दिनांक–30/08/2026
बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष डॉ प्रेम कुमार आज बिहार विधान परिषद सभागार में आयोजित पंडित राजकुमार शुक्ल स्मृति सम्मान–2026 एवं लोक चिंतन स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए ।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पंडित राजकुमार शुक्ल किसान की पीड़ा, आम आदमी के संघर्ष और अपने अधिकार के लिए दृढ़ संकल्प का प्रतीक हैं। जब हम
पंडित राजकुमार शुक्ल को याद करते हैं, तो स्वाभाविक रूप से हमारे सामने चंपारण सत्याग्रह की ऐतिहासिक स्मृति उभरती है।
चंपारण के किसानों पर नील की खेती की जबरन व्यवस्था और अंग्रेजी शासन के अत्याचारों ने किसानों का जीवन कठिन बना दिया था। ऐसे समय में राजकुमार शुक्ल ने महात्मा गांधी जी से आग्रह किया कि वे चंपारण आएँ और किसानों की पीड़ा को स्वयं देखें।उनका आग्रह इतना दृढ़ था कि अंततः महात्मा गांधी जी चंपारण पहुँचे और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई।राजकुमार शुक्ल ने यह संदेश दिया कि यदि संकल्प मजबूत हो, तो एक सामान्य व्यक्ति भी इतिहास की धारा को बदल सकता है।
माननीय अध्यक्ष ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोक चिंतन की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोकतंत्र का अर्थ केवल चुनाव नहीं है। लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ है—
जनता की आवाज को सुनना, जनता की समस्याओं को समझना और जनता के हित में निर्णय लेना।भारत का लोकतंत्र इसलिए मजबूत है क्योंकि इसकी जड़ें गाँव, गरीब, किसान, मजदूर, युवा, महिला और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँची हुई हैं।
हमारे संविधान ने हमें लोकतांत्रिक व्यवस्था दी है और हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं का दायित्व है कि वे जनता की आकांक्षाओं को सम्मान दें।
बिहार की धरती तो सदियों से लोक चिंतन, लोक संस्कृति और लोकतांत्रिक चेतना की भूमि रही है। भगवान बुद्ध से लेकर महावीर, चाणक्य, सम्राट अशोक, लोकनायक जयप्रकाश नारायण और चंपारण के सत्याग्रह तक—इस धरती ने समाज को नई दिशा देने का कार्य किया है।
आज के बिहार की प्राथमिकताएँ
आज बिहार तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। हमें विकास के साथ-साथ सामाजिक न्याय, सुशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता देनी होगी।
हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि बिहार का कोई भी व्यक्ति विकास की मुख्यधारा से बाहर न रहे। किसान को उसकी मेहनत का सम्मान मिले,युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसर मिलें,महिलाएँ आत्मनिर्भर बनें,गरीब परिवारों को सम्मानजनक जीवन मिले,गाँवों में आधुनिक सुविधाएँ पहुँचें और बिहार का प्रत्येक नागरिक गर्व के साथ कह सके कि वह विकसित बिहार के निर्माण में सहभागी है।
माननीय अध्यक्ष ने आगे कहा कि पंडित राजकुमार शुक्ल जैसे महान व्यक्तित्वों की स्मृति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इतिहास केवल अतीत की कहानी नहीं, बल्कि भविष्य के निर्माण की प्रेरणा है।आज की युवा पीढ़ी को यह जानना चाहिए कि स्वतंत्रता हमें सहज रूप से नहीं मिली। इसके पीछे असंख्य ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों का त्याग, संघर्ष और बलिदान है।राजकुमार शुक्ल जी हमें सिखाते हैं कि—“व्यक्ति छोटा हो सकता है, लेकिन उसका संकल्प कभी छोटा नहीं होना चाहिए।”यदि हमारे भीतर समाज के लिए कुछ करने का संकल्प है, तो हम भी परिवर्तन के वाहक बन सकते हैं।
सम्मान केवल स्मृति नहीं, संकल्प भी है
आज जिन विभूतियों को पंडित राजकुमार शुक्ल स्मृति सम्मान–2026 से सम्मानित किया जा रहा है, मैं उन्हें हार्दिक बधाई देता हूँ।
हम सभी को मिलकर ऐसा बिहार बनाना है जो विकास के साथ अपनी संस्कृति, विरासत और सामाजिक मूल्यों को भी सुरक्षित रखे। हमारा बिहार ज्ञान की भूमि है, लोकतंत्र की भूमि है, संघर्ष और परिवर्तन की भूमि है।पंडित राजकुमार शुक्ल जी की स्मृति में हम यह संकल्प लें कि—जनता की आवाज को सम्मान देंगे,
लोकहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे,
समाज के कमजोर वर्गों के साथ खड़े रहेंगे,
युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर देंगे,
और विकसित, समृद्ध, शिक्षित एवं आत्मनिर्भर बिहार के निर्माण में अपना योगदान देंगे।
लोक चिंतन मजबूत होगा तो लोकतंत्र मजबूत होगा।लोकतंत्र मजबूत होगा तो राष्ट्र मजबूत होगा। हम सब मिलकर पंडित राजकुमार शुक्ल जी के संघर्ष, साहस और संकल्प को अपने जीवन में उतारें और विकसित बिहार तथा विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लें।
इस अवसर पर माननीय विधि मंत्री श्री संजय सिंह टाइगर सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
*जनसंपर्क पदाधिकारी*
*बिहार विधान सभा, पटना।*


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