- बिहार के 1,200 गांवों में जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा, 27,600 एकड़ में होगा फसल प्रत्यक्षण”
- वैज्ञानिक खेती, कम लागत और बेहतर आय—जलवायु अनुकूल कृषि से किसानों को मिलेगा लाभ
- "जलवायु के अनुरूप खेती, भविष्य की तैयारी": विजय कुमार सिन्हा
दिनांक- 21 अक्टूबर 2026
पटना ।
माननीय कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने, कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने तथा किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से बिहार में चतुर्थ कृषि रोड मैप के अंतर्गत जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम (CRA) के कार्यान्वयन को गति दी जा रही है। उन्होंने कहा कि बाढ़, सुखाड़, अल्पवृष्टि और तापमान में अप्रत्याशित बदलाव कृषि क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती हैं। ऐसे में आधुनिक कृषि पद्धतियों एवं वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर खेती को जलवायु अनुकूल बनाना आवश्यक है। यह कार्यक्रम उत्पादन लागत कम करने, उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
श्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि राज्य के 24 जिलों में जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक जिले में 5 प्राथमिक गांवों का चयन होगा, जिससे कुल 120 प्राथमिक गांव चिह्नित किए जाएंगे। प्रत्येक प्राथमिक गांव के निकटवर्ती 9 द्वितीयक गांवों को भी कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा। इस प्रकार कुल 1,200 गांवों में जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाएगा। कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी, व्यावहारिक प्रशिक्षण तथा वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि कृषि को अधिक टिकाऊ बनाया जा सके।
उन्होंने आगे कहा कि जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम (Climate Resilient Agriculture–CRA) के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु कृषि विभाग, बिहार सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1,405.51 लाख रुपए (लगभग 14.06 करोड़ रुपए ) की राशि की निकासी एवं व्यय की स्वीकृति प्रदान की गई है।
श्री सिन्हा ने कहा कि यह कार्यक्रम हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत के संकल्प, किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को आधुनिक एवं आत्मनिर्भर बनाने तथा जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के विजन के अनुरूप है। केंद्र एवं राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, आधुनिक तकनीकों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देकर खेती को अधिक टिकाऊ, लाभकारी एवं जलवायु अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है।
कृषि मंत्री ने कहा कि कार्यक्रम के तहत रबी एवं गरमा मौसम में कुल 27,600 एकड़ में विभिन्न फसलों की खेती का प्रत्यक्षण किया जाएगा। रबी मौसम में 18,000 एकड़ में जीरो टिलेज तकनीक से गेहूं, चना एवं मसूर तथा रेज्ड बेड तकनीक से मक्का, सरसों, अलसी, मसालों और सब्जियों की खेती होगी। वहीं, गरमा मौसम में 9,600 एकड़ में मक्का, मूंग, उड़द, मोटे अनाज, सूरजमुखी, तिल, हरी खाद के लिए ढैंचा एवं सब्जियों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए लीफ कलर चार्ट और नियमित मृदा परीक्षण को प्रोत्साहित किया जाएगा।
श्री सिन्हा ने बताया कि कार्यक्रम के तहत सभी 24 चयनित जिलों में 30-30 एकड़ क्षेत्र में सीड हब स्थापित किए जाएंगे। इस प्रकार कुल 720 एकड़ में बीज उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। योजना के प्रावधानों के अनुसार, बिहार राज्य बीज निगम लिमिटेड उत्पादित बीजों की खरीद किसानों से सीधे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से 30 प्रतिशत अधिक दर पर करेगा। इससे गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा और किसानों को अपनी उपज की बिक्री में सहायता मिलेगी।
कृषि मंत्री ने बताया कि जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के तहत विभिन्न कृषि योजनाओं को आपस में जोड़कर कार्य किया जाएगा। इसके अंतर्गत चयनित गांवों में कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित होंगे। सरसों उत्पादक क्षेत्रों में प्रति गांव 10 बी-बॉक्स के माध्यम से मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, 25 एकड़ में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई तथा 10 वर्मी कम्पोस्ट इकाइयों की स्थापना की जाएगी। इससे जल संरक्षण, कृषि संसाधनों की उपलब्धता और जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
श्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि कार्यक्रम के तहत 18,000 किसानों को खेतों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि 3,600 किसानों को एक्सपोजर विजिट के माध्यम से उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी मिलेगी। बामेती, पटना द्वारा 240 कृषि अधिकारियों एवं कर्मियों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि कार्यक्रम की निगरानी के लिए प्रत्येक फसल प्रत्यक्षण प्लॉट की जियो-टैगिंग एवं डिजिटल क्रॉप सर्वे कराया जाएगा। डीबीटी पोर्टल पर पंजीकृत 0.5 से 3 एकड़ भूमि वाले पात्र किसानों को नियमानुसार लाभ मिलेगा। प्रगति रिपोर्ट प्रतिमाह जल-जीवन-हरियाली पोर्टल पर अपलोड होगी। साथ ही, प्रत्येक फसल के कम से कम तीन फसल कटनी प्रयोगों से उत्पादन एवं उत्पादकता का आकलन किया जाएगा।

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