दो दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने शहरीकरण की चुनौतियों से निपटने के उपायों और तकनीकी समाधान की दी जानकारी






  • तकनीक, जनभागीदारी और वैकल्पिक वित्तीय संसाधनों से मजबूत होगा बिहार का शहरी नियोजन” - नितीश मिश्रा।        
  • दो दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने शहरीकरण की चुनौतियों से निपटने के उपायों और तकनीकी समाधान की दी जानकारी।

                  

पटना, 03 सितंबर। 

नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री श्री नीतीश मिश्रा ने बताया कि अधिवेशन भवन के सभागार में ‘“सस्टेनेबल प्लानिंग फॉर टाउन्स इन बिहार : अंडरस्टैंडिंग द प्रोसेस एंड एड्रेसिंग द चैलेंजेज" विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया , जिसके द्वितीय दिवस में सिटी इकोनॉमिक रीजन के लिए स्थानिक नियोजन (Spatial Planning) की रूपरेखा, अर्बन क्रेडिट फ्रेमवर्क (UCF) एवं मास्टर प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन में HUDCO की भूमिका, UCF का परिचय तथा वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में HUDCO की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही, मास्टर प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन, उसके प्रावधानों के अनुपालन एवं प्रवर्तन की व्यवस्था से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।

श्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी का विज़न बिहार के शहरों को आधुनिक, सुव्यवस्थित और आर्थिक गतिविधियों के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करने का है। इसी विज़न के अनुरूप शहरी नियोजन को दीर्घकालिक दृष्टिकोण, स्थानीय जरूरतों, मजबूत आधारभूत संरचना, तकनीकी नवाचार और जनभागीदारी से जोड़ते हुए शहरों के समग्र एवं संतुलित विकास को गति दी जा रही है।

श्री मिश्रा ने कहा कि शहरों के विकास के लिए स्थानीय लोगों के सुझाव, जरूरतों और सहभागिता को प्रमुखता दी जाएगी, ताकि तैयार विकास योजनाएं शहर की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप हों और उनका क्रियान्वयन भी अधिक प्रभावी तरीके से सुनिश्चित किया जा सके।


मंत्री ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच शहरों की भौगोलिक स्थिति, आबादी, आर्थिक गतिविधियों, आधारभूत संरचना और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग मास्टर प्लान तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। एक शहर का मास्टर प्लान दूसरे शहर पर हूबहू लागू नहीं किया जा सकता। स्थानीय जरूरतों और जमीनी हकीकत के अनुरूप योजनाओं को कस्टमाइज करने के साथ उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी उतना ही ध्यान देना होगा।

     
श्री मिश्रा ने कहा कि किसी शहर की भौगोलिक स्थिति, आबादी, आर्थिक गतिविधियां, उपलब्ध आधारभूत संरचना और भविष्य के विस्तार की संभावनाओं को ध्यान में रखकर ही उसकी विकास योजना तैयार की जानी चाहिए। शहरी विकास को केवल सड़क, स्ट्रीट लाइट और साफ-सफाई तक सीमित नहीं रखा जा सकता। बदलते शहरी परिदृश्य में नगर निकायों का वित्तीय रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर होना भी जरूरी है। इसके लिए नगर निकायों को अपनी परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग करते हुए एसेट मोनेटाइजेशन की दिशा में काम करना होगा। 

कार्यशाला में हडको के एग्जिक्युटिव डायरेक्टर डॉ. अक्षय सेन ने अर्बन चैलेंज फंड की जानकारी साझा की। उन्होंने शहरी परियोजनाओं के लिए वैकल्पिक वित्तीय संसाधनों और आधुनिक वित्तीय मॉडल अपनाने की जरूरत बताई। भविष्य के शहरों की परियोजनाओं में केवल निर्माण लागत नहीं, बल्कि उनकी वित्तीय व्यवहार्यता और दीर्घकालिक संचालन को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

जीआईएस के माध्यम से जमीन, सड़क, जल निकासी, आबादी, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य शहरी आधारभूत संरचनाओं से जुड़े स्थान आधारित आंकड़ों को एकीकृत कर उनका विश्लेषण किया जा सकता है। इससे शहर की मौजूदा स्थिति, भविष्य के विस्तार और विभिन्न क्षेत्रों में आवश्यक सुविधाओं का बेहतर आकलन संभव होगा। कार्यशाला में जीआईएस के साथ डेटा इंटीग्रेशन, रडार, अमृत 2.0 और एनयूडीएम जैसे तकनीकी हस्तक्षेपों के प्रभावी इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया।

    इस कार्यशाला में विभाग के अपर सचिव, श्री मनोज कुमार, हडको की कार्यकारी निदेशक वर्षा पुन्हानी, राज्य के विभिन्न नगर निकायों के अधिकारी, सिटी प्लानर सहित विभाग के वरीय पदाधिकारीगण मौजूद थे।

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