सोशल लर्निंग प्लेटफॉर्म टीचर्स ऑफ बिहार ने वर्षांत में एक नया कार्यक्रम आरम्भ किया है जिसका नाम है कोडिंग सीखेगा बिहार: इच्छा है तो संभव है।
जैसा कि हम सभी जानते हैं इस कोरोनाकाल में सभी शैक्षणिक संस्थान बंद हैं।बच्चे घर मे बैठे ऑनलाइन अध्यन करते हुए मोबाइल का भी प्रयोग खूब कर रहे हैं। दिन भर कंप्यूटर या मोबाइल पर वीडियो गेम खेलते रहते हैं ।
टीचर्स ऑफ बिहार के प्रदेश प्रवक्ता रंजेश सिंह ने बताया कि हमारी टीम ने सोचा है इन उपकरणों का सकारात्मक उपयोग किया जाए? बच्चों को गेम खेलने से ज्यादा ज्ञानार्जन की जरूरत है।? तो आपके बच्चे कई प्रोग्राम्स, कोडिंग कर के आसान तरीके से बना सकते हैं।
प्रोग्रामिंग या कोडिंग ऐसा कौशल है जिसे कम हस्तक्षेप के साथ घर बैठे विकसित किया जा सकता है। ज्यादातर माता-पिता इसे महसूस नहीं करते हैं, लेकिन ऑनलाइन ऐसे कई संसाधन हैं जो पैसे लेकर बच्चों को प्रोग्राम सीखने में मदद कर सकते है।
कोडिंग एक शानदार तरीका है बच्चों में तर्क कौशल और गणितीय क्षमताओं को विकसित करने के लिए। घर पर प्रोग्रामिंग सीखने के लिए आपको क्या करने की आवश्यकता है? बस किसी भी बुनियादी कंप्यूटर/ एंड्राइड एवं एक इंटरनेट कनेक्शन की।
इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य शिक्षकों एवं बच्चों को निःशुल्क कोडिंग के प्रति जागरूक करना और सिखाना है। कार्यक्रम में मुख्य साधन सेवी की भूमिका बिहार के सरकारी विद्यालय के शिक्षक श्री सौरभ सुमन जी निभाएंगे। कार्यक्रम ऑनलाइन ज़ूम एप्प पर आयोजित किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में बहुत ही लिमिटेड सीट्स है तो पहले आओ पहले पाओ के आधार पर रजिस्ट्रेशन के आधार पर चयनित प्रतिभागियों की सूची जारी कर उनके साथ इस कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी। तो देर न करें आज ही इस रजिस्ट्रेशन फॉर्म को भरें और शामिल हों और कहें “इच्छा है तो संभव है“।
प्रशिक्षण दिवस: सप्ताह के दो दिन रविवार और गुरुवार
प्रशिक्षण समय : चालीस मिनट
प्रशिक्षण का माध्यम- ज़ूम एप्प।

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