- स्तन कैंसर को लेकर मिथक और सामाजिक झिझक दूर करना जरूरी, मेदांता पटना में 100 से अधिक कैंसर विजेताओं ने साझा की अपनी यात्रा
- स्तन कैंसर जागरूकता कार्यक्रम में 160 से अधिक लोगों की भागीदारी; डॉ. शांति रॉय सहित वरिष्ठ विशेषज्ञों ने महिलाओं से खुलकर सवाल पूछने और समय पर जांच कराने की अपील की
पटना, 27 अक्टूबर 2026:
स्तन कैंसर को लेकर समाज में व्याप्त भ्रांतियों, डर और सामाजिक झिझक को दूर करने के उद्देश्य से जय प्रभा मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटना द्वारा विशेष स्तन कैंसर जागरूकता एवं कैंसर विजेता मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 160 से अधिक लोगों ने भाग लिया, जिनमें स्तन कैंसर का उपचार पूरा कर स्वस्थ जीवन जी रहीं 100 से अधिक महिलाएं भी शामिल थीं। कार्यक्रम में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शांति रॉय की विशेष उपस्थिति रही। रोटरी एवं इनर व्हील के सदस्यों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
भारत में स्तन कैंसर महिलाओं में सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय कैंसर पंजीकरण कार्यक्रम के प्रकाशित अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2025 में देश में स्तन कैंसर के लगभग 2.33 लाख नए मामले होने का अनुमान था। विशेषज्ञों ने बताया कि सामाजिक झिझक, गलत धारणाओं और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने से कई महिलाएं समय पर चिकित्सकीय परामर्श नहीं ले पाती हैं।
डॉ. निहारिका रॉय, सीनियर कंसल्टेंट – ब्रेस्ट सर्विसेज, मेदांता पटना ने कहा कि स्तन में हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन बिना दर्द वाली गांठ को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि स्तन के आकार, त्वचा या निप्पल में असामान्य बदलाव तथा स्राव जैसे लक्षणों की समय पर जांच जरूरी है। महिलाओं को अपने स्तनों में होने वाले बदलावों के प्रति जागरूक रहने और उम्र एवं व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह से आवश्यक स्क्रीनिंग कराने पर जोर दिया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण स्तन कैंसर से जुड़े मिथकों और वास्तविकताओं पर आधारित संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र रहा। इसमें महिलाओं और कैंसर विजेताओं ने बीमारी के कारणों, शुरुआती लक्षणों, बायोप्सी, सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन, दोबारा कैंसर होने की आशंका और उपचार के बाद सामान्य जीवन से जुड़े सवाल पूछे। उपस्थित वरिष्ठ चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों ने प्रत्येक प्रश्न का उत्तर देते हुए वैज्ञानिक तथ्यों और उपचार के उपलब्ध विकल्पों की जानकारी दी।
कार्यक्रम में कैंसर का उपचार पूरा कर चुकी महिलाओं ने अपनी व्यक्तिगत यात्रा साझा की। उन्होंने बीमारी का पता चलने से लेकर उपचार और स्वस्थ जीवन की ओर लौटने तक के अनुभव बताए। इन महिलाओं ने वर्तमान में कैंसर का सामना कर रहे मरीजों को उम्मीद बनाए रखने, इलाज के प्रति सकारात्मक रहने और नियमित चिकित्सकीय सलाह का पालन करने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके अनुभवों ने यह संदेश दिया कि सही उपचार, परिवार के सहयोग और निरंतर देखभाल के साथ कैंसर के बाद भी सक्रिय और सार्थक जीवन संभव है।
डॉ. रवि शंकर सिंह, मेडिकल डायरेक्टर, मेदांता पटना ने कहा कि स्तन कैंसर के खिलाफ लड़ाई में उपचार के साथ जागरूकता और सामाजिक सहयोग भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि मेदांता पटना में ब्रेस्ट सर्जरी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी और अन्य विशेषज्ञ सेवाओं के समन्वय से मरीजों के लिए व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार की जाती है। अस्पताल का प्रयास है कि महिलाओं को जांच से लेकर उपचार और उसके बाद की देखभाल तक आवश्यक विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिले।
उन्होंने कहा कि मेदांता पटना ‘आओ, देखो, सीखो’ अभियान सहित विभिन्न सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रहा है। ऐसे आयोजनों का उद्देश्य महिलाओं को डर और संकोच से बाहर निकालकर समय पर जांच तथा उचित उपचार के लिए प्रेरित करना है।
इस अवसर पर डॉ. राजीव रंजन प्रसाद, डायरेक्टर – रेडिएशन ऑन्कोलॉजी; डॉ. मीना सामंत, डायरेक्टर – ऑब्सटेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी; डॉ. अमरेंद्र अमर, एसोसिएट डायरेक्टर – मेडिकल ऑन्कोलॉजी; डॉ. अमित कुमार, एसोसिएट डायरेक्टर – मेडिकल ऑन्कोलॉजी; तथा डॉ. नवीन नयन, कंसल्टेंट – मेडिकल ऑन्कोलॉजी सहित मेदांता पटना के वरिष्ठ विशेषज्ञ उपस्थित रहे। इसके अलावा बिहार के विभिन्न क्षेत्रों से आए इनर व्हील एवं रोटरी के सदस्य, कैंसर विजेता, मरीजों के परिजन तथा अन्य प्रतिभागी कार्यक्रम में शामिल हुए।
कार्यक्रम का समापन स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने, इससे जुड़े मिथकों को दूर करने और महिलाओं को समय पर जांच एवं विशेषज्ञ उपचार के लिए प्रोत्साहित करने के संदेश के साथ हुआ।





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