● माननीय उप मुख्यमंत्री श्री विजय कुमार चौधरी की पुरजोर मांग पर केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री ने दिया निर्देश।
पटना/नई दिल्ली, 27 अक्टूबर 2026
नई दिल्ली में सम्पन्न हुए गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की 19वीं बैठक में उप मुख्यमंत्री-सह- जल संसाधन मंत्री, श्री विजय कुमार चौधरी ने गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग का मुख्यालय पटना से दिल्ली किये जाने का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि 1972 में इसके गठन काल से ही आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों का मुख्यालय पटना में ही था, जिसे हाल में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने दिल्ली स्थानान्तरित कर दिया। उन्होंने बैठक में बताया कि इससे बिहार को बाढ़ प्रबंधन की योजनाओं की स्वीकृति में घोर कठिनाई होगी तथा बाढ़ निरोधक कार्य भी समय पर नहीं हो सकेंगे।
ज्ञातव्य है कि इस संबंध में मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में उप मुख्यमंत्री श्री विजय कुमार चौधरी ने पूर्व में भी आयोग का मुख्यालय पटना में ही रहने देने का अनुरोध किया था। उन्होंने बैठक में मांग करते हुए कहा कि मूल परिकल्पना के अनुरूप गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग का मुख्यालय पूर्व की भांति पटना में ही रहने दिया जाना चाहिए, इसे दिल्ली करना अनुचित है। उप मुख्यमंत्री श्री चौधरी की इस मांग पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री श्री शुभेंदु अधिकारी तथा उत्तरप्रदेश के जल संसाधन मंत्री श्री स्वतंत्र देव सिंह ने भी समर्थन किया, जिसके पश्चात् केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग का मुख्यालय पूर्ववत् रखने का निर्देश दिया।
इसके अलावा उन्होंने बाढ़ प्रबंधन योजनाओं (फ्लड मैनेजमेंट प्रोग्राम तथा रिवर मैनेजमेंट एंड बोर्डर एरिया प्रोग्राम) की स्वीकृति ससमय केंद्र सरकार द्वारा देने की मांग की। उन्होंने बताया कि बिहार सरकार की कोशिश होगी कि बाढ़ प्रबंधन की योजनाओं को दिसम्बर के अंत तक केंद्र सरकार को भेज दिया जाए और ऐसी व्यवस्था हो, जिसके तहत केंद्रीय जल आयोग एवं जल शक्ति मंत्रालय द्वारा फरवरी माह के अंत तक इसकी स्वीकृति दे दी जाए, तभी योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए तीन महीने बचेंगे। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने इस बाबत शीघ्र कारवाई करने का आश्वासन दिया।
बैठक के दौरान बिहार की दूसरी मुख्य समस्या के रूप में गाद प्रबंधन का मामला भी गंभीरता से उठाया गया। उप मुख्यमंत्री श्री चौधरी ने कहा कि अनियंत्रित गाद नदी तल पर जमा होने से नदियों की जल संधारण क्षमता लगातार घट रही है। साथ ही, बाढ़ की विकरालता भी बढ़ती है। गाद के कारण नदी तल लगातार ऊँचा उठ रहा है, जिससे हाल के दिनों में नदियों में नये उच्चतम जल बिन्दु (एच.एफ.एल.) बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि समय रहते गाद प्रबंधन नहीं किया गया तो नदियां मरणासन्न हो जाएंगी। बैठक में उन्होंने बताया कि देश में पहली बार बिहार में गाद प्रबंधन के साथ इसके व्यवसायिक उपयोग को जोड़ते हुए ‘‘बिहार जलस्रोत पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति 2026’’ बनायी गयी है। केन्द्र सरकार को भी राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति बनानी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री जलशक्ति मंत्रालय भारत सरकार श्री सी. आर. पाटिल की अध्यक्षता में आयोजित उक्त बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार श्री रामनाथ ठाकुर, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री श्री शुभेंदु अधिकारी, उत्तरप्रदेश के जल संसाधन मंत्री श्री स्वतंत्र देव सिंह, बिहार के जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह, केंद्रीय वित्त, रेलवे, सड़क परिवहन एवं उच्च पथ, ग्रामीण विकास कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, नीति आयोग, केंद्रीय जल आयोग, केंद्रीय जल संसाधन नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग तथा उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तराखण्ड, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों के प्रतिनिधिगण एवं संबंधित पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।





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