- डीडीसी की बैठक में योजनाओं की प्रगति की हुई समीक्षा, लंबित कार्यों के त्वरित निष्पादन के निर्देश
- ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव ने योजनाओं की सिलसिलेवार ली जानकारी, कहा, सिलाई केंद्रों के लिए वीबी-जी राम जी से करें परिसंपत्ति का निर्माण
पटना: ग्रामीण विकास विभाग की ओर से सोमवार को राज्य के सभी उप विकास आयुक्तों (डीडीसी) की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता विभागीय प्रधान सचिव श्री पंकज कुमार ने की। बैठक में विभाग की विभिन्न महत्वपूर्ण योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जिलावार प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में वीबी-जी राम जी, जल-जीवन-हरियाली अभियान, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम), लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान (एलएसबीए), सामाजिक अंकेक्षण, प्रखंड एवं पंचायत स्तर के कार्यालयों का निरीक्षण, न्यायालयीन मामलों के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) आदि विषयों की समीक्षा की गई।
समीक्षा के क्रम में वीबी-जी राम जी के तहत सामग्री एवं मजदूरी मद के एफटीओ, चल रही योजनाओं, कार्य पूर्णता, रोजगार की मांग एवं उपलब्धता, ई-केवाईसी, पौधारोपण और अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई जहां श्रमिकों के ई-केवाईसी को प्राथमिकता के साथ पूरा करने पर जोर दिया गया। बैठक में जल-जीवन-हरियाली अभियान के अंतर्गत सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं को अतिक्रमण मुक्त कराने एवं तालाब-पोखर के जीर्णोद्धार की प्रगति की समीक्षा हुई। जीविका के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों के क्रेडिट लिंकेज, पशुधन आधारित आजीविका एवं जीविका सुधा बिक्री केंद्र, सिलाई-सह-वेयरहाउस केंद्र, मनरेगा भुगतान, प्रखंड परिसर में दीदी अधिकार केंद्र की स्थापना एवं वित्तीय प्रबंधन से संबंधित विषयों की समीक्षा की गई।
प्रधान सचिव श्री पंकज कुमार ने कहा कि गांवों में सिलाई का बड़ा महत्व है। इस हुनर की लोकप्रियता और उससे रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। ऐसे में जरूरत पड़ने पर एक जुलाई से शुरू नई योजना वीबी-जी राम जी से भी सिलाई केंद्रों के लिए परिसंपत्ति का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने और अतिक्रमण के शिकार विभागीय भवनों को चिन्हित कर उन्हें अतिक्रमण मुक्त कराने के साथ ही इनका सौंदर्यीकरण कराकर विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए इस्तेमाल में लाया जाय। सामाजिक अंकेक्षण की प्रगति, अंकेक्षित पंचायतों की स्थिति एवं लंबित मामलों के निष्पादन की दिशा में उन्होंने कड़े निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि अधिकारी लंबित जन शिकायतों एवं विभागीय मामलों का निर्धारित समय-सीमा में निष्पादन सुनिश्चित करें। साथ ही एक्शन टेकेन रिपोर्ट (एटीआर) शीघ्र उपब्ध कराएं। दिन भर चली इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रधान सचिव ने ग्रामीण हाटों के विकास, वीबी-जी राम जी के तहत नाबार्ड की वित्तीय सहभागिता और इससे ग्रामीण हाटों के निर्माण के लिए जिलों में स्थल चिह्नित करने एवं संबंधित विवरणी अद्यतन करने की स्थिति की समीक्षा की। अंत में उन्होंने सभी उप विकास आयुक्तों को जिलों में योजनाओं की नियमित समीक्षा, लंबित कार्यों में तेजी लाने, गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध क्रियान्वयन, जनहित से जुड़े मामलों के त्वरित निष्पादन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। कहा कि विभागीय योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों एवं ग्रामीण समुदाय तक प्रभावी रूप से पहुंचाना हमारी प्रमुख जिम्मेदारी है।

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