खालिसपुर के ऐतिहासिक कब्रिस्तान की घेराबंदी कब होगी पूरी?




सैय्यद आसिफ इमाम काकवी

जहानाबाद: काको प्रखंड के खालिसपुर पंचायत स्थित ऐतिहासिक कब्रिस्तान की घेराबंदी का मामला एक बार फिर चर्चा में है। कब्रिस्तान की सुरक्षा और उसकी जमीन को अतिक्रमण से बचाने के लिए स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों ने आवाज़ बुलंद करते हुए बिहार सरकार के मंत्री ज़मा ख़ान से इस मामले में व्यक्तिगत स्तर पर हस्तक्षेप कर घेराबंदी का कार्य शीघ्र शुरू कराने की मांग की है। इसी सिलसिले में खालिसपुर पंचायत के कब्रिस्तान की घेराबंदी से संबंधित एक ज्ञापन भी सौंपा गया है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2023-24 में कब्रिस्तान की घेराबंदी के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी हुई थी और करीब 49 लाख 99 हजार रुपये की राशि का उल्लेख किया गया है। ज्ञापन के अनुसार कार्य शुरू होने के बाद निर्माण सामग्री स्थल पर गिराई गई, लेकिन बाद में काम आगे नहीं बढ़ सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि कब्रिस्तान की जमीन की पैमाइश और सीमांकन का कार्य समय पर पूरा हो तथा उसके बाद घेराबंदी का निर्माण शुरू हो, ताकि ऐतिहासिक कब्रिस्तान की जमीन सुरक्षित रह सके। यह सिर्फ चारदीवारी नहीं, आने वाली नस्लों की अमानत है।






खालिसपुर का यह कब्रिस्तान स्थानीय लोगों के लिए केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं है। यहां उनके बुजुर्गों और पूर्वजों की कब्रें हैं। इस जगह से लोगों की धार्मिक, सामाजिक और भावनात्मक यादें जुड़ी हुई हैं। इसलिए इसकी सुरक्षा का सवाल किसी एक व्यक्ति या परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा चिंता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कब्रिस्तान की जमीन यदि सुरक्षित नहीं रही तो आने वाली पीढ़ियां अपने बुजुर्गों की निशानियों से भी महरूम हो सकती हैं। इसलिए घेराबंदी का कार्य केवल सरकारी निर्माण कार्य नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक विरासत और लोगों की भावनाओं की हिफाज़त का मामला है। 




कब्रिस्तान की घेराबंदी के मुद्दे को लेकर सैयद तबिश वारसी और सैयद फ़हद वारसी, जो बिबीपुर/खालिसपुर क्षेत्र से जुड़े हुए हैं, समेत कई स्थानीय युवाओं ने मिलकर आवाज़ उठाई है। उनका कहना है कि सरकारी स्तर पर राशि और प्रक्रिया से संबंधित पहल होने के बावजूद यदि स्थानीय स्तर पर जमीन की पैमाइश और अन्य आवश्यक प्रक्रिया के कारण काम रुका हुआ है, तो इसे शीघ्र पूरा कराया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों की उम्मीद अब बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ज़मा ख़ान से जुड़ी है। लोगों की मांग है कि मंत्री अपने स्तर से संबंधित अधिकारियों को निर्देश देकर जमीन की पैमाइश, सीमांकन और घेराबंदी की प्रक्रिया को जल्द आगे बढ़ाएं स्थानीय लोगों का कहना है कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन कब्रिस्तान जैसे संवेदनशील और सार्वजनिक महत्व के मुद्दे पर सभी को एक साथ खड़ा होना चाहिए। 







खालिसपुर की जनता चाहती है कि जिस घेराबंदी की उम्मीद लंबे समय से की जा रही है, वह अब कागजों और फाइलों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीन पर दिखाई दे। कब्रिस्तान की चारदीवारी सिर्फ ईंट और सीमेंट की दीवार नहीं होगी यह पूर्वजों की निशानियों, आने वाली नस्लों के हक और एक ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा की दीवार होगी। अब स्थानीय लोगों की निगाहें मंत्री ज़मा ख़ान और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर हैं कि इस मामले में कब ठोस कार्रवाई होती है और खालिसपुर के ऐतिहासिक कब्रिस्तान की घेराबंदी का अधूरा काम कब पूरा होता है।

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