शहर में बढ़ता अपराध फारबिसगंज के सभ्य समाज के मुँह पर करारा तमाचा है। प्रदीप देव राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राम सेना


अररिया/फारबिसगंज से ज्ञान मिश्रा की रिपोर्ट:

 जिस तरह से वरिष्ठ दवा व्यवसायी पवन केडिया जी की हत्या हुई उससे ये प्रश्न उठना लाजिमी है कि आखिर फारबिसगंज के व्यवसायी वर्ग की सुरक्षा का पैमाना क्या है?

बाइक चोरी, डिक्कीतोड़, सेंधमारी, और छिनतई से त्रस्त फारबिसगंज में एक बड़े मृदुभाषी व्यवसायी की हत्या कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़ा करता है। पुलिस को ये भी पता लगाना चाहिए कि स्थानीय स्तर पर इन अपराधियों को संरक्षण आखिर कौन दे रहा है? आज फारबिसगंज उद्योगविहीन है तो इसका एकमात्र कारण अपराधियों का आतंक है। 

पवन जी से पहले भी अरुण गोलछा, आशीष सिंह, भंवरलाल लखोटिया, प्रदीप चौधरी, प्रमोद मरोठी एक लंबी सूची है उन बड़े व्यवसाइयों की जो इन अपराधियों का शिकार हुए हैं। बड़ी बात ये भी है कि फारबिसगंज पुलिस अपने सूचना तंत्र का कितना इस्तेमाल करती है, दो दिन पूर्व हिं यहाँ अंतरजिला अपराधी पकड़ाने के बाद भी ये घटना घटित होने पुलिस के नाकामी को प्रदर्शित करने के लिए काफी है। 

श्रीराम सेना किसी भी तरह के अपराध एवं सामाजिक भेदभाव के खिलाफ मजबूती से खड़ा रहेगा। हम प्रसाशन से मांग करते हैं कि पवन केडिया के हत्यारे को पुलिस जल्द से जल्द गिरफ्तार करे साथ हिं व्यवसाइयों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। श्रीराम सेना जिले के पुलिस अधीक्षक से निवेदन करता है कि शहर में पुलिस गश्त नियमित हो, हर चौक चौराहे पर पुलिस बल मौजूद रहे, शहर के प्रवेश एवं निकास मार्ग पर निगरानी की व्यवस्था सुदृढ़ हो।

 जहाँ नजर रखना मुश्किल है उस जगह पर सीसीटीव कैमरा लगाया जाय। हमारे अर्थव्यवस्था की रीढ़ व्यपारी वर्ग को सुरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है। पुलिस जल्द अपराधियों को गिरफ्तार नहीं करती तो श्रीराम सेना चरणबद्ध तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होगा।

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