- गया की मिट्टी का एक और सितारा दुबई में चमकेगा, शबी आफ़रीन शम्सी को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय TIAF Education Award 2026
- 21 नवंबर को दुबई के अंतरराष्ट्रीय मंच पर बिहार का बढ़ेगा मान, शिक्षा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में योगदान को मिलेगा सम्मान
मेरे क़लम से — सैयद आसिफ़ इमाम काकवी
पटना : कुछ कामयाबियाँ केवल किसी एक इंसान की ज़िंदगी में ख़ुशी नहीं लातीं, बल्कि पूरे शहर, समाज और प्रदेश के सीने को गर्व से चौड़ा कर देती हैं। कुछ नाम ऐसे होते हैं जो अपनी पहचान किसी बड़े ओहदे या शोहरत से नहीं, बल्कि अपने इल्मी सफ़र, सामाजिक ज़िम्मेदारियों और ख़िदमत के जज़्बे से बनाते हैं। जब ऐसे लोगों को अपनी सरज़मीन से दूर किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मान मिलता है, तो उस सम्मान की ख़ुशी उनके परिवार तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उनके शहर की गलियों, उनके प्रदेश की मिट्टी और उनसे उम्मीद रखने वाले हर शख़्स तक पहुँचती है।
गया की ऐतिहासिक और इल्मी सरज़मीन से ताल्लुक़ रखने वाली शबी आफ़रीन शम्सी की कामयाबी आज कुछ ऐसा ही एहसास पैदा कर रही है। आगामी 21 नवंबर 2026 को दुबई में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड्स समिट में उन्हें प्रतिष्ठित ‘TIAF Education Award 2026’ से सम्मानित किया जाना निर्धारित है। यह ख़बर गया ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार के लिए ख़ुशी और फ़ख़्र का मौक़ा है। बिहार की धरती से निकली एक शख़्सियत जब सात समंदर पार अपनी पहचान के साथ सम्मानित होगी, तो यक़ीनन उसकी गूँज अपने वतन तक पहुँचेगी।
गया केवल इतिहास और धार्मिक पर्यटन का केंद्र नहीं है, बल्कि यह इल्म, तहज़ीब, अदब, रूहानियत और साझा विरासत की भी सरज़मीन है। इसी मिट्टी से जुड़ी शबी आफ़रीन शम्सी ने अपने सार्वजनिक और तालीमी सफ़र में जो पहचान बनाई है, वह क़ाबिले-ज़िक्र है। मगध विश्वविद्यालय की सीनेट सदस्य और मिर्ज़ा ग़ालिब कॉलेज, गया की पूर्व सचिव के रूप में उनकी ज़िम्मेदारियाँ उनके शैक्षणिक और प्रशासनिक अनुभव को दर्शाती हैं। उनकी शख़्सियत का एक अहम पहलू यह भी है कि वे महाबोधि मंदिर प्रबंधन समिति की सदस्य रही हैं। यह पहलू गया की उस ख़ूबसूरत गंगा-जमुनी तहज़ीब की याद दिलाता है, जहाँ अलग-अलग मज़हबों और संस्कृतियों के लोग आपसी सम्मान, मोहब्बत और भाईचारे के साथ अपनी पहचान साझा करते हैं।
आज जब समाज में अक्सर छोटी-छोटी बातों पर दूरियाँ पैदा करने की कोशिश होती है, तब ऐसी शख़्सियतों की मौजूदगी हमें याद दिलाती है कि इंसान की असल पहचान उसका किरदार, उसकी सोच और समाज के लिए उसका योगदान होता है। गया की पहचान बोधगया की रूहानियत, सूफ़ी परंपरा, ऐतिहासिक विरासत और आपसी सद्भाव से है। इस विरासत को आगे बढ़ाने में शिक्षा और सामाजिक सहभागिता की भूमिका बेहद अहम है।
शबी आफ़रीन शम्सी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान मिल चुके हैं। पूर्व राष्ट्रपति, पूर्व प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और विभिन्न धर्मगुरुओं से मुलाक़ात के अवसर भी उनके सार्वजनिक जीवन का हिस्सा रहे हैं। लगातार तीन बार ‘बिहार सिटिजन फर्स्ट’ जैसे सम्मान से नवाज़ा जाना भी उनकी उपलब्धियों में शामिल है। लेकिन मेरा मानना है कि किसी भी शख़्सियत की उपलब्धियों का असल मूल्य केवल पुरस्कारों की संख्या से तय नहीं होता। असली उपलब्धि यह है कि उसके अनुभव और काम से समाज को क्या मिला, कितने लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली और आने वाली नस्लों के लिए कितने नए रास्ते खुले।
