शाहजादपुर के नूरुद्दीनपुर में नाव डूबने से तीन किशोरी की मौत नाव पर कुल सात व्यक्ति थे






प्रतिनिधि नारायणपुर - प्रखंड के शहजादपुर पंचायत के नूरुद्दीनपुर गंगा घाट पर सोमवार की दोपहर ऑधी आने से छोटी नाव पलटने से तीन किशोरी की मौत हो गई.ग्रामीणों के प्रयास से गंगा नदी से तीनों के शव को घंटो मशक्कत बाद बाहर निकाला.आपदा पदाधिकारी सह नारायणपुर सीओ अजय कुमार सरकार ने बताया की नाव हादसे में खगड़िया निवासी सुबोध मंडल की 13 वर्षीय पुत्री रीता कुमारी और नूरुद्दीनपुर निवासी रंजीत मंडल की दो पुत्री 11 वर्षीय सोनाली कुमारी और 14 वर्षीय कोमल कुमारी शामिल है.ग्रामीणों ने बताया की नाव में कुल सात व्यक्ति सवार थे.गंगा दियारा से घास लेकर गंगा पार करते समय ऑधी में नाव का संतुलन बिगड़ने के बाद नाव गंगा नदी में पलट गया.डूब रही चौथी किशोरी नूरुद्दीनपुर के संजीत मंडल की पुत्री सपना को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका है रीता अपने मामा रंजीत के घर आई थी.मौके पर मुखिया रूपेश मंडल ने परिजनों को ढांढस बंधाया इधर एक ही घर से तीन-तीन किशोरी की डुबने से घर के परिजन चित्कार कर रहे थे ग्रामीण गमगीन थे.वहीं बिहपुर पुलिस ने शव को कब्जे मे लेकर पोस्टमार्टम के लिए अनुमंडलीय अस्पताल नवगछिया भेजा वहीं मुखिया रूपेश मंडल ने नारायणपुर सीओ अजय कुमार सरकार को नाव हादसे की जानकारी देते हुए पंचायत के विभिन्न गंगा घाट पर गोताखोर एवं कुशल नाविक की प्रतिनियुक्त एवं पीड़ीत परिवार को मुआवजा देने की मॉग की वहीं अंचलाधिकारी अजय कुमार सरकार ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के तहत पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आश्रितों द्वारा आवेदन पर मृतक के परिजनों को आपदा के तहत चार-चार लाख रुपये की सरकारी मुआवजा मिलेगा.

बड़ी लड़की की डोली उठाने की तैयारी कर रहा था रंजीत, अब दो छोटी बेटियों और एक भांजी की सजा रहा है अर्थी

- 12 जुलाई को होने वाली थी रंजीत मंडल की बड़ी बेटी रुचि की शादी


उधर नवगछिया में भी रंजीत मंडल अपनी दो बेटियों और एक भांजी की लाश देख कर स्तब्ध है. वह शांत है, उसकी आंखों से आंसू सूख गए हैं. रुंधे गले से वह कहता है. घर मे जश्न का माहौल था. 12 जुलाई को उसकी बड़ी बेटी रुचि की शादी थी. भागलपुर के ही किशनपुर में शादी तय हुआ था. लेकिन भगवान को उसके घर की खुशी मंजूर न थी. रंजीत ने कहा कि मेहनत मजदूरी से उनका परिवार चलता है. उनके टोले के लोग प्रतिदिन नाव से गंगा पार जा कर मवेशियों के लिये घास लाते हैं. लेकिन क्या पता था नाव डूब जाएगी. रंजीत कभी अपनी भांजी की लाश को देखता है तो कभी अपनी दोनों बेटियों की लाश को देखता है. फिर रुंधे गले से बोल उठता है" गे बेटी एक बेर त पप्पा कही दे. इधर नौका हादसा के समय गंगा घाट पर चीख पुकार से स्थिति हृदय विदारक थी. सात लोगों में एक एक कर सबों को बाहर निकाला गया था. जो जीवित थे उनके लिये इलाज की किसी प्रकार की व्यवस्था न थी. ग्रामीण स्तर से घाट पर ही तीन लोगों को अस्पताल ले जाया गया. जानकारी मिली है कि तीन लोग देर रात तक इलाजरत थे. हालांकि तीनों की जान खतरे से बाहर होने की बात कही जा रही है. 

जिंदगी की तलाश में रोज लोग मौत से हो रहे रू ब रू

नवगछिया के लिये नौका हादसा आम है. लोग नदी पार नहीं जाएंगे तो आजीविका पर संकट उतपन्न हो जाएगा. जीवन बचाने के लिये नदिया पार जाना ही होगा. ऐसी स्थिति में लोग छोटे नावों के सहारे रोजाना लोग खुद को खतरे में डाल कर नदी पार कर रहे हैं.


देर रात किया गया तीनों शवों का पोस्टमार्टम

नवगछिया अनुमंडल अस्पताल में देर रात तीनों शवों का पोस्टमार्टम जिलाधिकारी के आदेश से किया गया है. नवगछिया अनुमंडल अस्पताल पहुंचे मुखिया रूपेश मंडल ने बिहपुर के थनाध्यक्ष और अंचलाधिकारी को मामले की सूचना दी. दोनों देर रात अस्पताल पहुंचे थे. रात हो जाने की वजह से जब अनुमंडल अस्पताल के चिकित्सकों ने पोस्टमार्टम करने से मना कर दिया तो स्थानीय ग्रामीणों और पंचायत के मुखिया रूपेश कुमार ने मामले की सूचना जिलाधिकारी को दी. जिलाधिकारी के निर्देश पर देर रात है तीनों शवों का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया था.


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