कोलकाता, 22 जुलाई, 2026:
प्रतिदिन लाखों यात्री ट्रेन में सफर करते हैं या रेलवे समपार फाटकों को पार करते हैं और अपने विश्वास, अपने सपनों तथा अपने जीवन को पूर्व रेलवे के भरोसे छोड़ते हैं। इस महान जिम्मेदारी को समझते हुए, पूर्व रेलवे प्रत्येक यात्रा को सुरक्षित और निर्बाध बनाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक श्री मिलिंद देऊस्कर के दूरदर्शी एवं गतिशील नेतृत्व में यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रत्येक यात्री, राहगीर और आम नागरिक की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए श्री देऊस्कर ने सियालदह, हावड़ा, आसनसोल और मालदा—पूर्व रेलवे के चारों प्रमुख मंडलों में व्यापक आधारभूत संरचना आधुनिकीकरण अभियान का नेतृत्व किया है। सुनियोजित रणनीति और सतत क्रियान्वयन के माध्यम से पूर्व रेलवे अपने पूरे नेटवर्क में रेलवे समपार फाटकों का तेजी से आधुनिकीकरण कर रहा है, ताकि सभी के लिए सुरक्षित, सुचारु और दुर्घटनामुक्त आवागमन सुनिश्चित किया जा सके।
इस विशाल अभियान को समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि रेलवे फाटक कैसे कार्य करते हैं और सुरक्षा तकनीक यात्रियों के लिए इतनी महत्वपूर्ण क्यों है। पारंपरिक गैर-अंतःसंलग्न समपार फाटक पर सुरक्षा पूरी तरह स्टेशन कर्मचारियों और फाटक कर्मियों के बीच टेलीफोन के माध्यम से होने वाले मैनुअल संचार पर निर्भर करती है। यद्यपि फाटक कर्मी पूरी निष्ठा से अपना दायित्व निभाते हैं, फिर भी केवल मानवीय संचार पर निर्भर रहने से त्रुटि या विलंब की संभावना बनी रहती है। इसी जोखिम को समाप्त करने के लिए पूर्व रेलवे तेजी से इन फाटकों को आधुनिक अंतःसंलग्न समपार फाटकों में परिवर्तित कर रहा है।
इंटरलॉक्ड फाटक में फाटक की बैरियर प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक रूप से रेलवे की सिग्नलिंग प्रणाली से जुड़ी होती है। जब तक फाटक पूरी तरह बंद, लॉक और सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक ट्रेन को हरी झंडी (ग्रीन सिग्नल) नहीं मिल सकती। यदि फाटक एक इंच भी खुला रह जाए तो रेलवे सिग्नल स्वतः लाल बना रहता है, जिससे ट्रेन सुरक्षित रूप से रुक जाती है और मानवीय भूल की संभावना पूरी तरह समाप्त हो जाती है।
यात्रा को और अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक बनाने के लिए पूर्व रेलवे रोड अंडर ब्रिज तथा सीमित ऊँचाई वाले सबवे का भी निर्माण कर रहा है। इन अंडरपासों के माध्यम से सड़क वाहन, एम्बुलेंस और पैदल यात्री रेलवे लाइन के नीचे से सुरक्षित रूप से गुजर सकते हैं, जिससे उन्हें बंद फाटक पर प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती और न ही सक्रिय रेलवे ट्रैक पार करना पड़ता है।
इस जीवनरक्षक परिवर्तन की व्यापकता और गति का स्पष्ट प्रमाण मंडलवार उपलब्ध आंकड़ों से मिलता है। सियालदह मंडल में कुल 379 मानवयुक्त समपार फाटकों में से 368 फाटक इंटरलॉक्ड हो चुके हैं, जबकि केवल 11 गैर-अंतःसंलग्न फाटक शेष हैं। हावड़ा मंडल में कुल 301 मानवयुक्त समपार फाटकों में से 267 इंटरलॉक्ड हैं और 34 गैर-अंतःसंलग्न हैं। आसनसोल मंडल में कुल 127 मानवयुक्त समपार फाटकों में से 93 इंटरलॉक्ड तथा 34 गैर-अंतःसंलग्न हैं। मालदा मंडल में कुल 99 मानवयुक्त समपार फाटकों में से 79 इंटरलॉक्ड हैं, जबकि 20 गैर-अंतःसंलग्न फाटक शेष हैं।
चारों मंडलों को मिलाकर पूर्व रेलवे में कुल 906 मानवयुक्त समपार फाटक हैं, जिनमें से 807 फाटक पूर्णतः इंटरलॉक्ड किए जा चुके हैं। पूरे जोन में अब केवल 99 गैर-अंतःसंलग्न समपार फाटक शेष हैं।
फाटकों के इंटरलॉकिंग कार्य के साथ-साथ, समपार फाटकों को पूरी तरह समाप्त करने के उद्देश्य से अंडरपास निर्माण में भी पूर्व रेलवे ने उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। मंडलवार उपलब्धियों के अनुसार सियालदह मंडल में 119, हावड़ा मंडल में 244, आसनसोल मंडल में 104 तथा मालदा मंडल में 112 रेलवे रोड अंडर ब्रिज /सीमित ऊँचाई वाले सबवे का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इस प्रकार पूरे पूर्व रेलवे में अब तक कुल 579 रोड अंडर ब्रिज एवं सीमित ऊँचाई वाले सबवे निर्मित किए जा चुके हैं।
807 इंटरलॉक्ड समपार फाटक और 579 संचालित अंडरपासों के साथ पूर्व रेलवे का अधिकांश नेटवर्क अब आधुनिक सुरक्षा तकनीक से सुरक्षित हो चुका है। शेष 99 गैर-अंतःसंलग्न फाटकों पर भी युद्धस्तर पर कार्य तेजी से जारी है।
यात्री सुरक्षा के प्रति पूर्व रेलवे की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराते हुए पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री शिबराम माझि ने कहा -"यात्री सुरक्षा हमारी सर्वोच्च और अटल प्राथमिकता है।"



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