- पूर्णिया से पहली बार ग्रीस पहुंचेगा जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना, बिहार के कृषि निर्यात को मिली नई उड़ान
- उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों को बेहतर मूल्य और वैश्विक बाजार उपलब्ध कराना लक्ष्य, कृषि निर्यात नीति पर तेजी से हो रहा काम
30 सितंबर 2026
पटना/पूर्णिया : बिहार के कृषि इतिहास में आज एक गौरवशाली अध्याय जुड़ गया, जब कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधीन कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के सहयोग से जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना की पहली व्यावसायिक खेप को माननीय कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने ऑनलाइन माध्यम से पूर्णिया से ग्रीस (यूरोप) के लिए रवाना किया। मिथिला मखाना की यह पहली व्यावसायिक खेप बिहार के मखाना किसानों, एफपीओ, निर्यातकों तथा राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
इस अवसर पर माननीय कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने बिहार के सभी किसान भाई-बहनों, मखाना उत्पादक किसानों, एफपीओ, निर्यातकों तथा APEDA की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि मखाना बिहार की सांस्कृतिक धरोहर के साथ-साथ हमारे किसानों की मेहनत और सामर्थ्य की पहचान है। आज बिहार के खेतों और तालाबों से निकलकर मिथिला मखाना यूरोप के बाजार तक पहुँच रहा है। यह बिहार के कृषि उत्पादों की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है।
इस कार्यक्रम में बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ० दुनिया राम सिंह भी उपस्थित थे। माननीय कृषि मंत्री ने कुलपति को निदेश दिया कि मखाना की खेती को आधुनिक, आसान और अधिक लाभकारी बनाने के लिए कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विशेष रूप से शोध एवं अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि मखाना की खेती में किसानों की मेहनत और लागत को कम करने, उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने तथा आधुनिक तकनीकों और यंत्रीकरण को अपनाने की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। मखाना किसानों को वैज्ञानिक तकनीक से जोड़कर खेती को अधिक सुविधाजनक और लाभकारी बनाना सरकार की प्राथमिकताओं है।
श्री सिन्हा ने कहा कि देश के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी लगभग 80 से 85 प्रतिशत है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत ने 7,200 मीट्रिक टन से अधिक मखाना एवं उसके मूल्यवर्धित उत्पादों का 20 से अधिक देशों को निर्यात किया, जिससे लगभग 22 मिलियन अमेरिकी डॉलर की आय हुई। अमेरिका, मध्य-पूर्व और अफ्रीका सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय मखाना की मांग लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना की खेप अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अब ग्रीस तक पहुँची है। पहली बार बिहटा के बियाडा औद्योगिक क्षेत्र से 18 मीट्रिक टन जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना की समुद्री खेप ऑस्ट्रेलिया भेजी गई । यह इस बात का संकेत है कि गुणवत्ता, जीआई पहचान और बेहतर बाजार संपर्क से किसानों की आय के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।
कृषि मंत्री ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का गठन किया गया है। यह मखाना किसानों को बेहतर तकनीक, प्रशिक्षण, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार के किसानों की ओर से वे माननीय प्रधानमंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। बिहार में मखाना का उत्पादन एवं खेती का क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है और आने वाले समय में इसके मूल्यवर्धन तथा निर्यात की अपार संभावनाएँ हैं।
श्री सिन्हा ने कहा कि अब लक्ष्य केवल मखाना का उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और बिहार के मखाना को दुनिया के बाजार में मजबूत पहचान दिलाना है। ग्रीस के लिए रवाना हुई यह पहली व्यावसायिक खेप इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार द्वारा कृषि निर्यात नीति का निर्माण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों, एफपीओ और उद्यमियों को स्पष्ट दिशा, आवश्यक सुविधाएँ और प्रोत्साहन उपलब्ध कराना है।
कृषि मंत्री ने कहा कि निर्यात के लिए मजबूत आधारभूत संरचना आवश्यक है। इसी दिशा में बिहार में एक्सपोर्ट पैक हाउस का निर्माण किया गया है। इससे कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन और अधिक सुगम होगा तथा निर्यात के लिए आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।
उन्होंने कहा कि यह केवल शुरुआत है। आने वाले समय में मखाना के साथ बिहार के अन्य कृषि उत्पाद भी देश-दुनिया के बाजारों तक पहुँचेंगे। राज्य के किसानों की मेहनत और बिहार की कृषि विविधता को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

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