- औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती से बढ़ेगी किसानों की आय, बिहार में विकसित होगी एसेंशियल ऑयल की समेकित व्यवस्था
- बिहार में औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती का होगा विस्तार, किसानों को मिलेंगे आय के नए अवसर
- खेत से उद्योग तक किसानों की भागीदारी, औषधीय खेती से बढ़ेगी खुशहाली - विजय कुमार सिन्हा
पटना, 28 अक्टूबर। माननीय कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार में औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती को बढ़ावा देकर किसानों की आय में वृद्धि की अपार संभावनाएँ हैं। इसके लिए कृषि विभाग खेती से लेकर एसेंशियल ऑयल के उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता जांच, पैकेजिंग एवं विपणन तक की समेकित व्यवस्था विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ-साथ कृषि आधारित उद्योगों के विकास एवं रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उक्त बातें उन्होंने बुधवार को मीठापुर स्थित कृषि भवन में औषधीय एवं सुगंधित पौधों के क्षेत्र विस्तार एवं मूल्य संवर्धन हेतु आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहीं।
श्री सिन्हा ने कहा कि कृषि का विविधीकरण समय की आवश्यकता है। बिहार की कृषि-जलवायु परिस्थितियां तुलसी, लेमनग्रास और अन्य सुगंधित पौधों की खेती के अनुकूल हैं। इनकी वैज्ञानिक एवं बाजारोन्मुखी खेती और एसेंशियल ऑयल के उत्पादन से किसानों की आमदनी बढ़ सकती है। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, उन्नत किस्में, वैज्ञानिक तकनीक तथा उत्पादन क्षेत्रों के नजदीक आसवन एवं प्रसंस्करण सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है
कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार में लगभग 94 से 96 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत श्रेणी के हैं। ऐसे किसानों के लिए कम जमीन में अधिक आमदनी हासिल करना महत्वपूर्ण है। औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती से किसानों की आय बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और कृषि आधारित उद्यमिता के अवसर भी पैदा होंगे।
उन्होंने कहा कि किसानों को उत्पादन के साथ आसवन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता परीक्षण, मानकीकरण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन से भी जोड़ना होगा। इससे मूल्य संवर्धन में उनकी भागीदारी बढ़ेगी और उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। गुणवत्ता जांच के लिए प्रयोगशालाओं, मानकों और बाजार संपर्क को मजबूत किया जाएगा। कार्यशाला के सुझावों के आधार पर उपयुक्त फसलों की पहचान, उत्पादन क्लस्टरों के विकास, किसान प्रशिक्षण और प्रसंस्करण सुविधाओं के विस्तार की रणनीति तैयार होगी।
इस मौके पर उद्यान निदेशक श्री अभिषेक कुमार ने कहा कि बिहार में औषधीय एवं सुगंधित पौधों और उनसे उत्पादित तेल की संभावनाएं हैं, लेकिन किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। किसानों और उद्योग के बीच बिचौलियों की कई कड़ियां होने से उन्हें बाजार की जानकारी और गुणवत्ता संबंधी मार्गदर्शन भी सीमित मिलता है। एसेंशियल ऑयल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रतिनिधियों से संवाद के जरिए किसानों को उद्योग की जरूरतों, गुणवत्ता मानकों और बाजार की मांग समझने में मदद मिलेगी। इससे उन्हें गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, प्रशिक्षण और निर्यात संबंधी जानकारी भी मिल सकेगी।
कार्यशाला में विभाग के विशेष सचिव डॉ. बीरेंद्र प्रसाद यादव, एसेंशियल ऑयल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एवं महासचिव, विभागीय वरीय पदाधिकारी, सभी जिलों के उद्यान पदाधिकारी और औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती करने वाले किसान शामिल हुए। प्रत्येक जिले से तीन किसानों को आमंत्रित किया गया था। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, बिहार कृषि विश्वविद्यालय और इस्लामपुर स्थित औषधीय एवं सुगंधित पौधों से संबंधित अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के कृषि वैज्ञानिक भी उपस्थित थे।


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