- बिहार SDG कॉन्क्लेव-2026 का समापन
- SDGs को जिला योजना एवं योजनाओं के क्रियान्वयन से जोड़कर विकसित बिहार @2047 की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर
पटना, 21 अगस्त 2026। बिहार में सतत एवं समावेशी विकास को गति देने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय बिहार SDG कॉन्क्लेव-2026 का आज अधिवेशन भवन, पटना में समापन हुआ। “Accelerating Progress Towards Viksit Bihar @2047” विषय पर आयोजित कॉन्क्लेव में आर्थिक परिवर्तन, समावेशी विकास, जिला आधारित योजना, SDGs के स्थानीयकरण तथा विकसित बिहार @2047 की प्राथमिकताओं पर मंथन हुआ।
मुख्य बिंदु
- बिहार का SDG Composite Score 2018-19 के 48 से बढ़कर 2023-24 में 57 हुआ।
- 162 indicators में से 116 यानी 72% में सुधार दर्ज।
- बहुआयामी गरीबी में 18.13 प्रतिशत अंकों की कमी, लगभग 2.25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर।
- SDG-6 में 98 अंक के साथ देश में तीसरा स्थान।
- SDG-9 में 29 अंकों का सुधार।
- 38 जिलों के लिए 86 indicators और 13 SDGs आधारित District SDG Index तैयार।
समय के अनुरूप तकनीक और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर : माननीय उपमुख्यमंत्री
समापन सत्र को संबोधित करते हुए माननीय उपमुख्यमंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बिहार की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य ने वित्तीय क्षेत्र में अच्छा कार्य किया है, लेकिन विकास के लिए संसाधनों के अपव्यय को नियंत्रित करना और प्रत्येक व्यय को परिणामदायी बनाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि “वक्त के साथ जरूरत बदलती है”, इसलिए समय और तकनीक के साथ स्वयं को बदलना होगा। विकास एक सतत प्रक्रिया है और इसके लिए उचित व्यय, नई तकनीक तथा बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यप्रणाली जरूरी है।
उन्होंने बताया कि बिहार मौसम सेवा केंद्रों के क्षेत्र में अग्रणी है तथा पंचायत स्तर तक मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा—“ज्ञान, विज्ञान और ईमान से काम करें, फिर हम सम्मान की अपेक्षा करें।”
SDGs को जिला योजना और योजनाओं के Implementation Framework से जोड़ना जरूरी : अपर मुख्य सचिव
अपर मुख्य सचिव, योजना एवं विकास विभाग डॉ. एन. विजयालक्ष्मी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कॉन्क्लेव में विकास के सभी प्रमुख क्षेत्रों पर व्यापक चर्चा हुई।
उन्होंने कहा कि कॉन्क्लेव का महत्वपूर्ण परिणाम SDGs को District Planning Framework से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ना है। बिहार कुछ indicators में Front Runner है, जबकि कुछ में अभी कमी है। इसलिए हर indicator पर निरंतर काम करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि SDGs कोई अलग या बाहरी विषय नहीं हैं, बल्कि हम प्रतिदिन जो विकास कार्य करते हैं, वही SDGs की दिशा में किए जा रहे कार्य हैं। आवश्यकता है कि विभिन्न योजनाओं के Implementation Framework में SDG focus को शामिल किया जाए और परिणामों को indicators के माध्यम से मापा जाए।
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि “बिहार को छोड़कर भारत आगे नहीं बढ़ सकता; भारत का विकास बिहार के विकास से ही संभव है।”
जिला आधारित विकास को मिली नई दिशा
कॉन्क्लेव में जिला स्तर पर SDG अनुश्रवण को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। योजना एवं विकास विभाग द्वारा 38 जिलों का 86 indicators के आधार पर विश्लेषण एवं ranking की गई है, जिससे जिलों की strengths और priority gaps की पहचान कर evidence-based planning को बढ़ावा दिया जा सकेगा।
जिलाधिकारी, पटना श्री कुंदन कुमार और जिलाधिकारी, मधुबनी श्री आनंद शर्मा ने जिला आधारित विकास एवं Integrated District Planning के अनुभव साझा किए। पंचायती राज विभाग के सचिव श्री मनोज कुमार तथा डॉ. एस. सिद्धार्थ ने भी SDG localization एवं तकनीक के उपयोग पर विचार रखे।
कॉन्क्लेव में नीति आयोग के सदस्य डॉ. के. वी. राजू, वित्त विभाग की सचिव श्रीमती रचना पाटिल, यूनिसेफ की प्रतिनिधि सुश्री क्रिस्टिना पोपिवानोवा सहित केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ एवं विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
विकसित बिहार @2047 के लिए साझा कार्यदृष्टि
समापन पर यह स्पष्ट किया गया कि SDG 2030 को विकसित बिहार @2047 की विकास यात्रा से जोड़ते हुए जिला योजना, विभागीय अभिसरण, प्रभावी संसाधन उपयोग, तकनीक और परिणाम आधारित अनुश्रवण को मजबूत करना होगा। कॉन्क्लेव से प्राप्त सुझावों के आधार पर आगे की कार्यनीति को और सुदृढ़ किया जाएगा।





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