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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जन्म जयंती पर काव्यांजलि का आयोजन




माँ भारती को इतना दुलारा नहीं होगा, अटल जी जैसा दुबारा नहीं होगा......

पटना : भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री एवं प्रख्यात कवि अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जन्म जयंती के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी कला संस्कृति प्रकोष्ठ एवं संस्कृति लोक उपकार संस्थान कुल्हड़िया द्वारा संयुक्त रूप से काव्यांजलि कार्यक्रम का आयोजन प्रेमचंद रंगशाला, पटना में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन उद्घाटनकर्ता बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार, मुख्य अतिथि कुम्हरार विधायक संजय गुप्ता,भाजपा कला संस्कृति प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक वरुण कुमार सिंह एवं संस्कृति लोक उपकार संस्थान कुल्हड़िया के सचिव डॉ. शिवजी सिंह ने की। 




इस अवसर पर अटल बिहारी वाजपेयी की प्रसिद्ध कविताओं का काव्यपाठ किया गया तथा उनके राष्ट्रवादी विचारों, राजनीतिक दूरदर्शिता और साहित्यिक योगदान को स्मरण किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि अटल जी का व्यक्तित्व राजनीति और साहित्य का अद्भुत संगम था जिसने देश को नई दिशा दी। मुख्य अतिथि कुम्हरार विधायक संजय गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविताओं में राष्ट्रप्रेम, मानवीय संवेदना और लोकतांत्रिक मूल्यों की स्पष्ट झलक मिलती है, जो आज भी समाज और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं ।





अध्यक्षीय संबोधन में प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक वरुण कुमार सिंह ने कहा कि भाजपा कला संस्कृति प्रकोष्ठ का उद्देश्य ऐसे आयोजनों के माध्यम से महान विभूतियों के विचारों और सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाना है। कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवि शम्भू शिखर, अंकिता सिंह, नीलोत्पल मृणाल, चंदन द्विवेदी, कुमार रजत, उत्कर्ष आनंद, सान्या राय, रवि कुमार गुप्ता एवं बाला बिहारी ने अपनी कविताओं से दर्शक दीर्घा में बैठे सभी लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि शम्भू शिखर ने अपनी प्रसिद्ध कविता हम धरती पुत्र बिहारी है और माँ भारती को इतना दुलारा नहीं होगा, अटल जी जैसा दुबारा नहीं होगा जैसी कविताओं का पाठ किया। वहीं कवि नीलोत्पल मृणाल ने हम मिट्टी के लोग हैं बाबू,मिट्टी ही सदा उड़ाएंगे।




मिट्टी में सने,मिट्टी के बने फिर मिट्टी के हो जाएंगे से दर्शकों को झुमाया। जबकि सान्या राय ने ऐसे भी दिन आते हैं क्या? सूरज भी जल जाते हैं क्या? जाते हो तो प्राण बताओ, प्राण बताकर जाते हैं क्या? का पाठ किया। चर्चित कवि चंदन द्विवेदी ने आज जरा सा कम लिखना है, मुझको मेरा गम लिखना है का पाठ किया वहीं रवि कुमार गुप्ता ने तीनों लोक 14 भुवन में का पाठ कर लोगों को मोहित किया। कुमार रजत ने अपनी कविता उफ, ये जाड़े की दोपहर क्या कहें से लोगों को झुमाया। वहीं उत्कर्ष आनंद ने अटल मतलब राष्ट्रधन है, अटल मतलब पोखरण है का पाठ किया। वहीं अंकित सिंह ने नदी खारे समंदर के लिए जज्बात से तर है का पाठ कर कार्यक्रम में समां बांध दिया। कार्यक्रम में भाजपा बिहार के पदाधिकारी शम्भू प्रसाद, अनूप कुमार, सतीश के दास, उत्तम कुमार, हिमांशु हरि, गौतम दत्ता, रोशन यदुवंशी, अमर सूर्या सहित बड़ी संख्या में कला-संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे। अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों एवं सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

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