न्यूज़ डेस्क। मानव अधिकारों , आदिवासी और वंचित समाज के लोगों के अधिकारों को लेकर हमेशा संघर्ष करने वाले 84 वर्षीय फादर स्टेन स्वामी की हुई न्यायिक हिरासत में मौत के विरोध में आज पटना के डाकबंगला चौराहा पर हाथों में तख्तियां लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया।इन लोगों का कहना है कि स्वामी की मौत नहीं हत्या है, यह लोग एनआईए के अफसरों पर करवाई की मांग कर रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त की प्रवक्ता लिज थ्रोस्सेल ने एक बयान में कहा कि फादर स्टेन को गिरफ्तारी के बाद से बगैर जमानत के सुनवाई-पूर्व हिरासत में रखा गया,2018 में हुए प्रदशनों को लेकर आतंकवाद से जुड़े आरोप लगाए गए। प्रवक्ता ने कहा कि स्वामी मुख्य रूप से आदिवासियों और हाशिए पर मौजूद अन्य समुदायों के अधिकारों के समर्थक थे। उन्होंने कहा कि उच्चायुक्त ने मानवाधिकार उल्लंघन करने के सिलसिले में यूएपीए के इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई है, एक ऐसा कानून जिसे फादर स्टेन स्वामी ने मरने से पहले भारतीय अदालत में चुनौती दी थी।
बता दें कि पांच जुलाई को स्टेन स्वामी का एक अस्पताल में निधन हो गया। स्वामी का जिस अस्पताल में उपचार चल रहा था, उसके एक अधिकारी ने बॉम्बे हाईकोर्ट को सोमवार को इस बारे में बताया था। वह मामले में चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत मिलने का इंतजार कर रहे थे। स्टेन स्वामी के मित्रों और परिजनों ने उनकी मौत को संस्थागत हत्या करार दिया है।
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