सैय्यद आसिफ इमाम काकवी
ख़ास रिपोर्ट :
जहानाबाद शहर के कोर्ट एरिया स्थित प्रतिष्ठित होटल राजगृह में आयोजित इस कार्यक्रम का संयुक्त रूप से उद्घाटन वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक आंदोलनों से जुड़े संतोष श्रीवास्तव, वरिष्ठ साहित्यकार दीप कुमार, दंत चिकित्सक डॉ. रोहित राज, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष हरिनारायण द्विवेदी, भूषण कुमार सिंह, राजकिशोर कुमार, पटना के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय भारती, वरिष्ठतम पत्रकार सैयद आसिफ इमाम काकवी , द विग्स फाउंडेशन के निदेशक संतोष कुमार, कवयित्री डॉ. मानसी सिंह तथा लज्जिज ग्रुप के चेयरमैन नीतीश कुमार ने किया। कुछ आयोजन महज़ कार्यक्रम नहीं होते, बल्कि अपने शहर के सपनों, मेहनत और उम्मीदों को सम्मान देने का एक ख़ूबसूरत बहाना बन जाते हैं।
जहानाबाद की सरज़मीं पर नई सृष्टि के बैनर तले आयोजित सम्मान समारोह भी ऐसा ही एक यादगार मौक़ा बना, जहाँ सिनेमा, संगीत, कला, पत्रकारिता और समाजसेवा से जुड़े लोगों का सम्मान कर बिहार की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया। नई सृष्टि के अशोक प्रियदर्शी और वरिष्ठ पत्रकार संतोष श्रीवास्तव के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में हिंदी फ़िल्म ‘चिनिया बादाम’ की टीम के कलाकारों के साथ भोजपुरी सिनेमा के जाने-माने निर्देशक सुजीत कुमार सिंह को भी सम्मानित किया गया। मंच पर मौजूद कलाकारों के चेहरों पर ख़ुशी, आँखों में सपने और दिलों में अपनी मिट्टी के लिए मोहब्बत साफ़ दिखाई दे रही थी। यह आयोजन इस बात का पैग़ाम था कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की जागीर नहीं होती। हुनर अगर सच्चा हो, मेहनत में ईमानदारी हो और इरादों में मज़बूती हो, तो जहानाबाद जैसे शहरों से भी ऐसे नाम सामने आ सकते हैं, जो अपनी कला से दूर-दूर तक पहचान बनाएँ।
कार्यक्रम के दौरान बहुप्रतीक्षित हिंदी फ़िल्म ‘चिनिया बादाम’ का दमदार ट्रेलर एक बार फिर प्रदर्शित किया गया। ट्रेलर को लेकर दर्शकों में उत्सुकता दिखाई दी। फ़िल्म की टीम का मानना है कि यह फ़िल्म मनोरंजन के साथ बिहार की प्रतिभा, संघर्ष और बदलती सामाजिक पहचान को सामने लाने की कोशिश है। फ़िल्म से जुड़े कलाकारों में धामा वर्मा, ओपी कश्यप, ख़ुशी राजपूत, तामिश सुल्तान, एजाज़ सुल्तान और डॉ. सुल्तान अहमद सहित अन्य लोगों का नाम शामिल है। फ़िल्म के ट्रेलर को Sultan Swar Sangeet YouTube चैनल पर देखा जा सकता है।
चिनिया बादाम’ की चर्चा केवल एक फ़िल्म की चर्चा नहीं है। यह उन लोगों के जज़्बे की कहानी भी है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं और उन्हें हक़ीक़त में बदलने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं।जहानाबाद की पहचान को लेकर लंबे समय तक प्रचलित रही नकारात्मक धारणाओं के बीच कला और सिनेमा की ऐसी कोशिशें एक नई तस्वीर पेश करने का अवसर देती हैं। एक ऐसी तस्वीर, जिसमें बंदूक और बदनामी की जगह कैमरा, संवाद, संगीत, रचनात्मकता और उम्मीद को जगह मिले। