पटना की गलियों से मदरसा शम्सुल होदा तक जदयू की प्रदेश सचिव सैयद शगुफ़्ता परवीन का जनसंपर्क अभियान, शिक्षाविदों और नागरिकों से किया संवाद





  • पटना की गलियों से मदरसा शम्सुल होदा तक जदयू की प्रदेश सचिव सैयद शगुफ़्ता परवीन का जनसंपर्क अभियान, शिक्षाविदों और नागरिकों से किया संवाद
  • जदयू की प्रदेश सचिव सैयद शगुफ़्ता परवीन वरिष्ठ नेत्री ने विभिन्न मोहल्लों में की मुलाक़ातें, विधान परिषद चुनाव को लेकर लोकतांत्रिक भागीदारी पर दिया ज़ोर

✍️ सैयद आसिफ़ इमाम काकवी : 


पटना | ख़ास रिपोर्ट : पटना की गलियों, मुस्लिम मोहल्लों और शिक्षण संस्थानों में लोगों से रूबरू होकर अपनी बात रखना और जनसंपर्क के ज़रिये उन्हें चुनावी प्रक्रिया से जोड़ना—इसी सिलसिले में जदयू की प्रदेश सचिव सैयद शगुफ़्ता परवीन जदयू की वरिष्ठ नेत्री इन दिनों सक्रिय नज़र आ रही हैं। बिहार विधान परिषद के स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव को लेकर उन्होंने पटना के विभिन्न इलाक़ों में लोगों से मुलाक़ात की। बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग मोहल्लों से लेकर मदरसा शम्सुल होदा तक उनका जनसंपर्क अभियान जारी रहा। इस दौरान उन्होंने शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों, शिक्षकों, व्यापारियों, युवाओं और समाज के ज़िम्मेदार लोगों से संवाद किया तथा एनडीए समर्थित प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा के समर्थन में मतदान की अपील की। 





जदयू की प्रदेश सचिव सैयद शगुफ़्ता परवीन का यह अभियान केवल मुलाक़ातों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके ज़रिये उन्होंने लोगों से चुनाव, शिक्षा और लोकतांत्रिक भागीदारी जैसे अहम विषयों पर बातचीत भी की। वह लोगों के बीच पहुँचीं, उनकी बातें सुनीं और आगामी चुनाव में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनसंपर्क का वास्तविक अर्थ जनता के बीच जाना, संवाद कायम करना और अपने विचारों को सीधे लोगों तक पहुँचाना है। शगुफ़्ता परवीन ने इसी प्रक्रिया के तहत पटना के कई इलाक़ों में लोगों से संपर्क साधा। 





जदयू की प्रदेश सचिव सैयद शगुफ़्ता परवीन की राजनीतिक पहचान लंबे समय से जनता दल (यूनाइटेड) के संगठनात्मक कार्यों और महिला नेतृत्व से जुड़ी रही है। उनकी राजनीतिक यात्रा को याद करते हुए वरिष्ठ नेता सादिक़ अख़्तर ने उनके पंद्रह वर्षों के सफ़र का उल्लेख किया और पार्टी के प्रति उनके समर्पण की सराहना की। एक महिला के रूप में सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहना, संगठनात्मक ज़िम्मेदारियों को निभाना और लगातार लोगों के बीच अपनी मौजूदगी बनाए रखना अपने आप में मेहनत और निरंतरता की मांग करता है। मुझे आज भी वह मुलाक़ात याद है, जब जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने जदयू की प्रदेश सचिव सैयद शगुफ़्ता परवीन से मेरा परिचय कराया था। उस अवसर पर उनके संगठनात्मक कार्यों और राजनीतिक सफ़र का ज़िक्र हुआ। उस मुलाक़ात ने मुझे बिहार की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और संगठन के भीतर उनकी भूमिका को क़रीब से समझने का अवसर दिया। राजनीति में किसी व्यक्ति की पहचान केवल उसके पद से नहीं, बल्कि उसके काम, संपर्क और लोगों के साथ उसके संवाद से भी बनती है। 






