पटना। एक ऐसा समाज, जहाँ हर बच्चा अपनी क्षमता के साथ स्वीकार किया जाए — यही संदेश आज कंकड़बाग स्थित उत्कर्ष सेवा संस्थान में देखने को मिला, जब शाइनिंग मुस्कान फाउंडेशन ने धनु बिहार एवं उत्कर्ष सेवा संस्थान के सहयोग से विशेष रूप से सक्षम बच्चों के लिए एक रचनात्मक कार्यशाला का आयोजन किया।
किसी ने तितलियों में रंग भरे, तो किसी ने दीयों को मोतियों से सजाया—हर बच्चा अपनी तरह से रचनात्मकता को जीता नज़र आया। कहीं रंग बिखरे थे, कहीं मोती चमक रहे थे और हर ओर आत्मविश्वास से भरी मुस्कानें थीं। विभिन्न आयु वर्ग के बच्चों ने अपनी पसंद के रंग, डिज़ाइन और आकृतियाँ स्वयं चुनीं — मानो अपने निर्णय खुद लेने की एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण शुरुआत कर रहे हों।
कार्यक्रम में डॉ. मनीषा कृष्णा, संचालिका ने बच्चों को केवल मार्गदर्शन दिया, नेतृत्व उन्हें करने दिया। यही इस कार्यशाला की सबसे बड़ी उपलब्धि रही | बच्चों को यह महसूस कराना कि वे केवल सहभागी नहीं, बल्कि इस आयोजन के केंद्र में हैं।
इस कार्यशाला का हिस्सा बनना और इन बच्चों के साथ समय बिताना मेरे लिए एक अत्यंत भावनात्मक और सीख देने वाला अनुभव रहा। उनकी प्रसन्नता, एकाग्रता और रचनात्मकता ने मुझे भीतर तक छू लिया। रंगों, मोतियों और मुस्कानों के बीच मैंने यह महसूस किया कि सच्ची प्रतिभा किसी शारीरिक या मानसिक सीमा की मोहताज नहीं होती। यह अनुभव मेरे जीवन की उन यादों में शामिल हो गया है, जिन्हें मैं हमेशा अपने साथ लेकर चलूँगी। इस दिन ने मुझे यह सिखाया कि किसी बच्चे की पहचान उसकी चुनौतियों से नहीं, बल्कि उसकी संभावनाओं, आत्मविश्वास और सपनों से होती है।
यह कार्यशाला समाज के लिए एक मौन लेकिन सशक्त संदेश छोड़ गई — कि समावेशन कोई औपचारिक शब्द नहीं, बल्कि व्यवहार है। जब अवसर, सम्मान और विश्वास मिलता है, तो हर बच्चा चमकता है… अपने ही रंग में।


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