उर्वरक कंपनियों की मनमानी नहीं चलेगी, टैगिंग करने वालों पर होगी कार्रवाई







  • खाद की आपूर्ति से लेकर बिक्री तक हर स्तर पर होगी निगरानी, किसानों को नहीं होने देंगे परेशान
  • बिहार में खाद की कोई कमी नहीं, कालाबाजारी करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई
  • लाइसेंस लेकर गड़बड़ी करने वालों पर होगी कार्रवाई, सक्रिय विक्रेताओं को मिलेगी प्राथमिकता ~ श्री विजय कुमार सिन्हा

 

19 अगस्त 2026

पटना। माननीय कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने बुधवार को उर्वरक कंपनियों, एजेंसियों, होलसेलरों, रिटेलरों एवं संबंधित विभागीय पदाधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत सरकार द्वारा निर्धारित उर्वरक संबंधी सभी गाइडलाइन को बिहार में पूरी तरह लागू कराया जाएगा।

कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों के हित में एक अहम पहल करते हुए निर्णय लिया है कि रिटेलर उर्वरक विक्रेताओं को होलसेलर तथा होलसेलरों को रिटेलर का लाइसेंस देने की व्यवस्था की जाएगी, जिससे उर्वरक की आपूर्ति एवं वितरण व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी और किसानों को निर्धारित दर पर उर्वरक आसानी से उपलब्ध हो सकेगा।उर्वरक कंपनियों से अच्छे एवं सक्रिय विक्रेताओं की सूची उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि लाइसेंस से संबंधित प्रक्रिया में उन्हें प्राथमिकता दी जा सके।

उन्होंने कंपनियों को निर्देश दिया कि खुदरा विक्रेताओं के बीच उर्वरक का समानुपातिक वितरण सुनिश्चित किया जाए। किसी भी स्तर पर अनियमितता, मनमानी या भेदभाव पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। निष्क्रिय उर्वरक विक्रेताओं का लाइसेंस रद्द किया जाएगा तथा लाइसेंस लेकर गड़बड़ी करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।

उन्होंने उर्वरक विक्रेताओं को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि अगले 15 दिनों के भीतर व्यवस्था में सुधार कर लें और सभी अनियमितताओं को दूर कर लें, अन्यथा इसके बाद गड़बड़ी पाए जाने पर दोषी विक्रेताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। 

श्री सिन्हा ने स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी उर्वरक कंपनी द्वारा टैगिंग नहीं की जाएगी और न ही किसी उर्वरक प्रतिष्ठान पर लाइसेंस में उल्लिखित उत्पादों के अलावा जिंक, जाइम आदि किसी अन्य टैग्ड प्रोडक्ट की बिक्री की जाएगी; यदि कोई कंपनी टैगिंग के माध्यम से उत्पाद उपलब्ध कराने या होलसेलर अथवा रिटेलर को इसे खरीदने के लिए बाध्य करती है, तो उसके विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई करते हुए कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।साथ ही, किसी दुकानदार को माप-तौल से संबंधित किसी प्रकार की गड़बड़ी या परेशानी का सामना करना पड़ता है तो वह लिखित शिकायत कृषि विभाग को उपलब्ध कराएं। शिकायत की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

 बिहार में उर्वरक का पर्याप्त भंडार

कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार में उर्वरक की कोई कमी नहीं है। राज्य में यूरिया की आवश्यकता 6,73,387 मीट्रिक टन है, जबकि वर्तमान में 7,32,987 मीट्रिक टन उपलब्ध है। इसी प्रकार डीएपी की आवश्यकता 1,84,000 मीट्रिक टन के विरुद्ध 1,25,000 मीट्रिक टन उपलब्ध है। एनपीके का 1,59,000 मीट्रिक टन भंडार उपलब्ध है तथा इसके विकल्प के रूप में एमओपी भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। एसएसपी की 85,807 मीट्रिक टन मांग के विरुद्ध 74,335 मीट्रिक टन उपलब्ध है।

उन्होंने कहा कि राज्य में खाद की कोई कमी नहीं है। कृत्रिम अभाव पैदा करने, कालाबाजारी करने अथवा किसानों को परेशान करने की मानसिकता रखने वालों पर सरकार की नजर है। ऐसे लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उर्वरक की उपलब्धता, उचित मूल्य, गुणवत्ता एवं पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करने के लिए विभाग लगातार निगरानी कर रहा है।

बैठक में उर्वरक कंपनियों के प्रतिनिधि, राज्य के विभिन्न जिलों से आए उर्वरक विक्रेता तथा कृषि विभाग के संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के उपरांत माननीय कृषि मंत्री ने प्रेस को संबोधित कर विभाग की प्राथमिकताओं एवं किसानों के हित में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी।

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