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण भोजपुरी सिनेमा के जाने-माने निर्देशक सुजीत कुमार सिंह का सम्मान रहा। उन्होंने पवन सिंह, अक्षरा सिंह, दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ और खेसारी लाल यादव जैसे लोकप्रिय कलाकारों के साथ काम करते हुए भोजपुरी सिनेमा को कई चर्चित फ़िल्में दी हैं। उनकी फ़िल्मों में ‘सत्या’, ‘भोजपुरी राजा’, ‘धड़कन’, ‘नरसिंह’, ‘राजा डोली लेके आजा’, ‘क्रैक फ़ाइटर’, ‘आँखें’, ‘अंदाज़’ और ‘वेलकम 2’ जैसी फ़िल्मों का उल्लेख किया गया।
उनका सम्मान इस बात का प्रतीक है कि क्षेत्रीय सिनेमा भारतीय फ़िल्म जगत की एक अहम ताक़त है। भोजपुरी भाषा और संस्कृति ने करोड़ों लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई है। ऐसे में भोजपुरी सिनेमा से जुड़े अनुभवी निर्देशकों और कलाकारों का सम्मान नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन सकता है।
चिनिया बादाम’ से जुड़े डॉ. सुल्तान अहमद का सफ़र भी इस आयोजन की चर्चा का अहम हिस्सा रहा। निर्माता-निर्देशक के रूप में उनका प्रयास जहानाबाद की प्रतिभा को व्यापक मंच तक पहुँचाने की कोशिश से जुड़ा है।
उनका संदेश साफ़ है जहानाबाद की पहचान केवल उसके अतीत से नहीं, बल्कि उसके वर्तमान के हुनर और भविष्य की संभावनाओं से भी होनी चाहिए।
इसी सिलसिले में फ़िल्म के गोवा फ़िल्म महोत्सव के लिए नामांकित होने की जानकारी भी साझा की गई। डॉ. सुल्तान अहमद के अनुसार, फ़िल्म को दिसंबर 2026 में होने वाले आयोजन के लिए चयनित किए जाने की सूचना मिली है। इस उपलब्धि और चयन की आधिकारिक पुष्टि होने पर इससे जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा की जा सकती है। इस अवसर पर डॉ. सुल्तान अहमद ने पत्रकार सैयद आसिफ इमाम काकवी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि दुबई में रहने के दौरान भी सैयद आसिफ इमाम काकवी ने फ़िल्म और उससे जुड़े प्रयासों को लेकर लेखन तथा प्रचार के माध्यम से सहयोग किया। उनके लेख दिल्ली और मुंबई के समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए, जिससे फ़िल्म को व्यापक स्तर पर चर्चा और पहचान मिलने में मदद मिली। यह प्रसंग बताता है कि पत्रकारिता केवल घटनाओं की ख़बर देना नहीं, बल्कि हुनर को पहचान दिलाने और सकारात्मक प्रयासों को लोगों तक पहुँचाने का माध्यम भी बन सकती है। हालाँकि फ़िल्म के चयन और मीडिया कवरेज के बीच प्रत्यक्ष संबंध की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है, लेकिन इस सहयोग के लिए जताया गया आभार अपने आप में उल्लेखनीय रहा।
समारोह में भोजपुरी और हिंदी फ़िल्म जगत से जुड़े कई लोगों की मौजूदगी रही। इनमें निर्माता महेंद्र कुमार, अभिनेता धामा वर्मा, अभिनेता तामिश सुल्तान, अभिनेत्री ख़ुशी राजपूत, अभिनेता एजाज़ सुल्तान, गायक शाहिद रफ़ी, राजलक्ष्मी और मंतोष सहित अन्य कलाकार शामिल रहे। कैमरामैन राहुल कुमार तथा कोरियोग्राफ़र गणेश कुमार को भी सम्मानित किए जाने की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार सैयद आसिफ इमाम काकवी की मौजूदगी रही और उन्हें भी सम्मानित किया गया। यह उनके लिए व्यक्तिगत सम्मान के साथ-साथ पत्रकारिता और रचनात्मक क्षेत्र के बीच सहयोग का एक यादगार अवसर रहा।
