संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली और कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के सौजन्य से प्रयास पटना द्वारा आयोजित (18 से 22 फरवरी 2026) 13वीं राष्ट्रीय प्रयास नाट्य मेला गाँधी मैदान, मखदुमपुर जिला जहानाबाद में हो रहा है।
13वीं राष्ट्रीय प्रयास नाट्य मेला के तृतीय संध्या के अवसर पर माननीय विधायक मखदुमपुर के श्री सुबेदार दारा को श्री मिथिलेश सिंह, 'निर्देशक, प्रयास रंगमंडल, पटना', श्री दीपक कुमार 'अध्यक्ष हिन्दी साहित्य भारती, जहानाबाद सह सदस्य नाट्य मेला आयोजक मंडल', श्री विवेक कुमार 'घर संसार प्रतिष्ठान सह नाट्य मेला आयोजक मंडल' द्वारा पुष्प-गुच्छ एवं अंग-वस्त्र देकर अभिनन्दन किया गया।
श्री सुबेदार दास जी ने अपनी अभिनन्दन समारोह में रंगमंच के विकास हेतु सम्भावनाये जताई एवं रंगमंच के उत्थान हेतु सहयोग देने की बात कही। नाट्य मेला की तृतीय संध्या (मुख्य मंच) 7 बजे, प्रवीण सांस्कृतिक मंच, पटना (बिहार), द्वारा भिखारी ठाकुर लिखित एवं विज्येन्द्र कुमार टॉक निर्देशित नाटक 'गबरधिचोर' का मंचन किया गया। 13वीं राष्ट्रीय प्रयास नाट्य मेला के तृतीय संध्या के प्रथम सत्र (नुक्कड़ मंच) अपराह्न 5:00 बजे 'रंगओला फाउडेशन, पालीगंज (बिहार), द्वारा मगही लोकगीत रजनीकांत एवं उनके साथी द्वारा प्रस्तुत किया गया। मगही लोकगीत के उपरांत श्रीकांत ब्यास लिखित एवं शिवचंद्र प्रसाद गुप्ता निर्देशित "उच्च विद्यालय, सोनवां, (घोषी), जहानाबाद की नुक्कड़ नाटक "मैं बिहार हूँ) की प्रस्तुति हुई। नुक्कड़ प्रस्तुति के बाद मुख्य मंच पर बैजू बंशी द्वारा 'सेक्सओफोन प्लेयर' प्रस्तुत किया गया। मंच का संचालन दीपक आनंद कर रहे थे। इसकी जानकारी नाट्य मेला आयोजक मिथिलेश सिंह मो. नं. 9334042496 ने दी।
प्रवीण सांस्कृतिक मंच, पटना (बिहार) की प्रस्तुति 'गबरधिचोर' का सारांश
शादी-गवना के बाद अपनी बेरोजगारी से घबराकर काम-धंधा करके कमाने के उद्देश्य से महानगरों या औद्योगिक स्थलों पर चले जाते है। किसी अन्य कारण से अपना कर्तव्य मुलकर अपनी ग्रामीण पत्नी को भी भुल जाते है। वैसा ही एक ग्रामीण युवक जो ऐसे गंदे विचारों का बन गया है, वह है गलीज। इधर गाँव में अकेली पड़ी जवान महिला पति के घर आने की प्रतीक्षा में जी रही है। जब से गाँव में शहरी हवा गई है और ताडी चारू शराब आदि का प्रवेश हुआ है. गाँव के चे परंपरागत संबंध चरमरा गए हैं। 'बहन भाभी, चाची, वादी मानी जाने वाली महिलाएँ भी अब सामान्य नारी और भाग्या बन कर रह गई है। नारी की थोडी सी भी कमजोरी का लाभ गेरो युवक उठाने में नहीं चूकते। ऐसी ही विवश नारी है गलीज बहू, जिसका पति गलीज पंद्रह वर्ष पहले गाँव छोडकर क्रमाने जाता है और पानी उपेक्षित गाँव में उसके पति नाम के साथ विपति में फँसी है औरगाँय से ही एक मनचले युवक के साथ उत्तका अवैध संबंध हो जाता है। वह नारी इस परिस्थिति में भी स्वयं को नैतिक रूप से कमजोर नहीं मानती। जब इस गड़बड़ी से गड़बड़ होकर उसे पुत्र को जन्म देने का सौभाग्य मिलता है, तो यह अपने मातृत्व की गरिमा को समझती है और सनाज की सारी लानतों के बावजूद यह अपने पुत्र का बड़े प्यार से लालन पालन करती है, गले ही समाज उसके पुत्र को गबरघिचोर ही क्यों न कहें। गबरपिचोर पंद्रह वर्षों का हो गया। वह अपनी मों के साथ सुच्वपूर्वक रह रहा था। इस बीच गाँव का कोई व्यक्ति परदेश गया और वहीं वह अचानक गलीज से मिल गया......
पात्र परिचय (मंच पर)
गबरघिचोर : सुशांत कुमार
गलीज : कुमार स्पर्श
गडबडी : राहुल रंजन
पंच : इंद्रदीप चंद्रवंशी
गलीज बो : प्रतिमा कुमारी
कसाई : सोनू कुमार
कोरस : आदित्य यादव, प्रिंस कुमार, अपराजिता मिश्रा, निशा कुमारी, नंदन कुमार, तान्या कुमारी
*मंच के परे*
प्रकाश : विनय चौहान
रूप सज्जा : जितेन्द्र जीतू
वस्त्र : राखी लोहिया
मंच : सुनील कुमार
संगीत निर्देशक : संजय उपाध्याय
संगीत संयोजन : रोहित चन्द्रा
ढोलक : गौरव पाण्डेय
बैंजु : दीपक कमार
झाल : लाल बाबु
लेखक : भिखारी ठाकुर
निर्देशक : विजयेन्द्र कुमार टॉक
प्रस्तुति : प्रवीण सांस्कृतिक मंच, पटना (बिहार)





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