पटना। पूर्व क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र, कोलकाता द्वारा उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश; संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार तथा कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार के सहयोग से 30 जनवरी से 1 फरवरी, 2026 तक शाम 04:30 बजे से तीन दिवसीय राष्ट्रीय नृत्य, शिल्प एवं व्यंजन महोत्सव “इंद्रधनुष” का आयोजन प्रेमचंद रंगशाला, राजेंद्र नगर, पटना, बिहार में किया जा रहा है।
आज, दिनांक 30 जनवरी, 2026 को शाम 05:00 बजे बिहार के महामहिम, माननीय राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान के करकमलों से इस गौरवपूर्ण कार्यक्रम का उद्घाटन हुआ। उद्घाटन सत्र में सचिव श्री प्रणव कुमार एवं निदेशक श्रीमती रूबी, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार, श्री तापस सामंतराय, उप निदेशक, पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, कोलकाता तथा श्री राजर्षि चंद्रा, सहायक अभियंता, पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र भी सम्मिलित थे।
पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (ईo जेडo सीo सीo) कोलकाता, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के तहत भारत सरकार द्वारा स्थापित सात ऐसे क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों में से एक है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय एकीकरण कार्यक्रम के हिस्से के रूप में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सांस्कृतिक रूप से एकीकृत करना है। इस केंद्र के अंतर्गत असम, बिहार, झारखंड, मणिपुर, ओडिशा, सिक्किम, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप समूह आते हैं।
क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (जेडo सीo सीo ) सरकार और जनता की ओर से हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और सुरक्षित रखने और इसे लोगों के जीवन के करीब लाने के प्रयास का प्रतिनिधित्व करते हैं। सात क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र, भारत के लोक और पारंपरिक कलाकारों और शिल्पकारों को स्थानीय रचनात्मक समर्थन प्रदान करते हैं। केंद्रों के मुख्य उद्देश्यों में संगीत, नृत्य, रंगमंच, दृश्य कलाओं, साहित्यिक गतिविधियों और शिल्प परंपराओं के व्यापक अनुशासनों को शामिल करते हुए विभिन्न कला रूपों का संरक्षण, नवाचार, और प्रचार- प्रसार शामिल हैं, जिसमें लुप्तप्राय कलारूपों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। 1985 में अपनी स्थापना के बाद से पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र देश के पूर्वी भाग में कई जातीय सांस्कृतिक केंद्रों तथा उत्कृष्ट समूहों के बीच एक सांस्कृतिक माध्यम के रूप में कार्य कर रहा है तथा लोक, आदिवासी और शास्त्रीय संगीत और नृत्य, प्रलेखन और प्रकाशन, कार्यशालाओं तथा कला एवं शिल्प प्रदर्शनियों के माध्यम से अपने क्षेत्र के साथ- साथ देश के अन्य हिस्सों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को लोगों के बीच फैलाने में सक्षम रहा है।
राष्ट्रीय नृत्य, शिल्प एवं व्यंजन महोत्सव “इंद्रधनुष” के सात पहलुओं:- लोक नृत्य, लोक गीत, लोक नाटक, लोक चित्रकला, पारंपरिक वेशभूषा, लोकशिल्प और व्यंजनों को दर्शाता है। पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के इस प्रतिष्ठित महोत्सव में भारत के लगभग 500 लोक एवं आदिवासी कलाकार- शिल्पकार भाग लेंगे तथा ओडिशा के घुबुकुडू नृत्य, पश्चिम बंगाल के बोरोमेच नृत्य, असम के बिहू नृत्य, राजस्थान के कालबेलिया नृत्य, उत्तर प्रदेश के होली और मयूर नृत्य, उत्तराखंड के छपेली नृत्य, बिहार के झिझिया और जट- जटिन आदि नृत्यों की ऊर्जापूर्ण सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ बिहार, बंगाल तथा उत्तर प्रदेश के पारंपरिक शिल्प और व्यंजन की जीवंत परंपराओं का समावेश होगा।
प्रारंभ में माननीय राज्यपाल महोदय एवं सभी गणमान्य अतिथियों का सभी प्रतिभागियों एवं नर्तकों द्वारा भव्य स्वागत किया गया। उद्घाटन के बाद सातों राज्यों के लोक नर्तकों द्वारा कोरियोग्राफिक प्रस्तुति: इंद्रधनुष का प्रदर्शन किया गया। इसके बाद साधना कुमारी, पटना एवं समूह द्वारा लोकनृत्य; संगीतम, पटना द्वारा लोकगीत; अमान खान एवं समूह द्वारा कव्वाली तथा प्रांगण, पटना द्वारा बिहार के लोकनृत्य की प्रस्तुति हुई। रंगशाला के बाह्य परिसर में पारंपरिक शिल्प मेला, कलाकार चित्रकला कार्यशाला एवं खान- पान मेला का आयोजन किया गया, जिसमे विभिन्न राज्यों के व्यंजन, चित्रकला एवं शिल्पकला के स्टाल लगाये गए।
महोत्सव में हरि कृष्ण सिंह (मुन्ना), सोनाली सरकार, अनुष्का घोष, नंदनी, वर्षा कुमारी, दीप्ति कुमारी, सोनू सिंह, संजना भारती (संगीतम, पटना), राजीब ठाकुर, राजासिंह ठाकुर, अनिल ठाकुर, कृष्णा नार्जिनरी, सुजीत ठाकुर, राजेन नार्जिनरी, लतिका नार्जिनरी, वीणापाणी ईश्वरारी, अर्थोना बसुमता, पुनुष्का ठाकुर, सादिया ठाकुर, देवी मोंगोर, माहिनी नार्जिनरी, सुपर्णा बोरो, रंजिला गबुर (पश्चिम बंगाल), बबीता सैकिया, देवव्रत सैकिया, देवप्रोतिम बोरा, भास्कर बोरा, रितुराज बोरा, पंकज कलिता. पल्लब बोरा, जिंटू सैकिया, गीताश्री गोगोई, नयना सैकिया, स्नेहा बोरा, टीना गोगोई, अनामिका महंता, प्रकृति दास (असम), पूनम जी निवास शामला कालबेलिया, चंदा कालबेलिया, जमना कालबेलिया, कंसुबी कालबेलिया, कांता कालबेलिया, बिंदिया कालबेलिया, गोरधननाथ कालबेलिया, करननाथ कालबेलिया, राजूनाथ कालबेलिया, बाबुनाथ कालबेलिया, जीवननाथ कालबेलिया, भीमनाथ कालबेलिया (राजस्थान) आदि कलाकारों ने भाग लिया। इस अवसर पर विभिन्न स्थानीय सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, कलाप्रेमी दर्शक एवं मीडिया के बंधुजन उपस्थित थे।
कल दिनांक 31 जनवरी, 2026 को बिहार के लोकगीत एवं लोकनृत्य तथा 7 राज्यों के लोक कलाकारों द्वारा कोरियोग्राफिक प्रस्तुति: इंद्रधनुष के अलावा सभी राज्यों का पारंपरिक वेशभूषा प्रदर्शन भी किया जायेगा।
मनीष महिवाल
मीडिया प्रभारी
9835294888





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