संत रविदास जी की वाणी सामाजिक समरसता, समानता और मानवता का अमर संदेश : डॉ. प्रेम कुमार




पटना : बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने संत शिरोमणि रविदास जी की जयंती के अवसर पर बिहारवासियों एवं देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं।

उन्होंने कहा कि संत रविदास जी भारतीय संत परंपरा के ऐसे महान प्रकाश-पुंज हैं, जिन्होंने अपनी वाणी और आचरण से समाज को समानता, सामाजिक न्याय, प्रेम, करुणा, श्रम की गरिमा और मानव-मानव की एकता का संदेश दिया। संत रविदास जी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि महानता जन्म या सामाजिक स्थिति से नहीं, बल्कि विचारों की पवित्रता, कर्म की श्रेष्ठता और मानवता की सेवा से प्राप्त होती है। उन्होंने अपनी सरल और सहज संतवाणी के माध्यम से समाज में व्याप्त भेदभाव और ऊँच-नीच की भावना को दूर करने का आह्वान किया। संत रविदास जी की प्रसिद्ध वाणी— “मन चंगा तो कठौती में गंगा।”
—आंतरिक शुचिता और निर्मल मन के महत्व को रेखांकित करती है। उन्होंने संत रविदास जी के प्रसिद्ध पद—

“ऐसा चाहूँ राज मैं, जहाँ मिलै सबन को अन्न।
छोट-बड़ो सब सम बसै, रविदास रहै प्रसन्न॥”

- का उल्लेख करते हुए कहा कि संत रविदास जी का आदर्श समाज वह है, जहाँ किसी के साथ भेदभाव न हो, प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान मिले और समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुख, सम्मान एवं अवसर पहुँचे। उनका यह विचार आज भी समतामूलक और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी की भक्ति में लोकमंगल की भावना थी। उनकी वाणी में आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन की शक्ति भी थी। उन्होंने लोगों को यह समझाया कि ईश्वर की भक्ति का वास्तविक अर्थ मानवता से प्रेम करना और अपने कर्म को ईमानदारी से करना है।

डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि संत रविदास जी का प्रसिद्ध आदर्श—

“बेगमपुरा शहर को नाऊँ,
दूख अन्दोह नहीं तिहि ठाऊँ।”

एक ऐसे समाज की कल्पना प्रस्तुत करता है, जहाँ भय, दुःख, अन्याय और भेदभाव का स्थान न हो। यह कल्पना आज भी सामाजिक न्याय, समान अवसर और गरिमापूर्ण जीवन के लिए हमारा मार्गदर्शन करती है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता के मूल आदर्शों को मजबूत करने में संत परंपरा के विचारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। संत रविदास जी ने सदियों पहले जिस समानता और मानवीय गरिमा की बात कही, वह आज भी हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए प्रेरणास्रोत है।

बिहार विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि संत रविदास जी का संदेश किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित न होकर पूरे मानव समाज के लिए है। आज आवश्यकता है कि हम उनके जीवन और विचारों को केवल जयंती समारोह तक सीमित न रखें, बल्कि अपने व्यवहार और सामाजिक जीवन में भी आत्मसात करें।

डॉ. प्रेम कुमार ने बिहारवासियों से आह्वान किया कि संत रविदास जयंती के अवसर पर हम जातीय भेदभाव, सामाजिक दूरी, छुआछूत और आपसी वैमनस्य को समाप्त करने तथा सामाजिक समरसता को मजबूत करने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि बिहार की गौरवशाली संत परंपरा और सामाजिक चेतना की विरासत को आगे बढ़ाते हुए हमें ऐसा समाज बनाना है, जहाँ हर व्यक्ति को सम्मान मिले, हर प्रतिभा को अवसर मिले और हर नागरिक स्वयं को राष्ट्र की विकास यात्रा का सहभागी महसूस करे।
“संत रविदास जी की वाणी हमें सिखाती है कि मनुष्य की पहचान उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके कर्म, चरित्र और मानवता से होती है। आइए, उनकी संतवाणी को अपने जीवन का मार्गदर्शन बनाकर सामाजिक समरसता, समानता और भाईचारे से युक्त विकसित एवं सशक्त बिहार के निर्माण का संकल्प लें।"

जनसंपर्क पदाधिकारी
बिहार विधान सभा,पटना।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