सैयद आसिफ इमाम काकवी लंबे समय से लेखन, संपादकीय कार्य और मीडिया के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को उठाते रहे हैं। दुबई में लगभग दो दशक बिताने के बाद बिहार लौटकर उन्होंने पत्रकारिता और अपने मीडिया मंच के ज़रिये स्थानीय प्रतिभाओं तथा जनहित के मुद्दों को सामने लाने का प्रयास जारी रखा है। उनके लिए ऐसे कार्यक्रमों का महत्व केवल मंच पर मिलने वाले सम्मान तक सीमित नहीं है। असली संतोष तब मिलता है, जब किसी छोटे शहर का कलाकार अपने हुनर के दम पर बड़ी पहचान हासिल करता है और उसकी कामयाबी से पूरे क्षेत्र का नाम रोशन होता है। नई सृष्टि के इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए शिक्षा, रोज़गार, संस्कृति, कला और रचनात्मकता को साथ लेकर चलना ज़रूरी है।
अशोक प्रियदर्शी और संतोष श्रीवास्तव की इस पहल के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को एक मंच पर लाने की कोशिश की गई। जब किसी शहर में कलाकारों का सम्मान होता है, तो केवल कुछ व्यक्तियों को शॉल या मोमेंटो नहीं दिया जाता, बल्कि उन तमाम युवाओं को भी उम्मीद मिलती है जो अपने सपनों को लेकर संघर्ष कर रहे होते हैं। आज ज़रूरत इस बात की है कि बिहार की प्रतिभाओं को स्थानीय स्तर पर प्रोत्साहन, बेहतर प्रशिक्षण, रोज़गार के अवसर और राष्ट्रीय मंचों तक पहुँचने के साधन मिलें। सम्मान समारोह तभी स्थायी बदलाव की बुनियाद बनेंगे, जब उनके साथ आगे बढ़ने के वास्तविक अवसर भी तैयार किए जाएँगे। जहानाबाद की मिट्टी ने हमेशा मेहनतकश लोगों, अदबी शख़्सियतों और प्रतिभाशाली नौजवानों को जन्म दिया है। अब वक़्त है कि इस मिट्टी की पहचान उसके हुनर, तहज़ीब, कला और सकारात्मक कोशिशों से भी मज़बूत हो। चिनिया बादाम’ की टीम, भोजपुरी निर्देशक सुजीत कुमार सिंह और नई सृष्टि के इस सम्मान समारोह से जुड़ा हर प्रयास एक साझा उम्मीद की ओर इशारा करता है बिहार के नौजवानों को अपने सपनों के लिए बड़े शहरों की ओर देखने के साथ-साथ अपने शहर में भी अवसर पैदा करने का हौसला मिले। क्योंकि जब किसी छोटे शहर के कलाकार को सम्मान मिलता है, तो केवल उसका सिर ऊँचा नहीं होता, बल्कि उस शहर के हज़ारों सपनों को भी उड़ान मिलती है। नई सृष्टि की यह पहल इसी उम्मीद को आगे बढ़ाने का एक प्रयास है। दुआ है कि ‘चिनिया बादाम’ की टीम को कामयाबी मिले, जहानाबाद के कलाकारों को नए अवसर मिलें और बिहार की कला-संस्कृति देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाए। जहानाबाद की मिट्टी से उठती हर सकारात्मक आवाज़ को सलाम क्योंकि बिहार की असली ताक़त उसकी प्रतिभा, उसकी मेहनत और उसके लोगों के सपनों में बसती है।







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