पटना : आयुर्वेद को भारत का राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति घोषित हो इसके लिए देश व्यापी कार्यक्रम किए जा रहे है जिसमें सभी जिलों के जिला पदाधिकारी को स्थानीय कार्यकर्ताओं द्वारा ज्ञापन देने का कार्य प्रारम्भ हो चुका है इसी कड़ी में प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति महोदया को ज्ञापन देने का निर्णय संघठन ने लिया है। यह मुहिम अन्य राज्यों में भी प्रारम्भ हो चुका है जिसकी जानकारी इस कार्यक्रम के संयोजक वैद्य Shivaditya Thakur ने दिया।
विदित हो कि विश्व आयुर्वेद परिषद राष्ट्रोत्थान को केंद्र में रखकर स्व-जागरण के प्रति दृढ़ एवं आयुर्वेद के समग्र उत्थान के प्रति कृतसंकल्पित स्वयंसेवी संगठन है, जो विगत 29 वर्षों से आयुर्वेद उत्थान हेतु सतत सक्रिय है।
विश्व आयुर्वेद परिषद् भारत सरकार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है कि वर्तमान सरकार के कालावधि में ही आयुर्वेद उत्थान के अनेक आयाम संपन्न हुए हैं तथा विकास की गति भी अबाध अग्रसर है। कोरोना काल की आपदा को अवसर में बदलकर सरकार एवं आयुर्वेदज्ञों ने पूरे विश्व में बड़ी उपलब्धि प्राप्त की है, यह सर्वविदित है।
स्वतंत्रता प्राप्ति के 80 वर्ष व्यतीत होने के पश्चात् भी भारतीय सनातन स्व में से एक "आयुर्वेद" भारत की मूल राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति के स्थान पर अभी तक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति तक ही सीमित है, जो वेदना का विषय है।
आयुर्वेद केवल चिकित्सा विज्ञान ही नहीं अपितु जीवन का विज्ञान है, आयुर्वेद के मनिषियों ने अपने-अपने ज्ञान, तथ्य एवं अनुसंधान तथा तर्क के आधार पर साक्ष्य-सिद्ध किया है। अतएव आयुर्वेद सनातन सिद्ध चिकित्सा सहित जीवन का विज्ञान है। अपने राष्ट्र में राष्ट्र ध्वज, राष्ट्र-गीत, राष्ट्र-गान, राष्ट्र-भाषा, राष्ट्रीय पशु/पक्षी है, ऐसी स्थिति में विश्व के इस पुरातन एवं सनातन राष्ट्र की अपनी राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति भी अवश्यमेव होनी चाहिए, जो आयुर्वेद ही हैं।
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वर्त्तमान वैद्य गण भी आयुर्वेद के प्राचीन ज्ञान को नवीनता के मानक के साथ ही नित्य अनुसंधान प्रक्रिया के माध्यम से चिकित्सा पद्धति को साक्ष्य आधारित चिकित्सा पद्धति सिद्ध करने के मार्ग में प्राण-प्रण से संक्रिय हैं। फिर भी विश्व के पुराने राष्ट्र में, विश्व की सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धति किंवा जीवन पद्धति, वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति का दंश झेलने को विवश है।
अतएव विश्व आयुर्वेद परिषद भारत के महामहिम राष्ट्रपति जी एवं माननीय प्रधानमंत्री जी से निवेदन पूर्वक मांग करता है कि आयुर्वेद चिकित्सा को सुदृढ़ एवं तकनीकी संसाधनों से युक्त व्यवस्था प्राथमिक चिकित्सा केंद्र से लेकर चिकित्सा के उच्चतम संस्थानों तक में "पुरानी नींव, नया निर्माण के आधार पर विकसित करने की कृपा करते हुए आयुर्वेद को भारत की मूल राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति घोषित करने की कृपा की जाये, इस हेतु यह ज्ञापन समर्पित है, जो भारत के "स्व जागरण" के मार्ग में 'एक मील का पत्थर सिद्ध होगा, उक्त के लिए विश्व आयुर्वेद परिषद् सहित सम्पूर्ण आयुर्वेद जगत भवदीय का कृतज्ञ होगा।
आयुर्वेदिक चिकित्सा को राष्ट्रीय चिकित्सा घोषित करने के लिए भारत के सभी ज़िला से लाखों पोस्ट कार्ड President of India और प्रधानमंत्री को भेजा जाएगा। आयुर्वेदिक चिकित्सा भारत का सब से पुराना इतिहास रहा हैं. इसलिए उस चिकित्सा को राष्ट्रीय दर्जा मिलना चाहिए।
प्रेस conference को वैध शिव मंगल मिश्र ने भी संबोधित किया



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