

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