पटना : जन सुराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती एवं पार्टी के अन्य नेता ने सोमवार को गर्दनीबाग में छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुए। इस दौरान पार्टी नेताओं ने छात्रों की मांगों और उनकी समस्याओं को सुना और छात्र आंदोलन को अपना समर्थन दिया। मनोज भारती ने कहा कि आज यहां TRE-4 के जो भी अभ्यर्थी धरने पर बैठे हुए हैं, उनसे मुलाकात हुई है। उनका मुख्य मुद्दा केवल इतना है कि बिहार सरकार को विद्यार्थियों की पढ़ाई से कोई मतलब नहीं है। सरकार द्वारा जिस तरह के नियम बनाए जा रहे हैं और जिस तरह से विद्यार्थियों को नियमों का उल्लंघन करने को मजबूर किया जा रहा है, ऐसा लगता है कि बिहार सरकार को शिक्षा से कोई लेना-देना नहीं है। चाहे वह रिक्रूटमेंट हो या रिक्रूटमेंट की प्रक्रिया हो या फिर सिलेबस बनाना हो, हर चीज में मनमाने ढंग से काम किया जा रहा है।
मनोज भारती ने कहा कि TRE-4 में सरकार ने दोबारा परीक्षा करवाई और उसे दो स्टेज का बना दिया। अब प्रीलिम्स और मेंस परीक्षा, दोनों का प्रावधान बनाया है। लेकिन सरकार लॉजिक इस्तेमाल करे तो सरकार की घोषणा यह होनी चाहिए थी कि 2027 में जो परीक्षा होगी, उसमें दो स्टेज में परीक्षा ली जाएगी। 2026 की परीक्षा को उसी ढर्रे पर लेना चाहिए था, जिस ढर्रे पर अभी तक परीक्षा होती आई है। UPSC हर साल अपने एग्जाम कंडक्ट कराती है। अगर UPSC यह काम करवा सकती है तो BPSC क्यों नहीं? कोई परीक्षा 5 साल में एक बार होती है तो कोई 18 साल में भी अभी तक नहीं हुई है। ऐसा करने के बाद भी आप आयु सीमा निर्धारित करके रखेंगे तो जो लोग 18 साल से इसकी तैयारी और उम्मीद में बैठे थे, उनकी उम्र निकल गई है। अब उनको आप परीक्षा में कैसे बैठने देंगे?
मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री भ्रष्टाचार से मुक्त होकर काम करें तो यह सिस्टम सही हो जाएगा: मनोज भारती
उन्होंने कहा कि इस तरह से मुझे लगता है कि जो भी गड़बड़ी हुई है, उसे ध्यान में रखते हुए BPSC और बिहार सरकार के शिक्षा विभाग को तार्किक रूप से विचार करते हुए 70वीं BPSC की परीक्षा पूरी तरह से निरस्त करने की जो मांग है, उसे मानना चाहिए।
ठीक उसी तरह SSC द्वारा आयोजित इंटरमीडिएट, CGL और ASO, BSO सहित जो भी लंबित परीक्षाएं हैं, उनको जल्द से जल्द आयोजित किया जाए। यह अभ्यर्थियों की दूसरी मांग है, जो जायज है। ठीक इसी तरह TRE की भर्ती प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए ‘वन कैंडिडेट, वन रिजल्ट’ की जो मांग रखी गई है, वह भी जायज है। क्योंकि एक कैंडिडेट का नाम कई जगहों पर आ जाता है और उससे जो खाली सीटें हो जाती हैं, उन्हें भरने के लिए कोई सप्लीमेंट्री नहीं निकाली जाती है। अगर सप्लीमेंट्री निकाली भी जाती है तो उसका कोई इम्प्लीमेंटेशन नहीं हो रहा है। अगर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री भ्रष्टाचार से मुक्त होकर काम करें तो यह सिस्टम सही हो जाएगा। मौके पर ओबैदुर रहमान, ललन जी, रेमांशु सर, विवेक कुमार, अनुप मैथिल, राकेश पटेल और खुशबू पाठक मौजूद रहीं।



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