अब उनके सफ़र में दुबई का एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। द इंटरनेशनल अवॉर्ड्स फ़ोरम (TIAF), इंडिया, एसोसिएटेड विद TIAF USA की ओर से आयोजित इंटरनेशनल अवॉर्ड्स समिट-2026 में उन्हें ‘TIAF Education Award’ प्रदान किया जाना निर्धारित है। यह समारोह 21 नवंबर, शनिवार को शाम पाँच बजे सेवन सीज़ होटल, दुबई एयरपोर्ट, संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित होगा।
ज़रा उस पल की कल्पना कीजिए, जब दुबई के अंतरराष्ट्रीय मंच पर गया की इस बेटी का नाम सम्मान के साथ पुकारा जाएगा। वह पल केवल एक पुरस्कार ग्रहण करने का पल नहीं होगा, बल्कि उस मिट्टी की पहचान का पल होगा जिसने अपनी गोद में ऐसे लोगों को पाला है जो अपनी मेहनत और क़ाबिलियत से देश-दुनिया में अपनी जगह बना रहे हैं। यह गया के लिए सम्मान होगा, बिहार के लिए ख़ुशी होगी और उन तमाम परिवारों के लिए उम्मीद का पैग़ाम होगा जो अपने बच्चों को बेहतर तालीम देकर उन्हें दुनिया में आगे बढ़ते देखना चाहते हैं।
मैं ख़ास तौर पर अपने समाज के नौजवानों और अभिभावकों से कहना चाहता हूँ कि बच्चों के सामने कामयाबी के केवल क़िस्से मत रखिए, बल्कि उन्हें कामयाबी तक पहुँचने का रास्ता भी दिखाइए। उनके हाथों में मोबाइल के साथ किताबें भी दीजिए, उनके सपनों को केवल नौकरी तक सीमित मत रखिए और उन्हें शिक्षा, प्रशासन, विज्ञान, तकनीक, शोध और सामाजिक सेवा के मैदान में आगे बढ़ने का हौसला दीजिए। किसी समाज की तरक़्क़ी तब होती है जब उसकी बेटियों और बेटों दोनों को आगे बढ़ने के बराबर अवसर मिलते हैं।
विशेष रूप से बेटियों की शिक्षा और सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देना आज की सबसे बड़ी ज़रूरतों में से एक है। जब कोई महिला शिक्षा, प्रशासन और सार्वजनिक जीवन में अपनी पहचान बनाती है, तो वह केवल अपनी मंज़िल हासिल नहीं करती, बल्कि सैकड़ों दूसरी बेटियों के लिए भी उम्मीद का दरवाज़ा खोलती है। उसकी उपलब्धि उन अभिभावकों के लिए भी एक संदेश होती है जो अपनी बेटियों को ऊँचे सपने देखने और उन्हें पूरा करने का अवसर देना चाहते हैं।
हमारे समाज को ऐसे शैक्षणिक संस्थानों, पुस्तकालयों और मार्गदर्शन केंद्रों की ज़रूरत है जहाँ प्रतिभा को जाति, धर्म, भाषा और आर्थिक हैसियत की सीमाओं से ऊपर उठकर अवसर मिले। हमें ऐसे माहौल का निर्माण करना होगा जहाँ सम्मान केवल प्रभावशाली लोगों को नहीं, बल्कि मेहनत, ईमानदारी और ज्ञान के रास्ते पर चलने वालों को भी मिले।
शबी आफ़रीन शम्सी का दुबई में प्रस्तावित सम्मान इसी दिशा में एक सकारात्मक प्रेरणा बन सकता है। मेरी नज़र में किसी भी पुरस्कार की सबसे बड़ी ख़ूबसूरती यह है कि वह इंसान को अपनी ज़िम्मेदारियों का एहसास और गहरा करा दे। सम्मान की चमक कुछ समय तक रहती है, लेकिन शिक्षा और इंसानियत की ख़िदमत से पैदा होने वाली रौशनी पीढ़ियों तक पहुँचती है।
मैं दिल की गहराइयों से शबी आफ़रीन शम्सी को इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान के लिए मुबारकबाद पेश करता हूँ। उम्मीद करता हूँ कि दुबई का यह सम्मान उनके तालीमी और सामाजिक सफ़र में एक नया हौसला, नई ऊर्जा और नई ज़िम्मेदारियाँ लेकर आएगा। साथ ही गया और बिहार की दूसरी प्रतिभाओं को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की प्रेरणा मिलेगी।
आख़िर में बस इतना कहना चाहूँगा कि किसी शहर की महानता उसकी ऊँची इमारतों से नहीं, बल्कि उन ऊँचे किरदारों से पहचानी जाती है जिन्हें वह दुनिया के सामने पेश करता है। गया की मिट्टी से जुड़ा यह नाम जब दुबई के मंच पर सम्मान पाएगा, तो हम सबके दिलों में गर्व का एक नया एहसास पैदा होगा।
क्योंकि सितारे आसमान में ही नहीं चमकते, कुछ सितारे अपनी मेहनत, अपने इल्म और अपने किरदार से अपनी मिट्टी का नाम भी पूरी दुनिया में रोशन करते हैं। गया की मिट्टी का यह सितारा भी अब दुबई के अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी चमक बिखेरने जा रहा है।
सैयद आसिफ़ इमाम काकवी
पत्रकार एवं स्तंभकार | Co-Founder — Bharat24 News Network




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