जनसंपर्क अभियान के दौरान शगुफ़्ता परवीन ने बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में कई सम्मानित शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों से मुलाक़ात की। इस क्रम में इंजी. सैयद अलय अहसन, प्रोफेसर मनावर, खालिद साहब, ज़ाकिर हुसैन इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल तथा बीएनके से जुड़े मित्रों और अन्य शिक्षकों से संवाद किया गया। उन्होंने आगामी चुनाव के संदर्भ में अपनी बात रखी और नीरज कुमार सिन्हा के समर्थन में मतदान की अपील की। शिक्षक और शिक्षाविद किसी भी समाज की बौद्धिक बुनियाद होते हैं। वे केवल किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि आने वाली नस्लों में सोचने, सवाल करने और ज़िम्मेदारी निभाने की सलाहियत भी पैदा करते हैं। इसलिए शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े चुनाव में मतदाताओं की भूमिका विशेष महत्व रखती है। 





ऐसे चुनावों में जागरूकता, जानकारी और मतदान की प्रक्रिया को समझना आवश्यक है। शगुफ़्ता परवीन के जनसंपर्क अभियान का एक अहम पड़ाव मदरसा शम्सुल होदा रहा। यहाँ उन्होंने मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष जनाब सलीम परवेज़, मदरसा शम्सुल होदा के प्रिंसिपल, शिक्षकों, स्नातक वर्ग से जुड़े लोगों और विद्यार्थियों से मुलाक़ात कर संवाद किया। इस दौरान चुनाव और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी को लेकर अपनी बात रखी तथा एनडीए समर्थित प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा के पक्ष में मतदान की अपील की।





मदरसा शम्सुल होदा जैसे शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षकों और शिक्षा से जुड़े लोगों के साथ संवाद का अपना महत्व है। शिक्षा किसी भी समुदाय की तरक़्क़ी, सामाजिक जागरूकता और बेहतर भविष्य की बुनियाद है। शिक्षित समाज अपने अधिकारों और ज़िम्मेदारियों को बेहतर ढंग से समझता है। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया के प्रति जागरूकता बढ़ाना और मतदाताओं को अपनी भूमिका का एहसास कराना लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है। शगुफ़्ता परवीन के इस अभियान में पटना के विभिन्न मोहल्लों, मुस्लिम आबादी वाले इलाक़ों और शिक्षण संस्थानों तक पहुँचने की कोशिश दिखाई दी। उन्होंने लोगों से व्यक्तिगत संपर्क स्थापित किया और अपने समर्थित प्रत्याशी के पक्ष में मतदान की अपील की। चुनाव में हर राजनीतिक दल और प्रत्याशी को अपनी बात जनता तक पहुँचाने का अधिकार है, वहीं मतदाताओं को भी विभिन्न पक्षों को समझकर स्वतंत्र रूप से अपना निर्णय लेने का अधिकार है। 


रिपोर्ट: सैयद आसिफ़ इमाम काकवी 



बिहार विधान परिषद के स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में मतदाता सूची में शामिल पात्र मतदाताओं की भागीदारी महत्वपूर्ण है। इस संदर्भ में यह भी ज़रूरी है कि मतदाता अपने निर्वाचन क्षेत्र, मतदान की तारीख़ और संबंधित चुनाव के आधिकारिक निर्देशों की जानकारी रखें। शगुफ़्ता परवीन का जनसंपर्क अभियान इस बात की याद दिलाता है कि राजनीति केवल मंचों और भाषणों तक सीमित नहीं होती। गलियों में लोगों से मिलना, शिक्षकों के बीच बैठना, बुद्धिजीवियों से विचार साझा करना और नागरिकों की बात सुनना भी राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। पटना की इस चुनावी हलचल के बीच अब सबकी निगाहें मतदान और मतदाताओं की भागीदारी पर रहेंगी। लोकतंत्र की असली ताक़त जागरूक नागरिक, निष्पक्ष चुनाव और स्वतंत्र मताधिकार में निहित है। किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में अपील करना राजनीतिक अधिकार है, लेकिन अंतिम निर्णय मतदाता का अपना होता है। यही लोकतंत्र की ख़ूबसूरती और उसकी बुनियादी आत्मा है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