अररिया ज्ञान मिश्रा
फारबिसगंज प्रखंड क्षेत्र के परवाहा निवासी कृष्ण कुमार यादव ने अपने पढाई के दौरान साथी युवाओं को नशा से प्रभावित होते देखकर समाज और देश के युवाओं के लिए कुछ करने की तमन्ना से श्रीकृष्ण नशा मुक्ति संगठन बनाकर अपने बुलंद हौसलों से महज कुछ ही दिनों में सैकड़ों सदस्यों के जोड़कर लोगों को नशामुक्ति के लिए जागरूक कर रहे हैं। संगठन के संस्थापक कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि वह इलाहाबाद केन्द्रिय विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर प्राणी विज्ञान छात्र है संगठन के सदस्य बनने से पूर्व कम से कम दस लोगों को नशामुक्ति के लिए जागरूक करने के अलावा किसी भी प्रकार के नशा का सेवन न करने का शपथ-पत्र देना पड़ता है। संगठन का मुख्य उद्देश्य समाज के समाज के सबसे पिछड़े मुहल्ले,विद्यालय, मलीन बस्ती आदि जगह पर जाकर नुक्कड़ नाटक के, सेमिनार के जरिए लोगों को जागरूक कर नश के लत को जड़ से समाप्त करना है। कृष्ण कुमार यादव कहते हैं कि प्राचीन काल में भी नशे का सेवन किया जाता था। उस समय इसे 'सोमरस' कहा जाता था। हालांकि, इसका उद्देश्य समाज को दूषित करना कतई नहीं था, लेकिन आधुनिक समय में नशा की परिभाषा ही बदल गई है। लोग कई प्रकार के नशा करने लगे हैं, जिनमें शराब, ड्रग्स और हेरोइन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त भी कई प्रकार के नशा हैं। बच्चे भी नशे की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। इससे आने वाली पीढ़ी पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इसके साथ ही खपत अधिक होने से अवैध तस्करी भी जमकर हो रही है। इसके मद्देनजर संयुक्त राष्ट्र ने 1987 में एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें समाज को नशा मुक्त करने की बात थी। इसे सभी देशों की सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। इसके बाद 26 जून, 1987 को पहली बार अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस मनाया गया और फिर हर साल 26 जून को मनाया जाने लगा।बिहार में शराबबंदी के बाद हालात तो कुछ सुधरे हैं, लेकिन इसके अलावा भी तंबाकू, ध्रूमपान आदि का नशा लोगों के लिए दिन प्रतिदिन खतरा बनता जा रहा है। युवा वर्ग में यह लत सबसे ज्यादा है जिसको लेकर वह काम कर रहे है। अन्तर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस के अवसर पर श्रीकृष्ण नशा मुक्ति संगठन के द्वारा ग्लोरियस स्टडी सेन्टर प्रोफेसर काॅलोनी मे नशा मुक्ति अभियान चलाया गया और सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमें युवाओं ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया । ग्लोरियस स्टडी सेन्टर के व्यवस्थापक नवनीत सिन्हा ने युवाओं में बढ़ रहे नशा की लत पर खेद जताया। जिद नि:शुल्क शिक्षा के संस्थापक सोनु नंदा यादव ने युवाओं को देश की रीढ़ बताया और नशा मुक्ति में युवाओं को आगे आने का आह्वान किया।
सामाजिक कार्यकर्ता प्रभात यादव ने कहा कि समाज के लोगों को एकजुट होकर नशा को जड़ से खत्म करना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में श्रीकृष्ण नशा मुक्ति संगठन के संस्थापक कृष्ण कुमार यादव ने सभी सहभागी को शपथ दिलाया कि मै किसी भी प्रकार का नशा नहीं करुंगा। साथ ही अपने मित्र, मौहल्लो के साथी ,परिवार के सदस्यों एवं समाज के स्वजनों को भी नशा से दूर रखूंगा ताकि नशा मुक्ति समाज हो। साथ ही बताया कि आज बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक नशें के गुलाम बन चुके हैं। नशा आज स्टेटस सिबंल बन चुका है। कैसी विडंबना है कि मानव को नशें से होने वाली बीमारियों का पता है फिर भी खुद ही मौत को दावत दी जाती है। पुरुष तो नशा करते ही हैं मगर आज महिलाए भी नशें की गिरफत में आ चुकी हैं।
दुनिया भर के युवा नशे की अंधी गलियों में भटक चुके हैं। युवाओं को बाहर निकालना हरेक का नैतिक कर्तव्य है। दुनिया में हर साल लाखों युवा नशे के कारण असमय ही मौत के आगोश में समाते जा रहे हैं।आज मां-बाप दुखी हैं कि उनके चिराग नशें की गिरफत में आते जा रहे हैं। आज नशे के सौदागर युवाओं के भविष्य खराब करते जा रहे हैं। अगर युवा ही नशे का प्रयोग करेगा तो आने वाला कल अंधकारमय ही होगा। युवा के कंधों पर देश टिका है, मगर यह कंधे थक चुके हैं। नसों में नशा भर चुका है। जवान काया शिथिल होती जा रही है। नशे के कारण सड़क हादसों में हर साल लाखों युवा बेमौत मारे जा रहे हैं। मौके पर मौजूद युवा अमित राज, छात्र सुधांशु यादव, पप्पू कुमार भगत, गोलू कुमार यादव, राज कुमार भगत, अभिषेक कुमार ठाकुर, अनिश कुमार भगत,राहुल कुमार यादव, हरेन्द्र कुमार, राजा कुमार, सुभम भगत आदि दर्जनों लोग ने नशा छोड़ने हेतू शपथ लिया। साथ ही मित्र मोहल्ले के साथी,परिवार के सदस्यों एवं समाज के स्वजनों को भी नशा से दूर रखने का भी पतिज्ञा किया। व कम से कम दस लोगों को इसके प्रति जागरूक करने का वादा किया।
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