जीविका और जे-पाल साउथ एशिया के संयुक्त प्रयासों से सतत् जीविकोपार्जन योजना के प्रभाव, मूल्यांकन और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय महत्व पर हुआ विमर्श।




• बिहार से भारत तक: सतत जीविकोपार्जन योजना के साक्ष्य और अनुभवों से ग्रामीण विकास को मिलेगी नई दिशा

• जीविका और जे-पाल साउथ एशिया के संयुक्त प्रयासों से सतत् जीविकोपार्जन योजना के प्रभाव, मूल्यांकन और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय महत्व पर हुआ विमर्श। 


पटना, 16 अक्टूबर 2026। जे-पाल साउथ एशिया द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में श्री रोहित कंसल, सचिव, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार, श्री अरविंद कुमार चौधरी, मंत्रिमंडल सचिवालय विकास विभाग, बिहार सरकार, श्री एच आर श्रीनिवास, अपर मुख्य सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार, डॉ एन विजयलक्ष्मी, अपर मुख्य सचिव, योजना एवं विकास विभाग, बिहार सरकार, श्री बाला मुरुगन डी, संयुक्त सचिव, कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय, भारत सरकार, श्री राहुल कुमार, प्रबंध निदेशक, NBPDCL, श्री हिमांशु शर्मा, मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जीविका, श्रीमती अनन्या सिंह, अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, डॉ. मोनिका, उप सचिव, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के साथ-साथ बिहार सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, जीविका के प्रतिनिधियों, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों तथा डेवलपमेंट क्षेत्र से जुड़े संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।





कार्यक्रम का उद्देश्य सतत् जीविकोपार्जन योजना के क्रियान्वयन, उसके मूल्यांकन से प्राप्त निष्कर्षों और पिछले एक दशक के अनुभवों पर विचार-विमर्श करना था। साथ ही, इस कार्यक्रम में यह समझने पर जोर दिया गया कि अत्यंत गरीब परिवारों के लिए तैयार की गई आजीविका संबंधी योजनाओं को किस प्रकार साक्ष्य-आधारित नीतियों, प्रभावी क्रियान्वयन और निरंतर सीखने की प्रक्रिया के माध्यम से अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है। कार्यक्रम ने बिहार में विकसित आजीविका मॉडल के राष्ट्रीय और वैश्विक महत्व पर विचार करने के लिए एक साझा मंच प्रदान किया।

कार्यक्रम की शुरुआत जे-पाल साउथ एशिया की कार्यकारी निदेशक शोभिनी मुखर्जी के उद्घाटन संबोधन से हुई। उन्होंने सतत् जीविकोपार्जन योजना, इसके मूल्यांकन और ज्ञान एवं इस योजना से प्राप्त सीख के क्षेत्र में जे-पाल साउथ एशिया की भूमिका पर विचार प्रस्तुत किए। 




इसके बाद जीविका की अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी श्रीमती अनन्या सिंह ने सतत जीविकोपार्जन योजना योजना के मॉडल, इसकी कार्यप्रणाली और अब तक की उपलब्धियों पर प्रस्तुति दी। इस अवसर पर सतत जीविकोपार्जन योजना पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई, जिसके माध्यम से कार्यक्रम के प्रतिभागियों को योजना की अवधारणा और उसके क्रियान्वयन की जानकारी दी गई।

तत्पश्चात, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार के अपर मुख्य सचिव श्री एच. आर. श्रीनिवास ने ग्रामीण विकास में सतत जीविकोपार्जन योजना के महत्व पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का एक प्रमुख सत्र सतत जीविकोपार्जन योजना के मूल्यांकन पर केंद्रित रहा। इस सत्र में डॉ. एम. आर. शरण, डॉ. ज्योति मुखोपाध्याय और डॉ. शगुन सबरवाल ने योजना के मूल्यांकन से प्राप्त परिणामों और अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की। प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को योजना के प्रभाव, क्रियान्वयन और उससे प्राप्त सीख को समझने का अवसर मिला। इस चर्चा का प्रमुख उद्देश्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह समझ विकसित करना था कि अत्यंत गरीब परिवारों की जरूरतों के अनुरूप योजनाओं की संरचना और क्रियान्वयन को किस प्रकार बेहतर बनाया जा सकता है।





योजना के दीर्घकालिक प्रभाव को सुनिश्चित करने के लिए अपनाए गए नीतिगत विकल्पों पर आयोजित सत्र में बिहार सरकार के अपर मुख्य सचिव श्री अरविंद कुमार चौधरी ने विचार रखे। इसके बाद योजना के निर्माण, विस्तार और निरंतर सुधार में नेतृत्व की भूमिका पर चर्चा हुई। श्री बालामुरुगन डी., संयुक्त सचिव, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय, भारत सरकार, एनबीपीडीसीएल के प्रबंध निदेशक श्री राहुल कुमार तथा जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी श्री हिमांशु शर्मा ने इस विमर्श में भाग लिया। इस सत्र की अध्यक्षता श्री अरविंद कुमार चौधरी ने की।

सतत जीविकोपार्जन योजना की पिछले एक दशक की यात्रा, प्रमुख उपलब्धियों और महत्वपूर्ण पड़ावों पर आयोजित एक अन्य विशेष सत्र में जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी श्री हिमांशु शर्मा, को-इम्पैक्ट की डॉ. शगुन सबरवाल, बंधन-कोन्नगर से श्री संजीब कुमार दास तथा गेट्स फाउंडेशन के श्री सुधांशु शर्मा ने अपने विचार साझा किए। जे-पाल साउथ एशिया की कार्यकारी निदेशक शोभिनी मुखर्जी ने सत्र का संचालन किया। इस सत्र में योजना की विकास यात्रा, विभिन्न संस्थाओं के योगदान तथा अनुभवों से मिली सीख पर चर्चा की गई।




कार्यक्रम में समावेशी आजीविका के राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य और समावेशी आजीविका योजना (समावेशी आजीविका योजना—एसएवाई) पर भी विशेष चर्चा हुई। ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार की उप सचिव डॉ. मोनिका, ने इस विषय पर संबोधन दिया। इसके बाद मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) की प्रोफेसर एवं जे-पाल की सह-संस्थापक तथा नोबल पुरस्कार से सम्मानित प्रोफेसर एस्थर डुफ्लो ने अत्यधिक निर्धनताउन्मूलन और ग्रेजुएशन अप्रोच की भूमिका पर वैश्विक दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया। तत्पश्चात की-नोट स्पीच में ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव श्री रोहित कंसल ने ग्रामीण विकास में नवाचार और समाधान विकसित करने के लिए साक्ष्य के उपयोग पर मुख्य संबोधन दिया।

इस कार्यक्रम ने सतत जीविकोपार्जन योजना के अनुभवों को व्यापक विकास विमर्श से जोड़ने और साक्ष्य-आधारित नीतिगत निर्णयों की आवश्यकता को रेखांकित करने का अवसर प्रदान किया। योजना के मूल्यांकन, संस्थागत नेतृत्व, नवाचार और विभिन्न साझेदारों के सहयोग से प्राप्त सीख को साझा करना भविष्य में ग्रामीण आजीविका कार्यक्रमों की प्रभावशीलता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के समापन पर जीविका की अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी श्रीमती अनन्या सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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