बोधगया में सीज़िप्स 2026 का आगाज, देशभर के 500 मनोचिकित्सक ले रहे हिस्सा




  • तीन दिवसीय सम्मेलन में मानसिक स्वास्थ्य, आधुनिक उपचार पद्धतियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर होगा मंथन
  • विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर शनिवार को निकलेगी जागरूकता पदयात्रा, बिहार चिकित्सा पंजीकरण परिषद ने दिए 12 सीएमई क्रेडिट घंटे

बोधगया। ईस्ट ज़ोन इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी का 51 वां वार्षिक सम्मेलन ‘सीज़िप्स 2026’ आज से बोधगया स्थित आइटीसी वेलकम के सभागार में प्रारंभ हो गया है ।

समिति के पूर्वी क्षेत्र के अध्यक्ष डॉ उदय कुमार सिन्हा ने बताया कि 11 अक्टूबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्तर के अकादमिक आयोजन में देशभर से लगभग 500 मनोचिकित्सक, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, शिक्षाविद, शोधकर्ता, स्नातकोत्तर विद्यार्थी और युवा चिकित्सक भाग ले रहे हैं। सम्मेलन में आधुनिक मनोचिकित्सा, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, नवीन उपचार पद्धतियों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी उभरती चुनौतियों पर विशेषज्ञ अपने विचार और अनुभव साझा करेंगे।





इस वर्ष सम्मेलन की थीम ‘द मेडिकल माइंडस्केप–माइंड बियॉन्ड माइंड’ रखी गई है। इसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के बदलते स्वरूप को समझने, चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे नए अनुसंधानों पर चर्चा करने और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में ज्ञान का आदान-प्रदान करना है।

सम्मेलन का आयोजन ईस्ट ज़ोन इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. यू. के. सिन्हा और मानद सचिव डॉ. रंजन भट्टाचार्य के नेतृत्व में किया जा रहा है। डॉ. एन. पी. सिंह आयोजन अध्यक्ष तथा डॉ. निस्का सिन्हा आयोजन सचिव हैं।

सम्मेलन के वैज्ञानिक कार्यक्रम की शुरुआत शुक्रवार को चार विशेष कार्यशालाओं के साथ हुई। इनमें सिरदर्द के मरीजों के मूल्यांकन एवं उपचार की रणनीति, मनोचिकित्सा में प्रभावी साक्षात्कार कौशल, भारत में न्यायिक मनोचिकित्सा तथा बाह्य रोगी विभाग से न्यायालय तक की प्रक्रिया और चिकित्सकीय व्यवहार में यौन चिकित्सा के समावेश जैसे विषय शामिल हैं। कार्यशालाओं के माध्यम से प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण और कौशल विकास का अवसर दिया जा रहा है।





सम्मेलन के दौरान बचपन के प्रतिकूल अनुभवों, आपदा मनोचिकित्सा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, वृद्धावस्था में कला चिकित्सा, अंतरंगता एवं संबंध, धर्म और आध्यात्मिकता, मनोभ्रंश, सिजोफ्रेनिया, अवसाद तथा नई औषधीय उपचार पद्धतियों पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे। इसके अलावा युवाओं में नशे की समस्या, जीवन के विभिन्न चरणों में एडीएचडी, प्रसवोत्तर मानसिक बीमारियां और सटीक मनोचिकित्सा जैसे विषय भी वैज्ञानिक सत्रों का हिस्सा होंगे।

मनोचिकित्सकीय पुनर्वास, स्वस्थ होने पर आधारित देखभाल, मानसिक बीमारियों की प्राथमिक रोकथाम, अवसाद एवं ओसीडी में आरटीएमएस, अवसाद के उपचार में सहायक औषधियों तथा ओरेक्सिन और मनोचिकित्सकीय विकारों के संबंध पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण यह बहस होगी कि क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता किसी मनोचिकित्सक से बेहतर साबित हो सकती है।

सम्मेलन में युवा मनोचिकित्सकों एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत शोध-पत्र प्रस्तुतियां, केंद्रित समूह कार्यशालाएं, केस ब्लिट्ज और स्नातकोत्तर प्रश्नोत्तरी ‘द माइंडस्केप चैलेंज’ आयोजित किए जा रहे हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से युवा चिकित्सकों को अपने शोध, अनुभव और चिकित्सकीय ज्ञान को साझा करने का अवसर मिलेगा।

आयोजन सचिव डॉक्टर निस्का सिंह ने बताया कि कार्यक्रम में युवाओं में नशे की लत, नशा मुक्ति उपचार में नई प्रगति, एडीएचडी, प्रसवोत्तर मानसिक बीमारियों की शुरुआत या पुनरावृत्ति तथा मनोविकृति एवं सिजोफ्रेनिया में सटीक उपचार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा होगी।

सम्मेलन के तहत 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर सुबह सात से आठ बजे तक मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता पदयात्रा आयोजित की जाएगी। आईआईएम बोधगया के सहयोग से होने वाली इस पहल में मनोचिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी, सम्मेलन प्रतिनिधि, विद्यार्थी और अन्य प्रतिभागी शामिल होंगे। पदयात्रा के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इससे जुड़े विषयों पर समाज में सकारात्मक संवाद को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया जाएगा।

सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन समारोह 10 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे से एक बजे तक आईटीसी वेलकम, बोधगया में निर्धारित है। इसमें विशिष्ट अतिथि, विशेषज्ञ, संकाय सदस्य और सम्मेलन के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

सम्मेलन के अंतिम दिन जैव-चिह्नों के आधार पर सटीक मनोचिकित्सा, सिजोफ्रेनिया के उपचार में बदलते दृष्टिकोण, तंत्रिका-विज्ञान एवं मनोचिकित्सा के बीच आधुनिक संबंध, नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले किशोरों में जैव-चिह्न और सटीक न्यूरोमॉड्यूलेशन जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद सम्मान समारोह, पुरस्कार वितरण और समापन कार्यक्रम होगा।

सीज़िप्स 2026 को बिहार चिकित्सा पंजीकरण परिषद ने 12 सीएमई क्रेडिट घंटे की मान्यता प्रदान की है। यह मान्यता आदेश संख्या 6158, दिनांक 1 अक्टूबर 2026 के तहत दी गई है। इससे पात्र प्रतिभागियों को निरंतर चिकित्सा शिक्षा के क्रेडिट घंटे प्राप्त होंगे।

आयोजन सचिव डॉ. निस्का सिन्हा वैज्ञानिक कार्यक्रम, संकाय समन्वय और विभिन्न अकादमिक एवं संगठनात्मक गतिविधियों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
डॉ उदय कुमार सिन्हा के अनुसार, सीज़िप्स 2026 का मुख्य उद्देश्य निरंतर चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देना, युवा चिकित्सकों के प्रशिक्षण को मजबूत करना, अनुसंधान को प्रोत्साहित करना और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाना है। सम्मेलन आधुनिक मनोचिकित्सा की चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार-विमर्श के साथ विशेषज्ञों के बीच सहयोग और ज्ञान साझा करने का अवसर प्रदान करेगा।

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