बिहार के विकास में इंजीनियरों की अहम भूमिका, अब शहरीकरण और आपदा प्रबंधन में निभानी होगी बड़ी जिम्मेदारी : राज्यपाल



  • बिहार के विकास में इंजीनियरों की अहम भूमिका, अब शहरीकरण और आपदा प्रबंधन में निभानी होगी बड़ी जिम्मेदारी : राज्यपाल
  • राज्यपाल ने कहा—इंजीनियरिंग सर्विस के एकीकरण का सुझाव बेहतर, राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर विकसित भारत के निर्माण तक अभियंताओं का योगदान महत्वपूर्ण

पटना। भारत रत्न डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की 165वीं जयंती सह 59वें अभियंता दिवस समारोह को संबोधित करते हुए माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) श्री सैयद अता हसनैन ने कहा कि बिहार में पिछले वर्षों में कानून-व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम हुआ है। उन्होंने कहा कि कभी गया जाने में पांच से छह घंटे लगते थे, आज लोग करीब दो घंटे में पहुंच रहे हैं। राज्य में कहीं से भी छह घंटे में पटना पहुंचने का लक्ष्य पूरा किया जा चुका है। इस विकास में अभियंताओं का महत्वपूर्ण योगदान है।




बिहार अभियंत्रण सेवा संघ के तत्वावधान में आयोजित समारोह में माननीय राज्यपाल ने कहा कि आने वाले समय में राज्य में तेज शहरीकरण का लक्ष्य निर्धारित है। इस कार्य में सिविल इंजीनियरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। बिहार की उपजाऊ कृषि भूमि को नदियों से पर्याप्त जल मिलता है, लेकिन यही नदियां कई बार आपदा का कारण भी बनती हैं। जल प्रबंधन और आपदा नियंत्रण में भी अभियंताओं को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।





उन्होंने इंजीनियरिंग सर्विस के एकीकरण के संघ के सुझाव को बेहतर बताते हुए कहा कि अभियंताओं की भूमिका केवल निर्माण तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय सुरक्षा में भी उनका योगदान अहम है। लद्दाख में वर्ष 2020 के दौरान चीन के साथ तनाव के समय इंजीनियरों द्वारा निर्मित सड़कों और पुलों के माध्यम से सेना के बड़े टैंक और सैन्य सामग्री अग्रिम क्षेत्रों तक पहुंची। सीमा पर सड़क निर्माण में बिहार के मेहनतकश मजदूरों का भी महत्वपूर्ण योगदान है।
राज्यपाल ने कहा कि बिहार की बेहतर सड़क और परिवहन व्यवस्था का लाभ पूरे देश को मिल रहा है। कम समय में सेना और सैन्य सामग्री को उत्तर-पूर्व के राज्यों तक पहुंचाना राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है। अभियंताओं के आत्मविश्वास और तकनीकी क्षमता का लाभ राज्य और देश दोनों को मिल रहा है। इसी सामूहिक प्रयास से 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करना है।




उन्होंने बिहार में पर्यटन विकास की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यटन केंद्रों के विकास के लिए प्रभावी प्राधिकरण बनाकर भी अपेक्षित परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सरकार को सुझाव दिया गया है।

इंजीनियरिंग रिफॉर्म कमीशन बनाने की मांग

इंडियन इंजीनियर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अविनाश राउल ने कहा कि अभियंता दिन-रात राष्ट्र निर्माण में जुटे हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग सेवाओं में ‘वन नेशन, वन सर्विस रूल’ लागू करने तथा बिहार में इंजीनियरिंग रिफॉर्म कमीशन गठित करने की मांग की।




बेसा अध्यक्ष सुनील कुमार ने स्वागत भाषण में संघ की गतिविधियों की जानकारी दी। महासचिव राकेश कुमार ने औद्योगिक विकास के लिए इंजीनियरिंग आयोग गठित कर जिलावार औद्योगिक जरूरतों का अध्ययन कराने का सुझाव दिया। उन्होंने नए अभियंताओं से निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बिहार में अब प्रत्येक जिले में एक इंजीनियरिंग कॉलेज है और राज्य में कुल 38 इंजीनियरिंग कॉलेज होना गौरव की बात है। उन्होंने मांग की कि केंद्र की तरह राज्य में लोक सेवा आयोग से नियुक्त सहायक अभियंता का

पदनाम सहायक कार्यपालक अभियंता किया जाय।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान से हुई। राज्यपाल ने अभियंता रत्न सम्मान से उमेश कुमार एवं दयाशंकर मिश्रा को सम्मानित किया। अब तक 128 अभियंताओं को यह सम्मान दिया जा चुका है। समारोह में राज्यपाल ने ‘इंजीनियर्स एक्सप्रेस’ पत्रिका का विमोचन भी किया। इस मौके पर सभी विभागों के सहायक अभियंता, अधीक्षण अभियंता, कार्यपालक अभियंता, अभियंता प्रमुख समेत अन्य अभियंतागण उपस्थित थे।
             
  ई॰ राकेश कुमार 
      महासचिव

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