पटना : बिहार की लोक-संवेदना, सांस्कृतिक स्मृति और स्त्री के आत्मसम्मान को केंद्र में रखकर तैयार किया गया नाट्य-प्रयोग ‘सीता माई’ का मंचन 12 सितंबर 2026 को शाम 6:30 बजे प्रेमचंद रंगशाला, पटना में किया गया। इस नाटक की प्रस्तुति नटवांगम् नवादा द्वारा तथा संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से की गई। नाटक का आलेख, परिकल्पना एवं निर्देशन रजनीश कुमार ने किया है।
‘सीता माई’ एक ऐसी रंगयात्रा है, जिसमें लव-कुश के माध्यम से माता सीता की खोज की जाती है। यह खोज केवल किसी स्थान या भूगोल में सीता को ढूँढने की नहीं, बल्कि उन असंख्य भावों और स्मृतियों में सीता को तलाशने की है, जिन्हें भारतीय लोक और साहित्य ने सदियों से अपने भीतर सँजोकर रखा है।
नाटक का कथानक उस बिंदु से आगे बढ़ता है, जहाँ राजधर्म के कठोर निर्णय के बाद सीता का वनवास होता है। राम अयोध्या में राजसिंहासन, प्रजा और राजधर्म के बीच रह जाते हैं, जबकि सीता वन में अपने जीवन की एक नई यात्रा शुरू करती हैं। दोनों के बीच दूरी है, लेकिन स्मृतियों और प्रेम का संबंध बना रहता है। नाटक इसी राम-सीता के विरह को एक मानवीय और संवेदनशील धरातल पर देखता है।
लव-कुश जब रामकथा को गाते हुए आगे बढ़ते हैं, तो उन्हें महसूस होता है कि जिस कथा को वे संसार को सुना रहे हैं, उसके बीच कहीं उनकी अपनी माँ की अनकही कथा छूट गई है। यहीं से उनकी यात्रा राम की कथा सुनाने से बदलकर सीता की खोज की यात्रा बन जाती है।
इस खोज में वाल्मीकि और तुलसीदास जैसे महाकवियों से लेकर गाँव-गाँव और घर-घर के अनगिनत लोककवियों द्वारा रची गई सीता की भावमूर्तियाँ सामने आती हैं। विवाह गीतों, लोकगीतों, रामलीला, रामायण पाठ और लोक परंपराओं में जीवित सीता को नाटक एक-एक गीत, काव्य, कथा और लीला के माध्यम से मंच पर पुनः रचता है।
निर्देशक रजनीश कुमार के अनुसार, “‘सीता माई’ किसी एक सीता को स्थापित करने का प्रयास नहीं है। यह उन तमाम सीताओं की खोज है, जो हमारे लोक, स्मृति और संवेदना में अलग-अलग रूपों में जीवित हैं। राम और सीता का विरह इस नाटक में केवल व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा, त्याग और आत्मसम्मान की एक व्यापक मानवीय यात्रा बन जाता है।”
नाटक में सीता की भूमिका गरिमा दिवाकर, राम की भूमिका कुलेश्वर ठाकुर, लव की भूमिका आदित्य दुबे और कुश की भूमिका गोपाल हलदर निभा रहे हैं।
कथा गायक लव के रूप में राहुल तथा कथा गायक कुश के रूप में कुशाग्र धर्मन शर्मा हैं। संजू पासवान जटायु, हनुमान और शत्रुघ्न की भूमिकाओं में हैं। कोरस में हृदिक ग्रोवर, विवेक और आदित्य शामिल हैं।
प्रस्तुति को संगीत और दृश्यात्मकता के स्तर पर भी विशेष रूप दिया गया है। संगीत परिकल्पना गरिमा दिवाकर, संगीत संचालन आदर्श, बाँसुरी पुरुषोत्तम कुमार, रिदम रोमन दास और सितार मोबीन मियां का है। प्रकाश परिकल्पना रमन कुमार, गति संरचना सुमंत एस. एम. एवं कुलेश्वर कुमार ठाकुर, रूप विन्यास सुदामा पांडेय तथा प्रोजेक्शन सत्यम शिवम का है।
मंच निर्माण सुनील विश्वकर्मा, मंच प्रबंधन संजू पासवान, प्रस्तुति प्रबंधन राहुल कुमार राज, मंच संचालन रविकांत सिंह, नेपथ्य सहयोग आदर्श एवं अभिषेक, वीडियोग्राफी शिवम, पोस्टर अभिषेक राज, ब्रोशर सेंटी कुमार तथा प्रचार-प्रसार लोक पंच द्वारा किया गया।









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