बिहार शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा बिहार दिवस के अवसर पर पटना के गांधी मैदान में लोक पंच की प्रस्तुति बेटी पढ़े समाज बढ़े नाटक का हुआ मंचन।




पटना। बिहार दिवस के अवसर पर आज दिनांक 24 मार्च 2026 को बिहार शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा बिहार दिवस के अवसर पर पटना के गांधी मैदान में लोक पंच की प्रस्तुति "बेटी पढ़े समाज बढ़े" नाटक का मंचन हुआ। 

कथासार "बेटी पढ़े समाज बढ़े" अभिभावकों द्वारा लड़के लड़कियों में असमानता रखने वाले दृष्टिकोंण को दर्शाता है। यह दिखाता है कि कैसे मां-बाप अपनी बेटियों को पढ़ाने लिखाने के बजाय उनकी शादी - ब्याह करके अपनी जिम्मेदारियों से पीछा छुड़ाने में लगे रहते है।




नाटक मे दिखाया गया है कि अगर लड़कियों को सही ढंग से शिक्षा-दीक्षा और मार्गदर्शन मिले तो वह समाज में एक मिसाल कायम कर सकती हैं। इस नाटक में बताया गया है कि मुनिया जो बच्ची यानी नाबालिग है, वह अपने माता-पिता से अनुरोध करती है कि अभी उसका ब्याह ना करें तथा पढ्नेः लिखने की इजाजत दें, फिर भी मुनिया को शादी के मंडप पर बैठा दिया जाता है। महिला शिक्षा तथ नारी सशक्तिकरण इस नाटक का मुख्य उद्देश्य है।




नाटक का लेखन नीरू कुमारी ने किया है। यह नाटक उन लोगों पर कटाक्ष करता है, जो लिंगभेद करते हैं, बेटे को बेटी से श्रेयस्कर मानते हैं और बेटी के साथ पक्षपात करते हैं। इस नाटक में विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से यह समझाने की कोशिश की गई है कि नारी की उपयोगिता नर से कतई कम नहीं है, बल्कि उससे कहीं अधिक है, क्योंकि वह जन्म देने का काम करती है, वंश को आगे बढ़ाने का काम करती है और मानवजाति को कायम रखने के लिए अनिवार्य तत्व है। बेटियों के अंदर भी इच्छाएँ होती है कि वे पढ़-लिखकर आगे बढ़े, अपने माता पिता और परिवार का मान रोशन करे और एक सफल जीवन जिए। परंतु वास्तविक जीवन में अभिभावक बेटियों को बस नाममात्र का पढ़ाना चाहते है और घर के काम काज सिखाने में अधिक तत्पर रहते हैं, ताकि उनकी शादी में बाधा न आए। लोगों का सदियों से यह मानना है कि बेटा वंश को बढ़ाता है, चिता में आग देता है और बुढ़ापे में माता- पिता की सेवा करता है, परंतु आज के परिपेक्ष्य में यह बात गलत मालूम पड़ती है, जब बेटे माँ बाप को छोड़कर अपनी पत्नियों के साथ दूसरे शहर में बस जाते है। कई बेटे तो अपने माँ- बाप का अपमान करते हैं, उन्हें प्रताड़ित करते है और घर से निकाल तक देते हैं। जबकि बेटियाँ माँ बाप का हाल चाल लेती है, गाहे बगाहे उनकी मदद करती है और अंत तक उनकी सेवा को प्रस्तुत रहती है। प्रस्तुत नाटक इन सच्चाईयों से रू-ब-रू कराने का एक प्रयास है।




कलाकार
रजनीश पांडे, रोहित कुमार, अरबिंद कुमार, दीपा दीक्षित, सोनल कुमारी, अजीत कुमार, हर्ष दीप, नीलम, राम प्रवेश, अभिषेक राज एवं मनीष महिवाल।
लेखक : नीरू कुमारी 
निर्देशक : मनीष महिवाल 
प्रस्तुति : लोक पंच , पटना



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